मोहम्मद ज़ुबैर की गिरफ़्तारी पर क्या बोले सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता

धार्मिक भावनाओं को आहत करने और नफ़रत फैलाने के आरोप में ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ़्तार किया है.

समाचार एजेंसी 'एएनआई' के अनुसार उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए ओर 295ए के (जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण इरादे से समुदायों के बीच सद्भाव भंग करने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने और विद्वेषपूर्ण इरादे से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने या करने की कोशिश) के तहत गिरफ़्तार किया गया है.

दिल्ली पुलिस ने एक बयान जारी कर कहा है कि ट्विटर हैंडल पर मिली एक शिकायत के बाद मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था.

शिकायत के अनुसार, मोहम्मद ज़ुबैर ने कथित तौर पर जानबूझकर एक धर्म के अपमान के इरादे से तस्वीर पोस्ट की थी. इस तरह के ट्वीट को सोशल मीडिया पर अन्य लोग आगे शेयर करने लगे जिससे सद्भाव बिगड़ने और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका थी.

जुबैर के ख़िलाफ शिकायत 2018 के ट्वीट से संबंधित है, जिसमें उन्होंने एक तस्वीर शेयर की थी. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा का कहना है कि यह एक फ़िल्म की तस्वीर थी. इस तस्वीर में ऐसा था कि होटल के साइनबोर्ड का नाम 'हनीमून होटल' से 'हनुमान होटल' किया गया था.

हनुमान भक्त नाम के एक ट्विटर हैंडल से 19 जून को एक ट्वीट किया गया था. इसमें दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए कहा गया था, "हनीमून के साथ हमारे भगवान हनुमान को जोड़ना सीधे तौर पर हिंदुओं का अपमान है क्योंकि वे ब्रह्मचारी थे. कृपया इस व्यक्ति के ख़िलाफ कार्रवाई करें."

ज़ुबैर की गिरफ़्तारी पर राजनीतिक गलियारे से प्रतिक्रियाएं

ज़ुबैर की गिरफ़्तारी पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लिखा, "हर वो शख़्स जिसने बीजेपी की नफ़रत, उसकी कट्टरता और झूठों का पर्दाफाश किया है, वो उनके लिए एक ख़तरा है. सच की एक आवाज़ को गिरफ़्तार करने से हज़ारों और आवाज़ें सामने आएंगी. सच की अन्याय पर हमेशा जीत होती है."

सपा नेता अखिलेश यादव ने भी ज़ुबैर की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, "अच्छे नहीं लगते हैं उन झूठ के सौदागरों को सच की पड़ताल करने वाले… जिन्होंने अपनी आस्तीन में हैं पाले, नफ़रत का ज़हर उगलने वाले."

पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ राहुल गांधी और अखिलेश यादव की ओर से टिप्पणी पर यूपी बीजेपी अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने तंज़ किया है.

स्वतंत्र देव सिंह ने एक ट्वीट में कहा, "बजरंग बली पर अभद्र टिप्पणी करने वाले व्यक्ति का राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव द्वारा बचाव करना आश्चर्य की बात नहीं है..."

भाजपा के महासचिव सी टी रवि ने जुबैर की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ राहुल गांधी के ट्वीट पर तंज कसते हुए कहा, "वह तब क्यों नहीं बोले जब मराठी अभिनेत्री को एक सामान्य फ़ेसबुक पोस्ट के लिए महाराष्ट्र में गिरफ़्तार कर लिया गया. वह तब भी अपना मुंह बंद किए रहे जब राजस्थान में महिलाओं और बच्चों का दुष्कर्म हुआ. लेकिन वह हिंसा भड़काने वाले जिहादी के लिए आंसू बहा रहे हैं."

मोहम्मद ज़ुबैर की गिरफ़्तारी

भाजपा सचिव वाई सत्य कुमार ने एक ट्वीट में कहा, "ज़ुबैर की गिरफ़्तारी फ़ैक्ट जांच करने की वजह से नहीं हुई है बल्कि फ़िक्शन को फ़ैक्ट बताने और भारत तथा हिंदुओं के ख़िलाफ दुष्प्रचार करने की वजह से हुई है. ख़ैर, ऐसा पहली बार नहीं है जब कांग्रेस और विपक्ष के नेता हिंदुओं से घृणा करनेवाले को बचाने की कोशिश कर रहे हैं."

स्वराज इंडिया के नेता योगेन्द्र यादव ने लिखा, "मोदी के भारत में मोहम्मद ज़ुबैर की गिरफ़्तारी को सच्ची, दृढ़ और साहसी पत्रकारिता के लिए पुलित्ज़र पुरस्कार के रूप में देखा जाना चाहिए. ये बताता है कि पत्रकारिता की अपनी अहम जगह है. ऑल्ट न्यूज़ को मुबारक़बाद."

सीपीआईएम नेता सीताराम येचुरी ने ट्वीट कर कहा, "मोहम्मद ज़ुबैर को तुरंत छोड़ा जाए. मोदी सरकार असुरक्षित है और भ्रामक ख़बरें फैलाने वाली नफ़रत की उनकी मशीन के बारे में सच दिखाने वाले से डर गई."

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी ज़ुबैर की गिरफ़्तारी को सच्चाई पर हमला करार देते हुए तत्काल उन्हें रिहा करने की मांग की.

टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने भी इसे लेकर ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, "साहब लोगों खुश करने के लिए दिल्ली पुलिस झुक गई है. मोहम्मद ज़ुबैर को एक मामले में बिना नोटिस गिरफ़्तारी किया गया है, जबकि एक मामले उन्हें हाई कोर्ट से सुरक्षा मिली हुई है."

नूपुर शर्मा की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "इसी तरह के अपराध के लिए करदाताओं के पैसों पर मिस (फ्रिंज) शर्मा सुरक्षित ज़िंदगी जी रही हैं."

नूपुर शर्मा के बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होने के बाद बीजेपी ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड किया था. खाड़ी देशों को दी अपनी सफाई में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ये टिप्पणी "फ्रिंज एलिम्नेट्स यानी कुछ शरारती तत्वों" की विचारधारा करार दिया था.

मोइत्रा ने दूसरे ट्वीट में यह भी कहा कि ज़ुबैर की गिरफ़्तारी 2018 के एक ट्वीट के लिए हुई, जिसमें उन्होंने ऋषिकेश मुखर्जी की 1983 की फ़िल्म की एक तस्वीर को रिट्वीट किया था.

हेट स्पीच के ख़िलाफ़

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता साकेत गोखले ने ट्वीट किया, "ये हैरान करने वाला है कि दिल्ली पुलिस ने मोहम्मद ज़ुबैर को कथित तौर पर चार साल पहले के एक ट्वीट यानी साल 2018 के एक ट्वीट के लिए गिरफ़्तार किया गया है. बीजेपी को पता होना चाहिए कि ट्वीट सार्वजनिक तौर पर देखे जा सकते हैं."

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस घटना की निंदा की है.

उन्होंने ट्वीट किया, "उन्हें बिना नोटिस के और किसी अनजान एफ़आईआर के बिना पर गिरफ़्तार किया गया है. ये प्रक्रिया की पूरी तरह उल्लंघन है. दिल्ली पुलिस उन लोगों के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कर रही जो मुसलमान विरोधी जनसंहार के स्लोगन देते हैं लेकिन हेट स्पीच के ख़िलाफ़ बोलने वालों और भ्रामक ख़बरों की सच्चाई का पता लगाने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है."

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