टोक्यो ओलंपिक: बेलारूस की एथलीट का वापस जाने से इनकार

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अपनी नेशनल टीम के बारे में सार्वजनिक रूप से शिकायत करने के बाद बेलारूस की एक ओलंपिक एथलीट को घर वापस लौटने के लिए टोक्यो के हवाई अड्डे पर ले जाया गया है.
क्रिस्टीना सिमनौस्काया सोमवार को महिलाओं की 200 मीटर स्पर्धा में भाग लेने वाली थीं.
लेकिन शॉर्ट नोटिस पर दूसरी दौड़ में शामिल करने को लेकर सार्वजनिक रूप से शिकायत करने के बाद, वे कहती हैं कि उन्हें सामान पैक करने के लिए कहा गया और हवाई अड्डे ले जाया गया.
उन्होंने अब अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) से हस्तक्षेप करने की अपील की है.
मैसेजिंग ऐप टेलिग्राम पर पोस्ट किए एक वीडियो में उन्होंने कहा, "वो मेरी अनुमति के बिना मुझे बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं."
“मैं आईओसी से इसमें हस्तक्षेप करने की अपील करती हूँ.”
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एक संक्षिप्त बयान में आईओसी ने कहा कि उसने धावक के बारे में मीडिया रिपोर्ट देखी है और बेलारूस की राष्ट्रीय ओलंपिक समिति से स्पष्टीकरण मांगा है.
इससे पहले क्रिस्टीना ने यूरोपियन रेडियो स्टेशन फॉर बेलारूस (ईआरबी) से कहा था कि वो अपने देश लौटने से डर रही हैं.
दरअसल, उन्होंने एक इंस्टाग्राम वीडियो में आरोप लगाया था कि टीम के कुछ साथियों के प्रतिस्पर्धा के लिए अयोग्य पाए जाने के बाद, बेलारूस के अधिकारियों ने इस गुरुवार के 400 मीटर रिले इवेंट में उन्हें शॉर्ट नोटिस पर शामिल किया था.
वीडियो पोस्ट करने के बाद सरकारी मीडिया ने उनकी आलोचना की. ओएनटी टेलीविजन चैनल ने कहा कि उनमें "टीम भावना" की कमी है.
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रविवार को उन्होंने कहा कि उनके कोच उनके कमरे में आए और उन्हें सामान पैक करके घर जाने को कहा. कथित तौर पर टोक्यो से इस्तांबुल जाने के लिए तुर्की एयरलाइंस की उड़ान 199 में उनकी टिकट बुक कराई गई.
धावक ने रॉयटर्स को बताया कि उन्हें टीम से इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उन्होंने "इंस्टाग्राम पर अपने कोच की लापरवाही के बारे में बात की थी."
हालांकि बाद में बेलारूस ओलंपिक टीम ने घोषणा की कि उन्हें अपनी "भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्थिति" के कारण टीम से हटा दिया गया था, और वे दोनों ही प्रतिस्पर्धा, 200 मीटर दौड़ और 400 मीटर रिले इवेंट में हिस्सा नहीं लेंगी.
वे अब जापान की पुलिस के साथ टोक्यो के हानेडा हवाई अड्डे पर हैं और बेलारूस के पत्रकार तादेउज़ गिज़ान के मुताबिक़, ऑस्ट्रिया में शरण के लिए आवेदन करना चाहती हैं.
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अपने देश नहीं लौटना चाहतीं?
क्रिस्टीना सिमनौस्काया ने रॉयटर्स से कहा कि वो अपने देश वापस नहीं लौटना चाहती हैं.
उन्होंने कहा कि उन्होंने टोक्यो के हानेडा हवाई अड्डे पर जापान पुलिस से सुरक्षा मांगी है ताकि उन्हें फ्लाइट में न बैठना पड़े.
उन्होंने टेलिग्राम से किए एक मैसेज में रॉयटर्स को कहा, "मैं बेलारूस वापस नहीं जाऊंगी."
बेलारूस ओलंपिक समिति ने एक बयान में कहा कि कोचों ने डॉक्टरों की सलाह पर क्रिस्टीना को गेम से अलग करने का फ़ैसला लिया है.
रॉयटर्स के एक फ़ोटोग्राफर ने एथलीट को जापानी पुलिस के पास खड़े देखा.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है मैं सुरक्षित हूं. मैं पुलिस के साथ हूं."
हानेडा एयरपोर्ट पर एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि वो टर्मिनल 3 पर एक महिला एथलीट के साथ थे.
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सिमनौस्काया का क्या है कहना?
अपने राजनीतिक विचारों के लिए जेल में डाल दिए गए या दरकिनार कर दिए गए एथलीटों का समर्थन करने वाली बेलारूसी स्पोर्ट सॉलिडैरिटी फाउंडेशन के एक सोर्स के हवाले से रॉयटर्स ने बताया है कि क्रिस्टीना सिमनौस्काया ने सोमवार को जर्मनी या ऑस्ट्रिया में शरण की अपील करने का सोचा है.
क्रिस्टीना ने एयरपोर्ट से रॉयटर्स को बताया, "हमारी कुछ लड़कियां यहां 4x400 मीटर रिले प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने नहीं आईं क्योंकि उनके पास पर्याप्त डोपिंग टेस्ट नहीं थे."

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"और कोच ने बिना मेरी जानकारी के मुझे रिले में शामिल कर लिया. मैंने इस बारे में सार्वजनिक रूप से बात की थी. मुख्य कोच मेरे पास आए और कहा कि ऊपर से मुझे हटाने का आदेश दिया गया है."
क्रिस्टीना ने कहा कि उन्होंने जापान में रहने वाले बेलारूस के लोगों से संपर्क किया है, ताकि वो उन्हें एयरपोर्ट से वापस ले जाएं.

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आईओसी ने क्या कहा?
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने सोमवार सुबह इस पूरे मामले के बारे में जानकारी दी.
आईओसी के प्रवक्ता मार्क एडम्स ने बताया कि क्रिस्टीना पिछली रात एयरपोर्ट के एक होटल में रुकी थीं और उन्होंने सुरक्षा माँगी थी.
उन्होंने बताया, "जापानी प्रशासन अब क्रिस्टीना की देखभाल कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था भी इसमें शामिल हो गई है. आईओसी उनसे बात कर रहा है और जानने की कोशिश कर रहा है कि वो क्या चाहती हैं. हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वो सुरक्षित महसूस करें."
एडम्स ने मुताबिक़ बेलारूस की नेशनल ओलंपिक कमेटी को इस बारे में लिखित रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.
पिछले साल लिए गए एक फ़ैसले के तहत बेलारूस की नेशनल ओलंपिक कमेटी के कई प्रमुख अधिकारियों को भी टोक्यो ओलंपिक में बैन कर दिया गया है. इसमें बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको के बेटे विक्टर लुकाशेंको भी शामिल हैं.
यह फ़ैसला उन आरोपों के बाद लिया गया था कि बेलारूस में सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले खिलाड़ियों को सुरक्षा नहीं मिल रही है.
मार्क एडम्स ने यह भी बताया कि वो रविवार को अमेरिकी ऐथलीट रेवेन सौंडर्स के मेडल जीतने के बाद पोडियम पर विरोध जताने के मामले की भी जाँच की जा रही है.
रेवेन काली और समलैंगिक अमेरिकी नागरिक हैं. उन्होंने सिल्वर मेडल जीतने के बाद अपने हाथ ऊपर उठाकर कलाइयों से क्रॉस का प्रतीक बनाया था. इसे वंचित लोगों से एकजुटता का संकेत माना जाता है.
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