
अफ़ग़ानिस्तान में एक 12 साल के लड़के ने पुलिस के सामने समर्पण किया है.
इस लड़के ने बताया कि तालिबान उसे आत्मघाती बम हमले के मिशन पर भेजने की ज़बरदस्ती कोशिश कर रहे थे.
नियाज़ मोहम्मद अफ़ग़ानिस्तान के हेल्मंद प्रांत में पुलिस के पास पहुँचा.
उसने पुलिस से बताया कि तीन महीने पहले उसके परिवार वाले अमरीकी सेना के नेतृत्त्व वाली नेटो सेनाओं की गोलीबारी में मारे गए थे.
नियाज़ के परिवार वालों के मारे जाने के बाद तालिबान के लड़ाके उसे उठा ले गए.
इसके बाद शुरू हुआ उस 12 साल के बच्चे पर तालिबान का दबाव और धमकियाँ.
बच्चे का कहना है कि तालिबान उसे उठा ले जाने के बाद से ही धमका रहे थे कि अगर वह आत्मघाती हमले के मिशन पर नहीं गया तो वे उसे मार डालेंगे.
नियाज़ के अनुसार अगर वो आत्मघाती हमलावर बनने के लिए राज़ी हो जाता तो तालिबान ने उसे पैसे देने का तो वादा किया ही था ये भी कहा था कि मरने के बाद वह सीधे जन्नत जाएगा.
इस बारे में तालिबान ने कोई टिप्पणी फ़िलहाल नहीं की है.
वैसे इससे पहले तालिबान लगातार इस बात से इनकार करते रहे हैं कि वे बच्चों को हमलावर या लड़ाके बनाने की कोशिश कर रहे हैं.








