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ओलंपिक में पाकिस्तान के वे खिलाड़ी जो हारकर भी छाए
जापान के टोक्यो में चल रहे ओलंपिक 2020 में पाकिस्तान का कोई भी एथलीट पदक नहीं जीत सका है.
पाकिस्तान लगभग तीन दशकों से ओलंपिक में पदक जीतने का इंतज़ार कर रहा है और अब पाकिस्तानी एथलीटों की चुनौती समाप्त होने के बाद ये इंतज़ार और भी लंबा हो गया है.
पाकिस्तान ने आख़िरी बार 1992 में बार्सीलोना ओलंपिक में हॉकी में कांस्य पदक जीता था. तब पाकिस्तान की टीम तीसरे नंबर पर रही थी.
1988 के बाद से पाकिस्तान ने किसी व्यक्तिगत स्पर्धा में कोई पदक नहीं जीता था. पाकिस्तान के लिए आख़िरी व्यक्तिगत मुक्केबाज़ हुसैन शाह पदक लाए थे.
टोक्यो ओलंपिक में पाकिस्तान का 22 सदस्यीय दल गया था, जिसमें दस एथलीट थे और 12 अधिकारी थे.
लेकिन पाकिस्तान को पदक की सबसे बड़ी उम्मीद अरशद नदीम से थी जो शनिवार को हुए फ़ाइनल में पाँचवे स्थान पर रहे.
भाला फेंक की इस स्पर्धा में भारत के नीरज चोपड़ा ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा है. वो किसी ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं.
अरशद नदीम ने बुधवार को हुए क्वॉलिफाइंग राउंड में 85 मीटर दूर भाला फेंककर फ़ाइनल में जगह बनाई थी.
अरशद प्रारंभिक दौर में ग्रुप बी में थे और ग्रुप में शीर्ष पर थे. फ़ाइनल के लिए क्ववॉलिफ़ाई राउंड में वो तीसरे नंबर पर थे.
अरशद नदीम सीधे ओलंपिक के लिए क्वॉलिफ़ाई करने वाले पहले पाकिस्तानी एथलीट हैं. इससे पहले पाकिस्तान के एथलीट वाइल्ड कार्ड एंट्री के ज़रिए ओलंपिक में हिस्सा ले चुके हैं.
अरशद नदीम ने 2018 में जकार्ता में हुए एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था. उन्होंने 2017 इस्लामिक सॉलिडैरिटी गेम्स और 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स भी पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया है. उन्होंने क़तर में हुई वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया था.
तल्हा तालिब (भारोत्तोलन 67 किलोग्राम वर्ग, पांचवा स्थान)
पाकिस्तान ने टोक्यो में कोई पदक नहीं जीता. इन खेलों में पाकिस्तान के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अरशद नदीम के अलावा भारोत्तोलन में तल्हा ताबिल ने किया है जो पदक जीतने के बेहद करीब थे और अपने वर्ग में पांचवे स्थान पर रहे.
21 वर्षीय तल्हा तालिब ने 67 किलोग्राम वर्ग में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया. 46 साल बाद पाकिस्तान का कोई एथलीट भारोत्तोलन के ओलंपिक मुक़ाबले में पहुँच सका.
मूल रूप से गुजरांवाला के रहने वाले तल्हा तालिब ने ओलंपिक के शुरूआती दौर में अच्छा प्रदर्शन किया और अपने तीनों प्रयासों में कामयाब रहे. पहले दौर के अंत में वो दूसरे नंबर पर थे.
उन्होंने कुछ पलों के लिए पाकिस्तान को ओलंपिक में पदक जीतने की उम्मीद दे दी थी. देश को लग रहा था कि आख़िरकार 29 साल बाद कोई पदक आ ही जाएगा.
हालांकि दूसरे राउंड में उनका पहला प्रयास नाकाम रहा और आंखों के आगे अंधेरा छा जाने की वजह से वो 166 किलो वज़न नहीं उठा सके.
हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी. अगले दो प्रयासों में वो पहले 166 और 170 किलो वज़न उठाने में कामयाब रहे.
उनके कांस्य पदक जीतने की उम्मीदें थीं लेकिन इतालवी भारोत्तोलक ने अपने आख़िरी प्रयास में 177 किलोग्राम वज़न उठा लिया.
लेकिन पाकिस्तान में तल्हा तालिब का नाम कई निश्चित तौर पर अगले कई सालों तक याद रखा जाएगा.
बिस्मा ख़ान (तैराकी, 50 मीटर फ्री स्टाइल के शुरुआती दौर में बाहर हुईं)
पाकिस्तान की तैराक बिस्मिल्लाह ख़ान ने 30 जुलाई को तैराकी की 50 मीटर फ़्रीस्टाइल स्पर्धा में हिस्सा लिया लेकिन वो नाकाम रहीं.
वो इस स्पर्धा में 8 तैराकों में सातवें नंबर पर रहीं.
उन्होंने 2019 के दक्षिण एशियाई खेलों में 200 मीटर फ्री स्टाइल में रजत पदक जीता था.
उनकी बड़ी बहन 2008 बीजिंग ओलंपिक में हिस्सा ले चुकी हैं.
महूर शहज़ाद (पहले दो मैच हारने के बाद बाहर हुईं)
महूर शहज़ाद अपने पहले दोनों मुक़ाबले हारने के बाद भले ही शुरुआत में ही ओलंपिक से बाहर हो गई हों लेकिन वो पाकिस्तान की तरफ़ से ओलंपिक में बैडमिंटन खेलने वाली पहली खिलाड़ी बन गई हैं.
उन्होंने ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में पाकिस्तान के दल का नेतृत्व किया था.
विश्व की 133वें नंबर की खिलाड़ी महूर शहज़ाद कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. उन्होंने 2017 और 2019 का पाकिस्तान इंटरनेशनल इवेंट जीता था.
महूर शहज़ाद ऐसी पहली पाकिस्तानी खिलाड़ी भी हैं जो बैडमिंटन के शीर्ष 150 खिलाड़ियों में जगह बना चुकी हैं.
वो बीते तीन सालों से पाकिस्तान की नेशनल चैंपियन भी हैं.
मोहम्मद हसीब तारिक (तैराकी सौ मीटर फ्री स्टाइल हीट में नाकाम)
हसीब तारिक पाकिस्तान की तैराकी टीम के सदस्य हैं. वो 100 मीटर फ्रीस्टाइल के फ़ाइनल में पहुंचने में नाकाम रहे.
वो 70 तैराकों में 62वें स्थान पर रहे.
कारची में पैदा हुए हसीब तारीक को पाकिस्तान का सबसे प्रतिभाशाली तैराक माना जाता है.
शाह हुसैन शाह (जूडो)
शाह हुसैन शाह ने जूडो में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया लेकिन वो मिस्र के रमज़ान दरवेश से पहला ही मुक़ाबला हार गए. उन्हें तीन पीले कार्ड दिए गए जिनकी वजह से उन्हें प्रतियोगिता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया.
शाह हुसैन शाह प्रसिद्ध पाकिस्तानी मुक्केबाद हुसैन शाह के बेटे हैं जिन्होंने 1988 ओलंपिक में पाकिस्तान के लिए कांस्य पदक जीता था. हुसैन शाह के बाद से पाकिस्तान ने अब तक कोई पदक नहीं जीता है.
28 वर्षीय हुसैन शाह इससे पहले रियो ओलंपिक में भी पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.
उन्होंने 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था. वो दक्षिण एशियाई खेलों में दो बार स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.
नज़मा परवीन (200 मीटर हीट में नाकाम)
30 वर्षीय नज़मा परवीन के लिए यह दूसरा ओलंपिक था. उन्होंने 200 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया लेकिन वो पहले दौर से आगे नहीं बढ़ सकीं.
23.1 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाली नज़मा ने ओलंपिक दौड़ 28.1 सेकंड में पूरी की और उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा.
ये नज़मा परवीन का दूसरा ओलंपिक था. वो पहले दौर में सात खिलाड़ियों की स्पर्धा में सातवें नंबर पर रहीं.
निशानेबाज़ गुलाम मुस्तफ़ा बशीर और ख़लील अख़्तर ( रैपिड फायर पिस्टल इवेंट में 10वां और 15वां स्थान)
पाकिस्तान के निशानेबाज़ों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया लेकिन पदक तक पहुँचने में नाकाम रहे.
गुलाम मुस्तफ़ा बशीर 25 मीटर रैपिड फ़ायर इवेंट के दूसरे दौर में कुछ खास नहीं कर सके औक फ़ाइनल से बाहर हो गए.
वहीं पहले दौर में वो छठे स्थान पर थे जबकि उनके साथी ख़लील अख़्तर 16वें नंबर पर थे.
हालांकि दूसरे चरण के ख़राब प्रदर्शन के बाद गुलाम मुस्तफा दसवें नंबर पर पहुंच गए.
ग़ुलाम जोसेफ़ (फ़ाइनल में पहुँचने में नाकाम)
19 साल के निशानेबाज़ ग़ुलाम जोसेफ़ ने 100 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में हिस्सा लिया. उन्होंने अपनी बेहतरीन शूटिंग से सभी को हैरान कर दिया.
उन्होंने पहले दौर में 578 अंक बनाए लेकिन क़िस्मत ने उनका साथ नहीं दिया.
फ़ाइनल के लिए क्वालीफ़ाई करने के लिए उन्हें शीर्ष 8 में जगह बनानी थी लेकिन वो नौवें स्थान पर रहे.
सातवें और आठवें नंबर के ख़िलाड़ियों के पास भी 578 ही अंक थे लेकिन गुलफाम ने दस से कम गोल किए थे जिसकी वजह से वो आगे नहीं बढ़ सके.
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