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सूर्य कुमार यादव: मिस्टर 360 को अचानक ये क्या हुआ, कैसे रूठा बल्ला
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
सोशल मीडिया को आईपीएल के दौरान हर रोज़ शायद एक हीरो और एक विलेन की तलाश होती है.
कोई ताबड़तोड़ मैच जिताने वाली पारी खेलता है या फिर कमाल की गेंदबाज़ी करता है.
फिर उसके बचपन की पृष्ठभूमि से लेकर मौजूदा समय तक के संघर्ष और कामयाबी को हर किसी के सामने रख दिया जाता है ताकि उस खिलाड़ी पर तारीफ़ की बौछार हो सके.
लेकिन, साथ ही सोशल मीडिया को हर रोज़ एक विलेन की भी तलाश होती है, जिस पर पूरी भड़ास निकाली जा सके.
एक खिलाड़ी जो पहले से स्थापित हो और वो संघर्ष करता दिखे, तो बहुत सारे आलोचकों को उसे 'मैच का मुजरिम' बनाने में भी काफी मज़ा आता है.
टीम इंडिया के मौजूदा कोच राहुल द्रविड़ ने एक बार मुस्कराते हुए ही सही लेकिन बहुत गंभीर बात कही थी जब उन्हें 'द वॉल' यानी "टीम इंडिया की दीवार" का तमगा दिया गया.
उस वक्त द्रविड़ ने कहा था कि ये मीडिया को काफ़ी पसंद है, क्योंकि जिस दिन उनका फ़ॉर्म ख़राब होगा उन्हें 'दीवार में दरार' टाइप वाली हेडलाइन लिखने में मज़ा आएगा.
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ऐसा हुआ भी, जब द्रविड़ 2011-12 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर संघर्ष कर रहे थे.
'सूर्य पर लगा ग्रहण'
मौजूदा दौर में सूर्य कुमार यादव के साथ ऐसा ही हो रहा है. जिस सूर्य कुमार यादव को 'SKY' कहते उसकी तारीफ़ में कसीदे गढ़ते हुए कोई भी थकता नहीं दिख रहा था, उसी खिलाड़ी के लिए 'सूर्य पर लगा ग्रहण' जैसी हेडलाइन लगाकर उस दिन के मैच का मुजरिम की तलाश ख़त्म की जा रही है.
सूर्यकुमार यादव के लिए पिछले दो महीने का सफ़र इतना अजीब रहा है कि उन्हें यक़ीन ही नहीं हो रहा होगा कि उससे पहले 12 महीने का सफ़र किसी सुनहरे सपने से कम नहीं था.
1 फरवरी 2023 को सूर्यकुमार यादव ने अहमदाबाद के नंरेद्र मोदी स्टेडियम में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ टी20 मैच में 24 रनों की एक छोटी लेकिन उपयोगी पारी खेली थी.
इसे खेल की क्रूरता का हिस्सा कह लें या फिर समय का फेर, उस दिन के बाद से अगली 7 पारियों में (टेस्ट में 1, वन-डे और आईपीएल के 3-3 मैच) में वो कुल 24 रन ही जुटा पाए हैं.
लेकिन सबसे मायूस करने वाली बात ये रही है कि इन सात पारियों के दौरान 4 मौक़ों पर वो दूसरी गेंद तक का सामना नहीं कर पाए हैं और 'गोल्डन डक' का शिकार हुए हैं.
सूर्यकुमार यादव के चेहरे पर उनके तेज़ की बजाए हैरान-परेशान करने वाले भाव दिखते हैं.
रैंकिंग में नंबर 1
इस दौर को देखते हुए वाकई इस बात पर यक़ीन करना मुश्किल होता है कि अब भी वे टी20 की आईसीसी रैंकिंग के लिहाज़ से दुनिया के नंबर 1 बल्लेबाज़ है.
नंबर दो बल्लेबाज़ पाकिस्तान के मोहमम्द रिज़वान और उनके बीच करीब 100 प्वाइंट्स ( 95) का फासला है.
ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि साल 2022 में सबसे ज़्यादा 1164 रन बनाने वाले मुंबई के इस बल्लेबाज़ का स्ट्राइक रेट (187.43) और औसत ( 46.56) भी हतप्रभ करने वाला था.
पिछले साल सूर्या ने 9 अर्धशतक बनाने के अलावा दो शतक भी जड़े थे, जो इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड जैसे मुल्कों में आए थे.
उन दोनों दौरों पर सूर्या जब शतक लगाने के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने आए, तो उन्होनें भी ये मानने से इनकार नहीं किया था कि उन्हें खुद की असाधारण निरंतरता पर हैरानी होती है.
ये वो दौर था जब विराट कोहली जैसे दिग्गज कहते थे कि सूर्या को बल्लेबाज़ी करते हुए देखने से ऐसा आभास होता है कि वो पिच पर नहीं, बल्कि वीडियो गेम में बल्लेबाज़ी कर रहे हों.
ऑस्ट्रेलिया में टी20 वर्ल्ड कप के दौरान हर मैच में अमूमन सूर्या के सामने बेबस दिखते विरोधी गेंदबाज़ और अक्सर हैरत में विपक्षी कोच के भाव 1970 और 80 के दशक में सर विवियन रिचर्ड्स के दबदबे वाले दौर की याद दिला देता था.
जब गरज रहा था बल्ला..
वर्ल्ड कप के दौरान मेलबर्न में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ उनके हैरतअंगेज़ अंदाज़ ने दुनिया भर से आए तमाम पत्रकारों को कुछ समय तक अपना काम रोककर उनकी बल्लेबाज़ी को देखने के लिए मजबूर कर दिया था.
पेशेवर करियर में किसी नए खिलाड़ी के लिए अनुभवी पत्रकारों का ऐसा सम्मान और लगाव हर किसी को इतनी आसानी से नहीं मिलता है.
ऐसी कामयाबी के बाद नए साल यानी 2023 में सूर्या को पर तोहफ़े की बरसात होती है.
अगर राजकोट में वो श्रीलंका के ख़िलाफ़ एक धुंआधार शतक जमाते हैं, तो उन्हें टी20 फ़ॉर्मेट में उप-कप्तानी की ज़िम्मेदारी भी मिलती है.
वन-डे टीम संजू सैमसन की बजाए उन्हें प्राथमिकता मिलती है और यहाँ तक कि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ उन्हें टेस्ट क्रिकेट में भी खेलने का मौक़ा मिलता है. लेकिन, उसके बाद से समय का पहिया अजीब तरीक़े से घूमा.
दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ़ मैच से ठीक एक दिन पहले मेरी मुलाक़ात 32 साल के सूर्यकुमार यादव से होती है.
सूर्या के चेहरे पर वही पुराना जोश और हाथ मिलाने के अंदाज़ में उनकी चिरपिरिचित गरमाहट और खिलखिलाहट देखने को मिलती है.
सूर्या की दिनचर्या औऱ अभ्यास में किसी तरह का बदलाव नहीं दिखता है. जैसे वो पहले अपने खेल को लेकर सजग और प्रयत्नशील रहते थे, आज भी उनका अंदाज़ वही है.
'फिर दिखेगी चमक'
तो फिर आख़िर उन्हें हो क्या गया है? ये सवाल तो उनसे सीधे तौर पर शायद पूछने में हिचकिचाहट होती, तो मैनें उनसे सिर्फ़ इतना कहा कि उन्हें पसीने से तर-बतर देखते हुए अच्छा लग रहा है.
सूर्यकुमार यादव ने कहा था, "अपने हाथ में मेहनत करना ही है, फल देना ऊपर वाले का काम है. इसलिए मैं अपनी तरफ़ से मेहनत वैसे ही कर रहा हूँ, फल तो ऊपर वाला ही देगा."
ऐसा कहते हुए सूर्यकुमार यादव आगे बढ़ जाते हैं. उन्हें दिल्ली में फल नहीं मिला और वो फिर से शून्य पर ही आउट हुए.
लेकिन, मैच के बाद दिल्ली के कोच रिकी पोटिंग के साथ सूर्यकुमार यादव को काफ़ी देर तक बातचीत करते हुए देखने की तस्वीरें भी सामने आईं.
यहाँ बताना दिलचस्प होगा कि आईपीएल से पहले ही पोटिंग ने कहा था कि पूरी दुनिया को पता है कि सफेद गेंद की क्रिकेट में सूर्या क्या कुछ कर गुज़रने की काबिलियत रखते हैं. भारत को उन पर भरोसा दिखाना चाहिए क्योंकि ऐसे खिलाड़ी आपको वर्ल्ड कप जिता सकते हैं.
सबसे ज़्यादा वनडे वर्ल्ड कप खेलने वाले पोटिंग ने ये भी कहा था कि सूर्या के खेल में भले ही निरंतरता का अभाव है, लेकिन वो उन्हें पुराने साथी एंड्रयू साइमंड्स की याद दिलाते हैं, जो बड़े लम्हों के दौरान मैच-विनर की भूमिका निभाते थे.
अपने वनडे करियर की पहली 18 पारियों में जिस बल्लेबाज़ ने कभी शून्य पर ख़ुद को आउट होते नहीं देखा था, उसे ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ पिछली तीन पारियों में ना सिर्फ़ लगातार बिना खाता खोले पवेलियन वापस लौटने के सदमे वाले अनुभव से गुज़रना पड़ा है, बल्कि और चुभने वाली बात ये है कि इन तीनों पारियों के दौरान हर बार वो पहली ही गेंद पर आउट हुए.
लेकिन, क्रिकेट इतिहास में ऐसा पहली बार नहीं हुआ था. अगर सिर्फ़ वनडे क्रिकेट की बात करें तो एलेक स्टीवर्ट, एंड्रयू साइमंड्स और शेन वॉटसन जैसे धुरंधर भी गोल्डन डक यानी पहली ही गेंद पर आउट हो चुके हैं.
सचिन तेंदुलकर भले ही गोल्डन डक का शिकार नहीं हुए लेकिन 1994 में वो भी लगातार तीन बार वनडे मैचों में शून्य पर आउट हुए.
ये आँकड़े इस बात की तरफ शायद इशारा करते है कि खिलाड़ी चाहे कितना भी लाजवाब क्यों ना हो, हर किसी को एक ऐसे दौर से गुज़रना पड़ता है, जब क्रिकेट उन्हें अचानक से निर्दयी दिखने लगता है.
अच्छी बात है कि सूर्या पर उनकी टीम का भरोसा बरकार है और इसलिए लेग स्पिनर पीयूष चावला ने उनके समर्थन में कहा कि सिर्फ़ 10 गेंद का इंतज़ार करें. तीन चौके लगते ही आपको वो पूराना सूर्या दिखने लगेगा.
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