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दीपिका पादुकोण हिंदी, नॉर्थ और साउथ की बहस पर क्या बोलीं?
पिछले कई सप्ताह से भारतीय सिनेमा जगत में हिंदी फ़िल्म बनाम साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री, फिल्मों में हिंदी भाषा के इस्तेमाल, पैन इंडिया जैसी शब्दावली हावी है. इस मामले पर उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत के कलाकार उलझते आ रहे हैं.
अब इस मुद्दे पर अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने भी अपनी राय रखी है.
दीपिका ने फ्ऱांस में 'कान फ़िल्म महोत्सव' में शामिल होने से पहले 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' से बातचीत में कहा कि भारतीय सिनेमा बड़े बदलाव से गुजर रहा है और अब इसमें 'क्रॉस कल्चर एक्सेप्टेंस' यानी विभिन्न संस्कृतियों की स्वीकार्यता बढ़ी है.
इस इंटरव्यू में दीपिका अलग-अलग भाषाओं की फ़िल्मों के बीच के फ़ासले के ख़त्म होने की बात कह रही हैं.
दीपिका कान महोत्सव में इस बार जूरी सदस्य के तौर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. वह फ्रांस पहुंच चुकी हैं और जूरी डिनर में शामिल भी हुई हैं.
अभिनेत्री का कहना है कि हिंदी, तमिल, तेलुगू और मलयालम सिनेमा के बीच का फ़र्क अब मिट रहा है.
उन्होंने 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' से बातचीत में कहा, ''मेरा मानना है कि पहले हम अलग-थलग काम करते थे और हिंदी फ़िल्म उद्योग, तेलुगू फ़िल्म उद्योग, तमिल फ़िल्म उद्योग और मलयालम फिल्म उद्योग थे...और अब ये रेलिंग टूट रही है.''
दीपिका का कहना है कि अब 'अलग-अलग संस्कृतियों की स्वीकार्यता' बढ़ी है.
इसी बीच, तमिल, तेलुगू समेत हिंदी फ़िल्मों में काम करनेवाले सिद्धार्थ ने भाषा को लेकर जारी विवाद में द इंडियन एक्सप्रेस को एक इंटरव्यू में कहा, ''अगर कोई पात्र गैर हिंदी बेल्ट से हो तो हमारी एक आदत है कि उसे हम हंसोड़ के रूप में पेश करेंगे.''
पिछले कुछ समय में दक्षिण भारत की फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की है. चाहे वह 'पुष्पा द राइज' हो, 'आरआरआर' हो या फिर 'केजीएफ चैप्टर 2' हो. निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने 'सरकारु वारी पाटा' और 'जयेशभाई जोरदार' की कमाई की तुलना करते हुए ट्वीट किया.
'सरकारु वारी पाटा' में महेश बाबू मुख्य भूमिका में हैं, जो हाल ही में एक बयान से विवाद में आ गए थे.
महेश बाबू ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि उन्हें लगता है कि बॉलीवुड उन्हें 'अफ़ोर्ड' नहीं कर सकता, इसलिये वो वहां जा कर अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहते. उन्हें पैन इंडिया स्टार नहीं बनना है. वो तेलुगू में ही खुश हैं.
हालांकि, बाद में उन्होंने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि उन्हें सिनेमा से प्यार है और वह सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं.
क्या है पूरा विवाद?
महेश बाबू से पहले कन्नड़ स्टार किच्चा सुदीप किच्चा सुदीप और बॉलीवुड स्टार अजय देवगन के बीच हिंदी भाषा को ट्विटर पर काफी बहस हुई और इस मुद्दे पर नेताओं ने भी बयान दिए.
किच्चा सुदीप ने एक निजी चैनल 'कर्नाटक तक' को दिए इंटरव्यू में कहा था, ''हिंदी अब कोई राष्ट्र भाषा नहीं है तो अब राष्ट्र भाषा कौन सी है? पैन इंडिया क्या है. क्योंकि हम साउथ से आते हैं तो हमें पैन इंडिया कह दिया जाता है. हिंदी को पैन इंडिया क्यों नहीं कहा जाता है? ये हमारी तमिल, तेलुगू, मलयालम फ़िल्में डब करते हैं. दक्षिण भारत की फ़िल्में वहाँ अच्छा कर रही हैं.''
इस पर अजय देवगन ने ट्वीट में कहा था ''किच्चा सुदीप मेरे भाई, आपके अनुसार अगर हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा नहीं है तो आप अपनी मातृभाषा की फ़िल्मों को हिंदी में डब करके क्यों रिलीज़ करते हैं? हिंदी हमारी मातृभाषा और राष्ट्र भाषा थी, है और हमेशा रहेगी. जन गण मन.''
इसके बाद भी दोनों ही कलाकारों के बीच ट्विटर पर काफी बहस हुई.
उनसे पहले नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी ने एक इंटरव्यू में कहा था, ''अगर मैं तीन चीज़ें बदल सकता तो मैं सबसे पहले बॉलीवुड का नाम बदलकर हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री रखूंगा. दूसरा- हमारे पास जो स्क्रिप्ट आती है वो रोमन में आती है, उसको याद करना मुश्किल हो जाता है. मैं उसे देवनागरी में मांगता हूँ. तीसरा- आप हिंदी में फ़िल्म बना रहे हो लेकिन सब डायरेक्टर असिस्टेंट इंग्लिश में बात कर रहे हैं.''
अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने भले ही कल्चरल एक्सेप्टेंस की बात की हो लेकिन भाषा, कमाई और पैन इंडिया की बहस अब भी जारी है.
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