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महेंद्र सिंह धोनी क्यों हैं नंबर 4 पर सबसे फिट? ये हैं वजह
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रविवार को पांच वनडे इंटरनेशनल मैचों की सिरीज़ का अंतिम मैच खेला जाएगा. भारत पहले ही सिरीज अपने नाम कर चुका है.
लेकिन पिछले दो मैचों में भारतीय टीम के बल्लेबाजी क्रम में किए गए परिवर्तनों ने कुछ सवाल पैदा कर दिए हैं.
दरअसल पिछले दो मैचों में भारतीय टीम ने ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या को चौथे नंबर पर बल्लेबाज़ी के लिए उतारा.
पंड्या ने इस क्रम पर उतरकर बल्लेबाज़ी तो अच्छी की लेकिन एक मैच में जहां भारत को जीत मिली, वहीं दूसरे में उसे हार का सामना करना पड़ा.
पंड्या को लेकर भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा कि वे उन्हें नियमित रूप से चौथे नंबर का बल्लेबाज बनते देखना चाहते हैं.
अब सवाल यह उठने लगा है कि टीम में मौजूद सबसे अनुभवी बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी की जगह पंड्या को इस जगह पर क्यों अजमाया जा रहा है.
जानिए, वो 5 वजहेंजो धोनी को चौथे नंबर पर सबसे फिट बल्लेबाज़ बनाती हैं.
1. दस हज़ार के करीब धोनी
महेंद्र सिंह धोनी वनडे क्रिकेट में दस हजार रन पूरे करने के बेहद करीब हैं. उन्होंने 305 मैचों में 9758 रन बना लिए हैं.
उनका औसत 51.90 का है, जिसमें 10 शतक और 66 अर्धशतक शामिल हैं. वो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतकों का शतक लगा चुके हैं.
कई मौकों पर धोनी चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भी उतरे हैं. धोनी ने कुल 26 पारियों में चौथे नंबर पर बल्लेबाजी की, जिसमें उन्होंने 1223 रन बनाए हैं.
इस दौरान उनका औसत 58.23 का रहा. यह उनके कुल करियर औसत से ज्यादा है.
इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट भी 88.57 (करियर स्ट्राइक रेट) से बढ़कर 94.80 हो जाता है. चौथे नंबर पर खेलते हुए धोनी ने 1 शतक और 11 अर्धशतक जमाए हैं.
वहीं तीसरे नंबर पर खेलते हुए धोनी का औसत बढ़कर 82.75 हो जाता है.
उन्होंने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी (183 नाबाद) भी इसी क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए खेली थी.
2. मैच फिनिशर का रोल छूटा
धोनी को शुरुआत से ही मैच फिनिशर के रूप में देखा गया है. उन्होंने कई बार मुश्किल परिस्थितियों से मैच निकालकर भारत को जीत दिलाई है.
धोनी के खेले गए कुल 305 मैचों में से 172 मैचों में भारत को जीत मिली है. इसमें धोनी ने 7 शतक लगाए हैं.
जीत के इन आंकड़ों में फिनिशर के रूप में धोनी 6वें और 7वें नंबर पर कुल 76 बार उतरे हैं.
इस दौरान धोनी ने 65.37 के औसत से 2419 रन बनाए, जिसमें एक शतक भी शामिल है. लेकिन ये बात अब पुरानी हो चली है और क्रिकेट जानकारों के मुताबिक धोनी फिनिशर की भूमिका को पीछे छोड़ खुद को मध्यक्रम के मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की कोशिशों में जुटे हैं.
हाल में वेस्टइंडीज़ दौरे में खेले गए एक वनडे मैच में धोनी की उनके अंदाज़ के उलट खेली गई बेहद धीमी पारी की खासी आलोचना हुई थी.
उस मैच में धोनी ने 114 गेंदों में 54 रन बनाए थे. भारत वह मैच 11 रनों से हार गया था.
3. चौके-छक्के नहीं, विकेट पर टिकना
विश्वकप 2011 के फाइनल में धोनी के उस गगनचुंबी छक्के को कौन भुला सकता है जिसने भारत को विश्वविजेता बना दिया था.
सुनील गावस्कर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि, अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों में वह धोनी के उसी छक्के को देखना चाहेंगे. धोनी शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाज रहे हैं.
भारत की जीत में उनका स्ट्राइक रेट 97.28 का है. मैच के अंत में छक्का लगाकर जीत दिलाना तो जैसे की धोनी की आदत सी थी. लेकिन अब धोनी के बल्ले से वो रंगत ग़ायब सी होती दिख रही है.
लेकिन अनुभव और विकेट पर टिकने की कला बल्लेबाज़ी में ऊपरी क्रम में खेलने का उनका दावा मज़बूत करती है.
4. विकेटों के बीच दौड़
विकेट के बीच दौड़ने में आज भी कोई दूसरा खिलाड़ी धोनी का मुकाबला नहीं कर सकता.
एक रन को दो में बदलना और जहां दो रन दिख रहे हों वहां किस तरह तीन रन भागने हैं, यह धोनी बखूबी जानते हैं. 36 साल की उम्र में भी धोनी काफी फिट हैं.
उनके हमउम्र खिलाड़ी जहां एक तरफ फिटनेट टेस्ट में भी पास नहीं हो पा रहे वहीं धोनी ना सिर्फ विकेटों के बीच तेज़ हैं बल्कि विकेटकीपिंग में भी उतने ही चुस्त-दुरुस्त हैं.
हाल में श्रीलंका में संपन्न हुई वनडे सिरीज में उन्होंने 100 स्टंपिग का रिकॉर्ड अपने नाम किया था.
5. धोनी नहीं तो फिर कौन ?
चौथे नंबर पर अगर धोनी नहीं उतर रहे हैं तो फिर ऐसा कौन सा खिलाड़ी है जो इस नंबर पर कामयाब हो सकता है.
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पिछले दो मैचों में हार्दिक पंड्या ने यह जिम्मेदारी संभाली, लेकिन क्या वे इस स्थान पर खेलने के लिए उपयुक्त हैं.
कई क्रिकेट फैंस यह कयास भी लगा रहे हैं कि पंड्या का हश्र भी इरफान पठान जैसा न हो जाए.
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सिरीज से पहले भारत ने वेस्टइंडीज़ और श्रीलंका का दौरा किया था. हालांकि दोनों ही सिरीज़ में भारत को जीत हासिल हुई, लेकिन चौथे नंबर की गुत्थी यहां भी अनसुलझी ही रही.
वेस्ट इंडीज के ख़िलाफ़ टीम में अनुभवी युवराज सिंह को शामिल किया गया था. वे दो बार चौथे नंबर पर उतरे जिसमें उन्होंने 4 रन और 39 रनों की पारियां खेलीं.
इनके अलावा दिनेश कार्तिक भी इस दौरे में दो बार चौथे नंबर पर उतारे गए जिसमें उन्होंने 2 और 50 रन बनाए.
एक मैच में हार्दिक पंड्या को मैच ख़त्म करने के लिए चौथे नंबर पर भेजा गया.
वहीं, श्रीलंका के ख़िलाफ़ खेली गई सिरीज में केदार जाधव को दो बार और मनीष पांडे को एक बार चौथे नंबर पर आजमाया गया.
ऐसा लगता है कि टीम मैनेजमेंट अभी तक तय नहीं कर पाया है कि चौथे नंबर पर कौन सा खिलाड़ी टिककर बल्लेबाजी कर सकेगा और टीम को जीत तक पहुंचाएगा.
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