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कॉमनवेल्थ गेम्स: डेंटल सर्जन से वर्ल्ड चैंपियन निशानेबाज़ बनीं हिना सिद्धू
- Author, वंदना
- पदनाम, टीवी एडिटर (भारतीय भाषाएं)
'भारतीय शूटर हिना सिद्धू ने नौवीं एशियाई एयरगन शूटिंग चैंपियनशिप से नाम वापस लिया'.
जो लोग निशानेबाज़ी या खेल में ज़्यादा दिलचस्पी नहीं भी लेते, वो साल 2016 में हिना के इस फ़ैसले के बाद हिना के नाम से वाकिफ़ हो गए थे.
ईरान में चैंपियनशिप में हिजाब पहनना ज़रूरी था और इसके चलते हिना ने ये क़दम उठाया था.
1989 में लुधियाना में पैदा हुई हिना सिद्धू के पास यूँ तो डेंटल सर्जरी की डिग्री है पर घर पर राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज़ पिता के होते हुए शूटिंग का शौक स्वाभाविक था.
लेकिन हिना का मन न्यूरोलॉजिस्ट बनने का था.
साल 2006 में हिना मेडिकल में दाखिले के लिए जी तोड़ तैयारी कर रही थीं. घर में चाचा का बंदूकों की मरम्मत का बिज़नेस था तो शौक-शौक में पिस्टल चलाना सीखा.
पढ़ाई से भी थोड़ा ब्रेक मिल जाता था. लेकिन निशानेबाज़ी का शौक जल्द ही फ़ुल टाइम मिशन में बदल गया.
कॉलेज के दिनों से ही मेडल जीतने का सिलसिला शुरू हो गया था, जब 19 साल की उम्र में उन्होंने हंगेरियन ओपन जीता और 2009 में बीजिंग में हुए वर्ल्ड कप में रजत पदक.
निशानेबाज़ रौनक पंडित बाद में उनके कोच बने और पति भी.
साल 2013 की विश्व शूटिंग प्रतियोगिता में 10 मीटर एयर पिस्टल टूर्नामेंट में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीतने वाली हिना पहली भारतीय महिला बनीं.
निशानेबाज़ी एक तरह से सोलो या एकांत वाला खेल है.
ट्रिगर की अहमियत
बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि शूटिंग में स्थिरता, टाइमिंग और रिदम और ट्रिगर का बहुत महत्व है. इसके लिए वो अलग-अलग तरह की एक्सरसाइज़ करती हैं.
और मैच से पहले कार्बोहाइडेट्स, प्रोटीन ज्यादा तो कॉफ़ी, चाय और चीनी कम कर देती हैं.
कई खिला़ड़ियों की तरह हिना को भी उस दौर से गुज़रना पड़ा जब घायल थी और खेल नहीं पा रही थीं.
साल 2017 में उनकी उंगली में लगी चोट के कारण शूटिंग के दौरान उनकी उंगली कांपती थी. इलाज, फ़िज़ियोथेरेपी और हिम्मत की बदौलत हिना ने कमबैक किया.
हिना की उपलब्धियाँ ठीक से जानने के लिए जब आप उनकी वेबसाइट पर जाते हैं तो पहले पहल आपको सब ब्लैंक मिलेगा.
एक अच्छे निशानेबाज़ की तरह आपको ये समझना पड़ता है कि कीबोर्ड से सही निशाना लगाने से ही आपको उनके रिकॉर्ड दिखेंगे.
और ये रिकॉर्ड दिखाते हैं कि साल 2017 में उन्होंने कॉमनवेल्थ शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता.
साथ ही जीतू राय के साथ वर्ल्ड कप में मिलकर मिक्सड 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में हिना ने गोल्ड मेडल जीता.
विश्व रैंकिंग में नंबर वन रह चुकीं हिना को इस साल फ़ोर्ब्स ने 'अंडर-30 यंग अचीवर्स' की सूचि में शामिल किया है.
शूटिंग से परे हिना को किताबें पढ़ना और नई जगहों पर घूमना पसंद है.
अपनी वेबसाइट पर हिना ने लिखा है उन्हें खेल, एनॉटमी, मनोविज्ञान और इंटीरियर डिज़ाइनिंग से जुड़ी किताबें पढ़ना पसंद हैं.
निशाना साधने वाले ये हाथ पेंटिंग और स्केंचिंग भी कर लेते हैं.
राष्ट्रमंडल खेलों में महिला निशानेबाज़ी मुक़ाबले
- 10 मीटर एयर पिस्टल- हिना सिद्धू, मनु भाखड़, 8 अप्रैल
- स्कीट- सानिया शेख, महेश्वरी चैहान, 8 अप्रैल
- 10 मीटर एयर राइफ़ल- अपूर्वी चंदेला, मेहुली घोष, 9 अप्रैल
- 25 मीटर- हिना सिद्धू, अनुराज सिंह, 10 अप्रैल
- डबल ट्रैप- श्रेयसी सिंह, वर्षा वरमन, 11 अप्रैल
- 50 मीटर राइफ़ल प्रोन-अंजुम मोदगिल, तेजस्विनी सावंत, 12 अप्रैल
- 50 मीटर राइफ़ल थ्री पोज़िशन- अंजुम मोदगिल, तेजस्विनी सावंत, 13 अप्रैल
- ट्रैप- श्रेयसी सिंह, सीमा तोमर, 13 अप्रैल