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तो राज्यसभा में ये बोलना चाहते थे सांसद सचिन तेंदुलकर?
पूर्व क्रिकेटर और सांसद सचिन तेंदुलकर राज्यसभा में गुरुवार को विपक्ष के हंगामे के चलते अपना पहला भाषण नहीं दे पाए.
सचिन तेंदुलकर को राइट टू प्ले यानी खेलने के अधिकार पर बोलना था. भाषण देने का जो मौका संसद में नहीं मिल पाया था, सचिन तेंदुलकर ने इसका तोड़ फ़ेसुबक के ज़रिए निकाल लिया है.
सचिन तेंदुलकर ने शुक्रवार को फ़ेसबुक पर वीडियो मैसेज पोस्ट किया.
सचिन इस वीडियो में कहते हैं, ''गुरुवार को कुछ ऐसी बातें थीं, जो मैं आप तक पहुंचाना चाहता था. यहां भी वही कोशिश करूंगा. मुझे कई बार हैरानी होती है कि मैं यहां तक कैसे पहुंचा. फिर मुझे एहसास होता है कि क्रिकेट में उठाई छोटे कदमों ने मुझे कभी न भूलने वाली यादें दी.
- मैं खेल बहुत पसंद करता हूं. क्रिकेट मेरी ज़िंदगी है. मेरे पिता रमेश तेंदुलकर कवि और लेखक थे. मैं ज़िंदगी में जो करना चाहता था, उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया. उनकी ओर से मुझे सबसे खास तोहफ़ा था- खेलने की आज़ादी और खेलने का अधिकार. मैं इस बात के लिए हमेशा उनका शुक्रगुज़ार रहूंगा.
- गरीबी, आर्थिक वृद्धि, फूड सिक्योरिटी समेत देश में कई अहम मुद्दे हैं, जिनपर ध्यान देने की ज़रूरत है. एक स्पोर्ट्समैन होने के नाते मैं खेल, इंडिया की फिटनेस और लोगों की सेहत पर बात करना चाहता हूं.
- मेरा विजन हेल्दी और फिट इंडिया है. जब स्वस्थ युवा हुआ, तब देश में कुछ हुआ.
- साल 2020 में भारत दुनिया के सबसे जवान देशों में से एक होगा. ऐसे मे धारणा ये है कि अगर युवा हैं तो फिट हैं. लेकिन ये गलत है.
- सिर्फ डायबिटीज़ की बात की जाए तो भारत को इस बीमारी की राजधानी मान सकते हैं. भारत में 75 मिलियन लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं.
- अगर मोटापे से होने वाली बीमारियों की बात करें तो हम दुनिया में तीसरे नंबर पर हैं. इन बीमारियों का आर्थिक बोझ भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. ऐसे में देश का आगे बढ़ना संभव ही नहीं है.
- संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, इन बीमारियों की वजह भारतीय अर्थव्यवस्था पर 2012 से 2030 के बीच चार करोड़ करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा.
- लेकिन हम इन नंबरों को नीचे ला सकते हैं. अगर हम सब ये कोशिश करें कि हमारी सेहत ठीक रहे, सही तरह से एक्सरसाइज़ करें और कोई खेल खेलें तब बहुत कुछ बदल सकता है.
- मुझे लगता है कि स्पोर्टिंग देश बनने के लिए हमें एक प्लान की ज़रूरत है. ताकि हमारे जीने का तरीका और खराब सेहत का रवैया बदला सके.
- हमारे फिटनेस के सेशन कम और खाने के सेशन थोड़े बोझिल होते जा रहे हैं. हमें ये आदत बदलनी चाहिए. मुझे लगता कि इस मोबाइल के ज़माने में हम इन मोबाइल होते जा रहे हैं. हममें से ज़्यादातर लोग सिर्फ बात करते हैं लेकिन हम खेलते नहीं हैं.
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