कश्मीर की जासिया अख़्तर ने रचा इतिहास, महिला आईपीएल में चुनी गईं

    • Author, ताहिर हुसैन सोफी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

क्रिकेट के लिए कश्मीर की जासिया अख़्तर का जूनून देखते ही बनता है. उनका ये जूनून ही है जो उन्हें 2019 में शोहरत की बुलंदियों तक ले कर गया.

अपने जीवन के इस मुक़ाम तक पहुंचने की इस लड़ाई में दक्षिण कश्मीर की इस युवा ने रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ा है और अपनी मुश्किलों पर भी जीत पाई है.

28 साल की जासिया क्रिकेट के लिजेंड कहे जाने वाले सचिन तेंड़ुलकर की फैन हैं.

फ़िलहाल चल रहे महिला 20-20 चैलेंज में वो भारत की टीम का हिस्सा बनने वाली हैं. कश्मीर से महिला क्रिकेट टीम में शामिल होने वाली वो पहली महिला हैं.

23 साल की जासिया 2013 में तब सबकी निगाहों में आई थीं जब उन्होंने बरारीपुरा में लगातार दो शतक लगाए थे. अपने घर से 460 किलोमीटर दूर शोपियां ज़िले की ये जगह दक्षिणी जम्मू कशमीर में है.

इसके बाद जम्मू-कश्मर क्रिकेट एसोसिएशन के नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेने के बाद वो पंजाब क्रिकेट टीम का हिस्सा बन गईं.

लेकिन उनके लिए अपनी ज़िंदगी का ये सफ़र आसान नहीं रहा.

जासिया ने बीबीसी हिंदी को बताया, "सबसे पहले तो वो एक बात जिस कारण मैं पंजाब टीम का हिस्सा बनी, वो ये थी कि राज्य में हमारे लिए सुविधाओं की कमी थी. दूसरा मुझे शोपियां और श्रीनगर के बीच हमेशा आना-जाना पड़ता था. साथ ही मैंने ये भी सुना था कि पंजाब राज्य में खिलाड़ियों के लिए एक सीज़न में चार कैंप आयोजित किए जाते हैं, तो मैं उसमें भी आना चाहती थी. "

साल 2010 का वक़्त था और जम्मू-कश्मीर में पतझड़ का मौसम था जब वादी में हिंसा भी बढ़ने लगी थी.

जासिया को इस बात का कोई इल्म नहीं था कि कुछ सालों बाद ज़िंदगी उन्हें किस रास्ते ले कर जाएगी. लेकिन वो रोज़ाना अपनी प्रैक्टिस करती रहीं. यूट्यूब से देख-देख कर वो खेल के नए पैंतरे भी सीखती रहीं. इसके बाद एक दिन अपना राज्य छोड़कर वो पंजाब की तरफ़ बढ़ गईं.

पुरुषों के खेल में बनाई अपनी जगह

निम्न मध्य वर्ग के ताल्लुक़ रखने वाली जासिया के सामने आर्थिक चुनौतियां भी कम नहीं थीं. शुरुआत में जासिया को भी कोई राह मिलती नज़र नहीं आई लेकिन उनकी कड़ी मेहतन के कारण आख़िर उनके भाग्य ने भी उनका साथ दिया.

एक तरफ़ जहां वो खेल की प्रैक्टिस करती हैं, दूसरी तरफ़ वो घर के कामों में अपने परिवार की मदद भी करती हैं.

उनके घर की दीवारों से सटी अलमारियों में रखी कई ट्रॉफि़यां उनकी कामायाबी और खेल के प्रति उनके प्रेम की कहानियां कहती हैं.

पुरुष प्रधान माने जाने वाले इस खेल में अपनी अलग जगह बनाने के लिए जासिया को लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ी लेकिन वक़्त के साथ उन्होंने अपने लिए जगह बना ही ली.

आज वो जम्मू-कश्मीर की पहली महिला क्रिकेट खिलाड़ी बन गई हैं जो जयपुर में होने वाले महिला 20-20 में खेलने वाली हैं. उनके लिए महिला 20-20 में खेलना एक बहुत बड़ी कामयाबी है.

मई छह से लेकर 11 तारीख़ तक होने वाले इस लीग में भारतीय क्रिकेटर मिताली राज और हरमनप्रीत कौर समेत दुनिया भर की नामी महिला क्रिकेटर हिस्सा ले रही हैं.

जासिया कहती हैं, "मैं जानती हूं कि महिला 20-20 में खेलने वाली मैं जम्मू-कश्मीर से पहली लड़की हूं. लेकिन घाटी में कई बेहतरीन खिलाड़ी हैं जिन्हें अच्छे मौक़े मिलें तो वो भी अपना कमाल दिखा सकते हैं."

सीधे हाथ से खेलने वाली जासिया अख़्तर को महिला 20-20 चैलेंज में ट्रेलब्रेज़र्स टीम में जगह मिली है. इस टीम का नेतृत्व स्मृति मंधाना कर रही हैं.

वहीं वेलोसिटी टीम का नेतृत्व मिताली राज और सुपरनोवा का नेतृतिव हरमनप्रीत कौर कर रही हैं.

जासिया कहती हैं, "मैं ये सीखने के लिए पूरी तरह तैयार हूं कि मुझमें क्या कमी है. वेस्ट इंडीज़ की स्टार खिलाड़ी स्टेफ़नी टेलर जैसी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ खेलने का ये मेरा सुनहरा मौक़ा है."

जासिया हरमनप्रीत कौर को अपनी प्रेरणा मानती हैं, जिनके साथ वो पंजाब टीम में खेल चुकी हैं.

24 अप्रैल का वो दिन

महिला आईपीएल में खेलने के संबंध में जासिया के पास अप्रैल 24 को बीसीसीआई के अधिकारियों का फ़ोन आया था. उस वक़्त उन्हें अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ.

उन्होंने अपने पिता ग़ुलाम मोहम्मद वानी को इसकी जानकारी दी. जासिया कहती हैं, "सच कहूं तो मुझे लगा कि किसी ने मेरे साथ मज़ाक़ किया है. लेकिन भाग्य की बात है कि उस दिन मेरा इंटरनेट काम कर रहा था तो मैंने सबसे पहले लिस्ट में अपना नाम खोजा."

पेशे से किसान जासिया के पिता ग़ुलाम मोहम्मद वानी कहते हैं, "मुझे अपनी बेटी पर गर्व है और हमारे पूरे गांव को उस पर नाज़ है. उसने जिस तरह खेल के प्रति अपना समर्पण दिखाया है, उससे उसके दूसरे भाई-बहनों में भी आत्मविश्वास बढ़ा है."

पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी जसिया अख़्तर कहती हैं कि वो अपने जीवन में एक मूलमंत्र को मानती हैं, "विपरीत परिस्थितियों में भी क़त्तई नहीं झुकना है."

शायद यही मूलमंत्र है कि दक्षिण कश्मीर की ये लड़की क्रिकेट में घाटी की महिलाओं के लिए पोस्टर गर्ल बनकर उभरी हैं.

(वरिष्ठ पत्रकारताहिर हुसैन सोफी कश्मीर में रहते हैं.)

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