'गावस्कर को देख लगा ऐसा ही खेलना है'

वीडियो कैप्शन, पहली महिला क्रिकेटर हैं जिन्हें बीसीसीआई लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देगा

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पहली कप्तान शांता रंगास्वामी को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) सम्मानित करने जा रहा है.

इसका स्वागत करते हुए शांता ने कहा, ''चलो देर से ही सही, मिला तो.. ये सम्मान संपूर्ण महिला क्रिकेट का है. मेरे अकेले का नहीं.''

छह बहनों के परिवार में पैदा हुईं शांता ने बचपन से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था.

अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए शांता ने बताया, ''हम आँगन में क्रिकेट खेलते थे. हमारा काफी बड़ा परिवार था. उसके बाद बैडमिंटन, सॉफ्टबॉल और अन्य खेलों से जुड़ी. लेकिन क्रिकेट के लिए अलग ही प्यार था. फिर क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया, मगर ये नहीं पता था कि इतना आगे निकल जाऊंगी.''

गावस्कर

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भारत में क्रिकेट अंग्रेज़ों के ज़माने से खेला जा रहा है. हालांकि क्रिकेट की पिच पर महिलाओं को उतरने का मौका आज़ादी के कई सालों बाद मिला.

महिला क्रिकेट

साल 1976 में पहली बार भारत की महिला क्रिकेट टीम का चयन हुआ. ये टीम वेस्टइंडीज़ के खिलाफ टेस्ट सिरीज़ के लिए चुनी गई. इस टीम की कमान ऑलराउंडर शांता रंगास्वामी को सौंपी गई.

शांता की आक्रामक बल्लेबाज़ी और तेज़ गेंदबाज़ी ने वेस्टइंडीज़ की मेहमान टीम को 1-0 से शिकस्त दी. इस तरह भारतीय महिला टीम ने देश के लिए पहली टेस्ट सिरीज जीती.

सुनील गावस्कर

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सुनील गावस्कर की फ़ैन शांता रंगास्वामी ने बताया कि कई मौकों पर सुनील गावस्कर महिला क्रिकेट का मैच देखने पहुंचे.

गावस्कर देखने आए मैच

इंग्लैंड दौरे को याद करते हुए शांता ने कहा, ''हमें पुरुष क्रिकेट खिलाड़ियों से भरपूर समर्थन मिला. गावस्कर ने हमारे बारे में कई बार लिखा है, बिशन सिंह बेदी, मोहिंदर अमरनाथ- सबने साथ दिया.''

गावस्कर की तकनीक की तारीफ़ करते हुए शांता ने बताया, '' गावस्कर को देखकर लगा कि ऐसा ही खेलना है. उनको आउट करना बहुत मुश्किल होता था. तेज़ गेंदबाज़ बॉल पर बॉल डालते, लेकिन वे डटे रहते. उनको खेलते देखने के लिए दो आँखें काफी नहीं थीं.''

शांता को वही सूझ-बूझ राहुल द्रविड़ के खेल में भी दिखी. लेकिन ख़ुद के खेल की तुलना वो कपिल देव से करती हैं.

उन्होंने कहा, ''कपिल मेरे बाद क्रिकेट में आए. वो मेरी तरह ही आक्रामक क्रिकेट खेलते थे.''

महिला क्रिकेट का फ्यूचर

70 के दशक में जब शांता की भारतीय टीम एक-एक मैच जीत रही थी, तब उनपर हार का डर हमेशा मंडराता रहा.

शांता रंगास्वामी

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शांता कहती हैं, ''हम जब खेले, जीत के लिए खेले, हारते तो मतलब महिला क्रिकेट का अंत. लेकिन अब वो डर नहीं है बीसीसीआई का साथ पाकर महिला क्रिकेट पहले से ज़्यादा मज़बूत हो गया है. अब पहले से ज़्यादा पैसा मिलता है.''

इस साल जून में महिला विश्व कप इंग्लैंड में खेल जायगा. ख़ास बात ये है कि पुरुषों के क्रिकेट वर्ल्ड कप से पहले से महिलाओ का वर्ल्ड कप खेला जा रहा है. जहाँ पुरुषों का पहला वर्ल्डकप 1975 में खेला गया था, वहीँ महिलाओ का 1973 में.

मौजूदा महिला क्रिकेट टीम से खुश शांता कहती हैं, ''कप्तान मिताली राज की अगुवाई में भारतीय टीम इस विश्वकप में अच्छा परफॉर्म करेगी, उन्होंने कुछ दिन पहले ही क्वॉलीफाई करके ये साबित किया है कि टीम में दम है.''

शांता रंगास्वामी ने 12 टेस्ट मैचों और 16 एकदिवसीय मैचों में भारतीय टीम की कप्तानी की.

इस हरफ़नमौला खिलाड़ी ने 16 टेस्ट मैचों की 26 पारी में 32.60 के औसत से 750 रन बनाए. इसमें एक शतक (108 रन) शामिल है. इसके अलावा उन्होंने छह अर्द्धशतक भी लगाए हैं. टेस्ट मैचों में उन्होंने 21 विकेट लिए.

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