आईपीएल-12 फ़ाइनल: चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस में से कौन कितना है मज़बूत

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
इसी महीने 30 तारीख़ से शुरू होने जा रहे आईसीसी विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट से पहले अब से कुछ घंटे बाद देसी-विदेशी खिलाड़ियों से सजे आईपीएल-12 का फ़ाइनल हैदराबाद में खेला जाएगा.
फ़ाइनल में तीन-तीन बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस आमने-सामने होंगी.
पिछली बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स ने साल 2010, 2011 और साल 2018 में ख़िताबी जीत हासिल की है. इसके अलावा चेन्नई सुपर किंग्स चार बार उपविजेता भी रही.
अब यह भी इत्तेफ़ाक़ ही है कि दो बार फ़ाइनल में उसे मुंबई इंडियंस ने ही हराया. अब सवाल ये है कि क्या इस बार करिश्माई कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की रणनीति ऐसी होगी जो मुंबई के कप्तान रोहित शर्मा को रोक सके?
मुंबई इंडियंस ने साल 2013, 2015 और साल 2017 में चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया.
वैसे चेन्नई की टीम साल 2017 और 2018 में आईपीएल से निलंबित रही.
इस लिहाज़ से चेन्नई का 10 में से आठ बार फ़ाइनल में पहुंचना बताता है कि वह कितनी ताक़तवर टीम रही है लेकिन अब उसके सामने ख़िताब बचाने की चुनौती है.

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मुंबई का रिकॉर्ड बेहतर
इस बार आईपीएल में रोहित शर्मा की कप्तानी में खेल रही मुंबई इंडियंस ने फ़ाइनल में पहले चेन्नई को तीन बार मात दी है.
मुंबई ने पहले तो उसे लीग चरण में खेले गए दोनों मुक़ाबलों में हराया.
उसके बाद प्लेऑफ़ के पहले क्वालिफ़ायर में भी मुंबई ने चेन्नई को बेहद आसानी से छह विकेट से हराया.
अब अगर दोनों टीमों की ताक़त की बात की जाए तो चेन्नई के पास अनुभवी खिलाड़ियों की कमी नहीं है.
ख़ुद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के अलावा शेन वॉटसन, सुरेश रैना, हरभजन सिंह, इमरान ताहिर, रविंद्र जडेजा और ड्वेन ब्रावो ने आईपीएल का हर रंग बख़ूबी देखा है.
दूसरी तरफ़ मुंबई इंडियंस के पास अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का बेहतरीन मिश्रण है.
मुंबई के कप्तान रोहित शर्मा को भी इन्हें साथ लेकर चलना ख़ूब आता है.

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लसिथ मलिंगा और किरेन पोलार्ड के पास भी अनुभव की कोई कमी नहीं है, तो जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या, कृणाल पांड्या, ईशान किशन और राहुल चहर युवा ख़ून है.
आईपीएल में इस बार मुंबई इंडियंस ने भले ही देर से लय पकड़ी लेकिन एक बार जीतना शुरू किया तो उसे रोकना मुश्किल हो गया.
वह अंक तालिका में भी सबसे बेहतर रन औसत और 18 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहते हुए प्लेऑफ़ में पहुंची.
धोनी के भरोसे चेन्नई
दूसरी तरफ़ चेन्नई ने शुरुआती मुक़ाबलों में लगातार जीत हासिल करते हुए दूसरी टीमों से बढ़त हासिल की लेकिन बाद में उसका दम फूल गया.
पूरे आईपीएल में चेन्नई ने कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के दम पर ही अपना सफ़र तय किया.
अगर किसी मैच में धोनी का बल्ला नहीं बोला तो उस मैच में उन्होंने अपनी शानदार कप्तानी के दम पर टीम को जीत दिला दी.
आज भी क्या मजाल है कि उनके विकेट के पीछे रहते कोई विरोधी बल्लेबाज़ आगे बढ़कर खेलने की हिम्मत कर सके. अगर किसी का बल्ला ज़रा भी चूका तो फिर धोनी ने पलक झपकते ही उसकी वेल्स उड़ाने में कोई देर नहीं की.
अब अगर दोनों टीमों के बल्लेबाज़ों की बात करें तो मुंबई इंडिंयस के सलामी बल्लेबाज़ क्विंटन डी कॉक शानदार फ़ॉर्म में हैं.

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क्विंटन डी कॉक ने अभी तक खेले गए 15 मैचों में चार अर्धशतक की मदद से पूरे 500 रन बनाए हैं.
पिछले आईपीएल में तो उनके बल्ले से आठ मैचों में केवल 201 रन बनाए थे.
कप्तान रोहित शर्मा थोड़ी देर से चमके लेकिन देर आयद दुरुस्त आयद वाली बात उन पर लागू होती है. उन्होंने 14 मैचों में दो अर्धशतक की मदद से 390 रन बनाए हैं.
इनके बाद सूर्यकुमार यादव ने बेहद समझदारी वाली क्रिकेट खेली है.
ख़ासकर पहले क्वालिफ़ायर में उन्होंने चेन्नई के हर गेंदबाज़ का हौसला तोड़ते हुए जिस अंदाज़ में नाबाद 71 रन बनाए और टीम को जीत दिलाई उससे उनका क़द बढ़ गया.
सूर्यकुमार यादव शुरू में तो तेज़ खेलते हैं लेकिन बाद में थोड़ा सुस्त पड़ जाते हैं लेकिन कप्तान रोहित शर्मा को उन पर पूरा भरोसा है.

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मुंबई के सितारे
लेकिन मुंबई को बल्लेबाज़ी से सबसे बड़ी ताक़त मिलती है क्रुणाल पांड्या, हार्दिक पांड्या और किरेन पोलार्ड की तिकड़ी से.
यह तीनों बल्लेबाज़ या फिर कहें कि ऑलराउंडर किसी भी गेंदाबाज़ की गेंद को बाउंड्री लाइन के बाहर चौके-छक्के की शक्ल में पहुंचाने में माहिर हैं.
उस मैच को भला कौन भुल सकता है जिसमें रोहित शर्मा की ग़ैर-मौजूदगी में कप्तानी का भार उठाते हुए पोलार्ड ने पंजाब के ख़िलाफ़ ताबड़तोड़ 83 रनों की पारी खेली जिसमें 10 छक्के भी शामिल थे.
पोलार्ड को इस बार एक भी विकेट नहीं मिला है लेकिन उनके बल्ले से चेन्नई को फ़ाइनल में सावधान रहना होगा.

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हार्दिक पांड्या ने तो अभी तक 15 मैच में 386 रन बनाने के साथ-साथ 14 विकेट भी लिए हैं.
वहीं क्रुणाल पांड्या ने भी 15 मैच में 11 विकेट और कुछ मैचों में उपयोगी रन बनाकर कप्तान का भार कम किया है.

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लेकिन कप्तान रोहित शर्मा का सबसे बड़ा हथियार है यॉर्कर के मालिक गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह. उन्होंने 15 मैच में 17 विकेट झटके हैं.
उनका बख़ूबी साथ देते हुए लसिथ मलिंगा ने भी 11 मैच में 15 विकेट लेकर विरोधी खेमे में ख़ौफ़ पैदा किया है.
इस लिहाज़ से मुंबई किसी से कम टीम साबित नहीं होती.

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रही बात चेन्नई की तो उसकी कामयाबी की सबसे बड़ी वजह उसका अपना मैदान है. अपने घर में खेलते हुए चेन्नई शेर की तरह हो जाती है.
पहली गेंद से ही टर्न लेती चेन्नई की विकेट पर हरभजन सिंह, इमरान ताहिर और रविंद्र जडेजा की तिकड़ी का जादू ख़ूब चला.
इमरान ताहिर ने तो अभी तक 15 मैच में 23 विकेट लेकर सबसे कामयाब गेंदबाज़ों की लिस्ट में दूसरा स्थान हासिल किया हुआ है.
उनसे अधिक केवल 12 मैचों में 25 विकेट दिल्ली के तेज़ गेंदबाज़ कैगिसो रबाडा ने लिए लेकिन अब फ़ाइनल हैदराबाद की पिच पर है जहां ख़ूब रन बने हैं.

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चेन्नई के स्टार खिलाड़ी
हरभजन सिंह ने 10 मैच में 16 और रविंद्र जडेजा ने 15 मैचों में 15 विकेट लेकर चेन्नई को फाइनल में पहुंचाने में अपना अहम योगदान दिया.
रही बात बल्लेबाज़ों की तो शेन वॉटसन और फॉफ डू प्लेसी की सलामी जोड़ी ने जैसी कमाल की बल्लेबाज़ी दूसरे क्वालिफायर में दिल्ली के ख़िलाफ़ की वैसी अगर मुंबई के ख़िलाफ़ फाइनल में भी करें तो चेन्नई की बल्ले-बल्ले हो जाएगी.

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दूसरे क्वालिफ़ायर में दोनों के बल्लों से 50-50 रन निकले. लेकिन शेन वॉटसन का बल्ला इस बार उतना नहीं चला जितनी उम्मीद थी.
16 मैचों में दो अर्धशतक की मदद से उन्होंने 318 रन बनाए हैं. लेकिन पिछली बार तो शेन वॉटसन ने सनराइज़र्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ फाइनल में शतक जमाकर अकेले दम पर ही चेन्नई को चैंपियन बना दिया था.
फॉफ डू प्लेसी ने भी 11 मैच में 370 रन बनाए हैं.
अब बचे सुरेश रैना, अंबाती रायडू और महेंद्र सिंह धोनी.

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सुरेश रैना ने 16 मैचों में तीन अर्धशतक की मदद से 375, अंबाती रायडू ने 16 मैच में 281 और धोनी ने 14 मैच में 414 रन बनाए हैं.
लेकिन जो भी हो धोनी अभी भी धोनी ही हैं. उनमें अकेले मैच जीताने की क्षमता है, उनकी कप्तानी का लोहा सभी मानते हैं.
वहीं मुंबई बड़े मैच की बड़ी टीम है. देखना है रविवार को किसे आईपीएल में ख़िताबी जीत मिलती है और कौन सुपर संडे मनाता है.
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