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क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019: ऋषभ पंत बाहर, विजय शंकर अंदर क्यों
- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
मई के आख़िर में इंग्लैंड में शुरू होने जा रहे क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 के लिए टीम इंडिया का ऐलान हो गया है.
टूर्नामेंट के लिए चुनी गई 15 सदस्यों की टीम की घोषणा होते ही जिन खिलाड़ियों के बारे में सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है, वे हैं ऋषभ पंत और विजय शंकर.
कुछ भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को इस बात पर हैरानी हुई कि बल्ले से लगातार शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद विकेटकीपर बल्लेबाज़ ऋषभ पंत को वर्ल्ड कप स्कवायड में जगह नहीं मिली.
टीम में दूसरे विकेटकीपर के तौर पर अनुभवी दिनेश कार्तिक को शामिल किया गया है.
कुछ लोग बल्लेबाज़ी क्रम में चौथे नंबर के लिए ऑलराउंडर विजय शंकर को टीम में शामिल किए जाने को लेकर भी हैरानी जता रहे हैं.
क्यों मौक़ा नहीं मिला ऋषभ को
21 साल के ऋषभ पंत के पास दिनेश कार्तिक की तरह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अधिक अनुभव नहीं है. मगर पिछले कुछ समय से उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन से क्रिकेट प्रशंसकों और विश्लेषकों को हैरान किया है.
उत्तराखंड से संबंध रखने वाले 21 साल के इस युवा क्रिकेटर ने अंडर 19 क्रिकेट से ही अपनी छाप छोड़ना शुरू कर दिया था. घरेलू क्रिकेट में भी उनका अब तक का रिकॉर्ड शानदार है. रणजी के डेब्यू सीज़न में उन्होंने ट्रिपल सेंचुरी बनाकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था.
दिल्ली डेयरडेविल्स ने उन्हें आईपीएल-2016 के लिए पंत को 1.9 करोड़ रुपये में खरीदा था जबकि उनका बेस प्राइस 10 लाख ही था. उसके बाद से लगातार आईपीएल के हर सीज़न में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है.
अंतरराष्ट्रीय करियर की बात करें तो वह नौ टेस्ट मैच, पांच वनडे और 15 टी-20 खेल चुके हैं. वनडे में भले ही वह बल्ले से कुछ ख़ास नहीं कर पाए मगर टेस्ट में उन्होंने दो शतक लगाए हैं- एक इंग्लैंड में, दूसरा ऑस्ट्रेलिया में.
वरिष्ठ खेल पत्रकार विजय लोकपल्ली कहते हैं कि बहुत से लोगों को ऋषभ के न चुने जाने से हैरानी बेशक हो रही होगी मगर चयनकर्ताओं ने अनुभव को देखते हुए उनकी जगह दिनेश कार्तिक का चयन किया.
वह कहते हैं, "लोगों को हैरानी इसलिए होगी कि ऋषभ ने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में शतक जमाया था जबकि दिनेश कार्तिक वनडे स्कवायड में भी नहीं थे. मगर मेरा मानना है कि जो अनुभव दिनेश कार्तिक के पास है, वो पंत के पास नहीं है. हालांकि इसमें पंत की ग़लती नहीं है क्योंकि उन्होंने अभी खेलना शुरू किया है."
दिनेश कार्तिक के पास 91 वनडे मैचों का अनुभव है जिसमें उन्होंने 31 की औसत से 1738 रन बनाए हैं. वह 26 टेस्ट और 32 इंटनेशनल टी-20 मैच भी खेल चुके हैं.
विजय लोकपल्ली का मानना है कि चूंकि इंग्लैंड में गेंद बहुत सीम और स्विंग होता है, विकेट के पीछे कैच बहुत तेज़ और साइड में आते हैं, इसी कारण चयनकर्ताओं को लगा होगा कि ऐसी मुश्किल स्थिति में अच्छा विकेट कीपर होना ज़रूरी है. वह कहते हैं, "यहां दिनेश कार्तिक का पलड़ा भारी था क्योंकि ऋषभ पंत की कीपिंग खराब रही थी. कार्तिक स्पिनर के सामने भी पंत से अच्छी कीपिंग करते हैं."
क्या पंत को ग्रूम करने का मौक़ा गंवाया?
दिनेश कार्तिक ने अच्छे फ़िनिशर के तौर पर भी पहचान बनाई है. मगर वर्ल्ड कप के लिए टीम में शामिल दूसरे विकेटकीपर-बल्लेबाज़ को खेलने का मौक़ा तभी मिलेगा जब महेंद्र सिंह धोनी किसी मैच में खेल नहीं पाएंगे. ऐसा तभी हो सकता है जब वह बीमार या अनफ़िट होने के कारण किसी मैच में न खेल पाएं.
वरिष्ठ खेल पत्रकार जी. राजारमण का मानना है कि उन्हें नहीं लगता कि दूसरे विकेटकीपर को खेलने का मौक़ा मिल पाएगा, ऐसे में बेहतर होता कि ऋषभ पंत को वर्ल्ड कप के हिसाब से ग्रूम करने का मौक़ा दिया जाता.
उन्होंने कहा, "ऋषभ को वर्ल्ड कप टीम में शामिल किए जाने से हैरान तो हूं लेकिन ऐसा क्यों किया, समझ में आता है. शायद चयनकर्ता दिनेश कार्तिक के अनुभव के साथ गए. लेकिन मेरा मानना है कि दिनेश कार्तिक को एक भी मैच खेलने का मौक़ा नहीं मिलेगा. इसलिए एक मौक़ा था ऋषभ पंत को ग्रूम करने का. उन्हें ये समझाने का कि वर्ल्ड कप का माहौल कैसा होता है, वहां कैसी परिस्थितियां होती हैं. अफ़सोस कि चयनकर्ताओं की सोच अलग रही."
जी. राजारमण मानते हैं कि अतिरिक्त विकेटकीपर ले जाने के बजाय ज़रूरत पड़ने पर केएल राहुल से भी विकेटकीपिंग करवाई जा सकती थी, जिस तरह से राहुल द्रविड़ ने 2003 के वर्ल्ड कप में की थी.
विजय शंकर का चयन क्यों
वर्ल्ड कप टीम में नंबर चार पर बल्लेबाज़ी करने वाले खिलाड़ी के लिए अंबाती रायुडू और ऑलराउंडर विजय शंकर के बीच मुक़ाबला था, जिसमें विजयशंकर ने बाज़ी मारी.
28 साल के विजय शंकर मध्यम क्रम के बल्लेबाज़ हैं और दाएं हाथ से मीडियम पेस गेंदबाज़ी करते हैं. उन्होंने तमिलनाडु की ओर से घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना ध्यान खींचा.
उन्होंने इसी साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच में इंटरनेशनल डेब्यू किया था. अब वह नौ वनडे और नौ ही इंटरनैशनल टी-20 मैच खेल चुके हैं.
उनके सामने चौथे नंबर के लिए अंबाती रायुडू को माना जा रहा था जो उनसे कहीं ज़्यादा अनुभव रखते हैं. रायुडू 55 वनडे खेल चुके हैं जिनमें उन्होंने 47.05 की औसत से 1694 रन बनाए हैं.
वरिष्ठ खेल पत्रकार विजय लोकपल्ली का कहना है कि विजय शंकर प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और उपयुक्त चुनाव है. उनका मानना है कि आने वाले समय में विजय शंकर के खेल बारे में बहुत कुछ सुनने को मिलेगा.
उन्होंने कहा, "घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है. उनकी बल्लेबाज़ी तो अच्छी है ही, गेंदबाज़ी भी बेहतरीन करते हैं. वह कमाल के फ़ील्डर भी हैं. वे कहीं पर फ़ील्डिंग कर सकते हैं और किसी भी नंबर पर बल्लेबाज़ी कर सकते हैं. टीम इंडिया की नंबर चार की खोज विजय शंकर पर आकर ख़त्म हुई है. उनके अंदर प्रतिभा है, संयम है और यंग खिलाड़ी हैं. सिलेक्टर्स ने उन्हें नज़दीक से देखा है."
वरिष्ठ पत्रकार जी. राजारमण का भी मानना है कि विजय शंकर के रहने से टीम को फ़ायदा होगा.
वह कहते हैं, "विजय शंकर बहुत ही होनहार खिलाड़ी हैं, उनसे पास लाजवाब प्रतिभा है. शायद आलोचकों ने देखा नहीं होगा कि वह ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में कैसे खेले. जिस तरह से वह बॉल को टाइम करते हैं, गेम को समझते हैं, उससे टीम को फ़ायदा ही होगा. दूसरे वह ऑलराउंडर हैं जिसकी टीम में कमी है. वह ऐसे ऑलराउंडर हैं जो तेज़ गेंदबाज़ी करते हैं. हालांकि वह ज़्यादातर बल्लेबाज़ के रूप में ही खेलेंगे."
इस टीम को अच्छी और संतुलित टीम बताते हुए राजारमण कहते हैं कि ये खिलाड़ी लगन के साथ खेलेंगे तो सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल तक ज़रूरत जाएंगे.
वहीं पंत की जगह कार्तिक या रायुडू की जगह विजय शंकर को टीम में शामिल किए जाने पर उठाए जा रहे सवालों को वरिष्ठ पत्रकार विजय लोकपल्ली बेमतलब मानते हैं.
वह कहते हैं, "सवाल तो यह भी उठा देगा कोई कि केएल राहुल की जगह अंबाती रायुडू को रख लो, मैं चाहूं तो कहूं कि श्रेयस अय्यर को रख लो. कोई कहेगा कि दिनेश कार्तिक की जगह पंत को रख लो तो कोई बोलेगा चौथे सीमर को भी ले जाओ. मगर यह जो टीम बनती है, उपलब्ध खिलाड़ियों में सर्वश्रेष्ठ को चुनकर बनती है. पांच चयनकर्ताओं, कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली ने आपस में तय करके यह टीम तैयार की है. हमें मानना पड़ेगा कि यह बेस्ट पॉसिबल टीम है."
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