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'गोल्डन गर्ल' मनु भाकर ने दो साल पहले तक पिस्टल छुई भी नहीं थी
- Author, वंदना
- पदनाम, टीवी एडिटर, भारतीय भाषाएं
12वीं क्लास में पढ़ने वाली मनु भाकर 12वीं में मेडिकल की तैयारी कर रही हैं, लेकिन इन सबसे अलग वो बढ़िया निशानेबाज़ भी हैं.
ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने ऐसा निशाना साधा कि गोल्ड मेडल उनकी झोली में आ गिरा.
उनका निशाना कितना अचूक है इसका अंदाज़ा इस बात से लगा सकते हैं कि इस साल सीनियर वर्ल्ड कप में एक नहीं दो-दो गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं.
अभी 10 महीने पहले ही मनु ने जूनियर वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया था और 49वे नंबर पर रही थीं. इस साल जब वो सीनियर वर्ल्ड कप में खेलीं तो सीधे स्वर्ण पदक पर निशाना लगाया- 10 मीटर एयर पिस्टल वर्ग में.
2017 की नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में तो मनु ने छप्पर फाड़ के 15 मेडल जीते थे. और ये तब है जब मनु ने शूटिंग सिर्फ़ दो साल पहले शुरू की है.
बॉक्सिंग में भी मेडल
स्कूल में रहते हुए मनु ने बॉक्सिंग, तैराकी कई खेलों में हाथ आज़माया. बॉक्सिंग में तो मनु लगातार मेडल जीता करती थीं. चोट लगने के बाद मनु ने बॉक्सिंग छोड़ी तो उन्हें मणिपुर की मार्शल आर्ट थांग टा का चस्का लग गया और इसके बाद जूडो.
फिर दो साल पहले जब उनके नए स्कूल में मनु के पापा ने छात्रों को शूटिंग करते देखा तो पिता ने बेटी से कहा कि क्यों न इसे भी आज़मा के देख लिया जाए.
बस 10-15 दिन के अंदर ही मनु ने कमाल करना शुरू कर दिया. जल्द ही राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में जीत का सफ़र उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों तक लेकर आया.
इस कामयाबी के पीछे मनु की मेहनत तो है ही, लेकिन उनके माँ-बाप की लगन भी शामिल है.
वैसे तो मनु के पिता रामकिशन भाकर मरीन इंजीनियर हैं, लेकिन अब जब बेटी बड़ी शूटर हो गई है तो मनु को उनके साथ और मार्गदर्शन की ज़रूरत होती है, इसलिए उन्होंने नौकरी ही छोड़ दी.
हर खिलाड़ी के सफ़र की अपनी मुश्किलें होती हैं, मनु को भी झेलनी पड़ी. पिस्टल लेकर जब मनु प्रैक्टिस करने जाती तो उसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में आम पिस्टल लेकर जाने में काफ़ी दिक़्क़त होती, चाहे वो लाइसेंसी पिस्टल ही थी.
नौकरी छोड़ रामकिशन भाकर बेटी की दिक़्क़तों को दूर करने में लग गए. मनु 16 साल की हैं और उनके बालिग होने में दो साल और बचे हैं.
बेटी के लिए विदेशी पिस्टल ख़रीदने के लिए भी पिता को एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाना पड़ा था. इस क्रम में मनु की टीचर माँ सुमेधा ज़िंदगी भी एकदम बदल गई.
इस तरह की दिक़्क़तें और खेल के दौरान के तनाव को दूर रखने के लिए मनु योग और मेडिटेशन करती हैं. मेडिटेशन का सिलसिला शूटिंग कैंप में ही नहीं घर पर भी जारी रहता है.
16 साल की वर्ल्ड चैंपयिन मनु 10 मीटर एयर पिस्टल वर्ग की राष्ट्रीय चैंपियन भी हैं जिसमें उन्होंने पिछले साल चोटी की निशानेबाज़ हिना सिद्धू को हराया था.
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मनु चैंपियन ज़रूर बन गई हैं लेकिन जूनियर टीम के कोच जसपाल राणा की हिदायत सख़्त है कि निशाना भले बड़े - बड़े लक्ष्यों पर हो लेकिन क़दम ज़मीन पर ही रहने चाहिए.
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