कॉमनवेल्थ गेम्सः क्या सोना जीतने की चाह पूरी होगी हॉकी में?

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
साल 2010 में दिल्ली का नेशनल स्टेडियम दूधिया रोशनी में नहाया हुआ था. इस स्टेडियम को दादा ध्यानचंद स्टेडियम के नाम से भी जाना जाता है. स्टेडियम में 'चक दे इंडिया' से लेकर और दूसरी फ़िल्मों के गाने गूंज रहे थे.
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में हॉकी का फ़ाइनल मुक़ाबला खेलने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीम ने मैदान में प्रवेश किया.
दोनों टीमों के राष्ट्रीय गान के बाद तालियों की ज़ोरदार आवाज़ के बीच खेल शुरू हुआ.

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जब भारतीय टीम पहली बार फाइनल में पहुंची
राजपाल सिंह की कप्तानी में भारतीय पुरुष हॉकी टीम किसी भी राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार किसी पदक के लिए खेल रही थी, वह भी फाइनल. लेकिन खेल शुरू होने के दस मिनट बाद ही मैच के परिणाम का अंदाज़ लगने लगा था.
जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता जा रहा था, भारत के समर्थकों की आवाज़ धीमी पड़ती जा रही थी.
उस टीम में कप्तान राजपाल सिंह के अवाला शिवेन्द्र सिंह, दानिश मुज्तबा, संदीप सिंह, अर्जुन हलप्पा, तुषार खांडेकर और प्रभजोत सिंह जैसे जाने-पहचाने चेहरे शामिल थे.

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34वें मिनट तक ही ऑस्ट्रेलिया ने 4-0 की बढ़त लेकर मैच को जैसे समाप्त ही कर दिया था.
आख़िरकार ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 8-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता.
भारत ने रजत पदक के रूप में पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में अपना पहला पदक जीता.

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1998 में शामिल हुई हॉकी
वैसे हॉकी को पहली बार 1998 के कुआलालम्पुर राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल किया गया था. तब भारत चौथे पायदान पर रहा.
साल 2002 में इंग्लैंड के मैनचेस्टर शहर में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय हॉकी टीम में हिस्सा नहीं लिया.
साल 2006 में मेलबर्न में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय हॉकी टीम पांचवें नंबर पर रही.
पिछली बार 2014 ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय पुरुष टीम ने एक बार फिर रजत पदक जीता. फाइनल में वह 4-0 से एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया से ही हारी.
इस बार भी भारत के स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा मेज़बान ऑस्ट्रेलिया ही है.
इस बार भारत 10 टीमों के बीच पूल बी में इंग्लैंड, मलेशिया, पाकिस्तान और वेल्स के साथ शामिल है.

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पाकिस्तान से पहला मुक़ाबला
भारत का पहला ही मैच चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से है.
लेकिन अब भारत पाकिस्तान को पिछले कई मुक़ाबलों में बेहद आसानी से हरा चुका है.
भारत ने वर्ल्ड हॉकी लीग में कांस्य पदक भी जीता है लेकिन वहां टीम लीग मैच में कनाडा और मलेशिया से हारी थी.
इस तरह की हार भारत की ताक़त पर सवाल खड़े करती है.

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अनुभवी सरदार सिंह टीम से बाहर
टीम में सबसे अनुभवी पूर्व कप्तान सरदार सिंह को पिछले दिनों सुल्तान अज़लान शाह कप के बाद टीम में जगह नहीं मिली है.
अब टीम की कमान मनप्रीत सिंह के हाथों में है जबकि गोलकीपर के रूप में पी. श्रीजेश और सूरज करकेरा शामिल हैं.
डिफेंडर के रूप में रूपिंदर पाल सिंह, हरमनप्रीत सिंह, वरुण कुमार, कोथाजित सिंह, गुरिंदर सिंह और अमित रोहिदास हैं.
मिडफील्डर का दायित्व कप्तान मनप्रीत सिंह, चिंग्लेनसाना सिंह, सुमित और विवेक सागर प्रसाद के कंधों पर रहेगा.
फॉरवर्ड लाइन में आकाशदीप सिंह, एसवी सुनील, गुरजंत सिंह, मनदीप सिंह, ललित उपाध्याय और दिलप्रीत सिंह शामिल हैं.
जहां तक भारतीय महिला हॉकी की बात है तो उसका रिकार्ड पुरुष टीम से बेहतर है.

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महिलाएं जीत चुकी हैं स्वर्ण पदक
भारतीय महिला टीम साल 1998 में हुए पहले राष्ट्रमंडल खेलों में चौथे स्थान पर रहीं.
लेकिन उसने साल 2002 में इंग्लैंड के मैनचेस्टर शहर में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता. फाइनल में भारतीय महिला टीम ने मेज़बान इंग्लैंड को अतिरिक्त समय में 3-2 से हराया.

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इसके बाद साल 2006 में भारतीय महिला टीम ने रजत पदक जीता जबकि स्वर्ण मेज़बान ऑस्ट्रेलियाई टीम ने जीता.
2010 में भारतीय महिला टीम पांचवें और 2014 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भी वह इसी पायदान पर रही.
इस बार भारतीय महिला टीम पूल बी में इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया और वेल्स के साथ शामिल हैं.
महिला टीम है मज़बूत
टीम की कमान रानी रामपाल के हाथों में है. उनके अलावा फॉरवर्ड लाइन में वंदना कटारिया, लालरेमसियामी, नवजोत कौर, नवनीत कौर और पूनम रानी शामिल हैं.
टीम की गोलकीपर सविता और रजनी हैं. जबकि मध्य पंक्ति में मोनिका, नमिता टोपो, निक्की प्रधान, नेहा गोयल और लिलिमा मिंज़ शामिल हैं.
डिफेंस में दीपिका, सुनीता लाकड़ा, दीप ग्रेस एक्का, गुरजीत कौर, और सुशीला चानु शामिल हैं.
देखना है कि क्या इस बार भारतीय पुरुष टीम के पहली बार स्वर्ण और भारतीय महिला टीम की एक बार फिर पदक जीतने की आस पूरी होगी या नहीं.















