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वेस्टइंडीज़ के इन गेंदबाज़ों से संभल कर रहना होगा
एंटीगा टेस्ट के पहले दिन भारत ने भले दो सौ से ज्यादा रन बना लिए हों लेकिन इसके लिए छह विकेट गंवाने पड़े.
लेकिन इससे आपको वेस्टइंडीज़ के गेंदबाज़ों के बारे में ज्यादा पता नहीं चलता.
वेस्टइंडीज़ के तेज़ गेंदबाज़ों की मारक क्षमता का अंदाजा तब होता है जब स्कोर बोर्ड पर आप ये देखते हैं कि इन दिनों रन मशीन बन चुके विराट कोहली और मौजूदा टेस्ट टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा दहाई अंकों में नहीं पहुंच पाए हैं.
पुजारा केमार रोच की तेजी के शिकार बने तो कोहली को शैनन गैब्रियल ने अपना शिकार बनाया है.
उम्मीद की जा रही है थी कि इस टेस्ट में कप्तान के तौर पर विराट कोहली अपना 19वां टेस्ट शतक बनाकर रिकी पॉन्टिंग के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगे. दूसरी पारी में उनके सामने ये मौका जरूर होगा लेकिन इसके लिए उन्हें वेस्टइंडीज़ के तेज़ गेंदबाज़ों से पार पाना होगा.
ख़तरनाक केमार रोच
दरअसल मौजूदा वेस्टइंडीज़ के तेज आक्रमण में केमार रोच और शैनन गैब्रियल के अलावा कप्तान जैसन होल्डर भी अपनी गेंदों से भारतीय बल्लेबाज़ों को मुश्किल में ढाल सकते हैं. एंटीगा टेस्ट के पहले दिन के खेल में उन्हें कामयाबी भले नहीं मिली हो लेकिन 15 ओवरों की गेंदबाज़ी में उन्होंने महज 27 रन ख़र्चे हैं.
लेकिन तेजी के मामले में सबसे ख़तरनाक गेंदबाज़ तो केमार रोच ही हैं. 30 साल के रोच वेस्टइंडीज़ के सबसे अनुभवी गेंदबाज़ हैं, उन्होंने 53 टेस्ट मैचों में 184 विकेट चटकाए हैं. अपने करियर के शुरुआती दिनों में रोच काफ़ी तेज़ गेंदबाज़ थे जिनकी गति 145 किलोमीटर प्रति घंटे से ज़्यादा की थी. 2009 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दो टेस्ट मैचों में 13 विकेट के साथ उन्होंने करियर की शुरुआत की थी.
इसके अगले ही सिरीज़ में उन्होंने अपनी गेंद से लीजेंडरी बल्लेबाज़ रिकी पॉन्टिंग को पर्थ में रिटायर हर्ट कर दिया था. 146 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से फेंकी गई गेंद को जब तक पॉन्टिंग समझते तब गेंद उनकी कोहनी से जा टकराई थी.
केमार रोच बहुत लंबे तो नहीं हैं, लेकिन पांच फ़ीट 10 इंच की लंबाई से वे घातक शार्ट पिच गेंदें फेंकने में माहिर हैं.
हालांकि कंधे की सर्जरी के चलते उनकी स्पीड भी कम हो गई है लेकिन अब वे कहीं ज़्यादा चालाक गेंदबाज़ बन चुके हैं. इसकी तस्दीक आंकड़ों से भी होती है, 2017 के बाद उन्होंने 19 की औसत से विकेट चटकाए हैं, जबकि उनका करियर औसत 27 से ज़्यादा का रहा है.
केमार रोच की अगुवाई में शैनन गैब्रियल ने टीम इंडिया को कहीं ज़्यादा मुश्किल में डाला. उन्होंने पहले विराट कोहली को सस्ते में आउट किया और इसके बाद विकेट पर जम चुके अजिंक्य रहाणे को 81 रन पर आउट कर उन्हें शतक पूरा नहीं करने दिया.
शैनन गैब्रियल ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 2012 में लॉर्ड्स टेस्ट से अपने करियर की शुरुआत की थी. उन्हें शुरुआती दिनों में इयन बिशप जैसा गेंदबाज़ माना जाता रहा. पहले तो उनमें तेजी भर थी लेकिन समय के साथ उनकी गेंदबाज़ी निखरी है, पैनापन बढ़ा है.
2017 के बाद से अब तक उन्होंने टेस्ट मैचों में 50 से ज्यादा विकेट लिए हैं और इस दौरान उनका औसत 15 के आसपास रहा है.
कप्तान भी कम नहीं
इन दोनों गेंदबाज़ों का साथ देने के लिए कप्तान जैसन होल्डर भी मौजूद हैं.
2017 के बाद उन्होंने उनका गेंदबाज़ी औसत 15 से कम रहा है. इस दौरान उन्होंने 40 से ज्यादा विकेट भी चटकाए हैं.
होल्डर में रोच और गैब्रियल जितनी तेजी तो नहीं है, लेकिन 6 फीट 7 इंच लंबे होल्डर अपनी गेंदों में असमान्य उछाल लाकर बल्लेबाज़ों को छकाते रहे हैं.
ऐसे में भारतीय टीम को टेस्ट चैंपियनशिप की शुरुआत अगर जीत से करनी हो तो भारतीय बल्लेबाज़ों को इन तीन गेंदबाज़ों का सामना डटकर करना होगा.
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