पाकिस्तान, इमरान ख़ान का इस्तीफ़ा: अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण की क्यों है चर्चा?

पाकिस्तान में शनिवार आधी रात को इमरान ख़ान ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया. उनके इस्तीफ़े की चर्चा पाकिस्तान समेत भारत में भी हो रही है.

जिस तरह से इमरान ख़ान का इस्तीफ़ा हुआ और देर रात नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई उससे कई लोगों को हैरानी हुई. इस बीच पाकिस्तान में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण को लेकर चर्चा हो रही है.

ये चर्चा अटल बिहारी वाजपेयी के उस भाषण की जो उन्होंने साल 1996 में संसद में दिया था. तब अटल बिहारी वाजपेयी ने विश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के पहले इस्तीफ़ा दे दिया था. तब वो सिर्फ़ 13 दिन प्रधानमंत्री रहे थे.

इस भाषण में अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था, "आप सारा देश चलाना चाहते हैं, बहुत अच्छी बात है. हमारी शुभकामना आपके साथ है. हम अपने देश की सेवा के कार्य में जुटे रहेंगे. हम संख्याबल के सामने सिर झुकाते हैं और आपको विश्वास दिलाते हैं कि जो कार्य हमने अपने हाथ में लिया है वो राष्ट्र उद्देश्य को जब तक पूरा नहीं कर लेंगे, तब तक आराम से नहीं बैठेंगे. अध्यक्ष महोदय, मैं अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति महोदय को सौंपने जा रहा हूं."

पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर चर्चा?

वाजपेयी के उस लंबे भाषण का एक हिस्सा अब सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है.

इसकी वजह ये भी है कि पाकिस्तान में बीते दिनों से सियासी हलचल हो रही हैं और इमरान ख़ान लगातार आख़िरी गेंद तक खेलने की बात कहते नज़र आए थे. वहीं विपक्षी दल इमरान ख़ान पर नियमों के उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहे हैं.

इन सबके बावजूद इमरान ख़ान की सरकार शनिवार की देर रात बच नहीं पाई. सरकार गिरने के कुछ देर बाद ही पाकिस्तान में कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण का एक ख़ास हिस्सा शेयर करने लगे.

पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों को लेकर ट्विटर पर सक्रिय रहने वालीं लाइला इनायत इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखती हैं, "1996 में बहुमत ना होने पर पूर्व पीएम वाजपेयी अपना इस्तीफ़ा देते हुए."

शेहरोज़ कुरैशी कहते हैं, "गरिमा के साथ इस्तीफ़ा. लोकतंत्र इसी का नाम है."

अबरार नाम के शख़्स समेत काफी लोग इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण शेयर करने की कुछ भारतीय तारीफ़ भी कर रहे हैं.

राम प्रसाद लिखते हैं, "मुझे इस बात की खुशी है कि पाकिस्तानी अटल बिहारी वाजपेयी की प्रशंसा कर रहे हैं."

पत्रकार ब्रजेश मिश्र ने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, "लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान कैसे किया जाता है अटल जी की इस स्पीच से सीखना चाहिए. आजकल इमरान ख़ान भारत की दुहाई देते हैं लेकिन लोकतंत्र के प्रति भारतीय समर्पण को नहीं सुनना चाहते. उन्होंने संख्याबल के समक्ष सिर झुकाया और इस्तीफ़ा दे दिया था."

कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला लिखते हैं, "अगर इमरान ख़ान भारत से तुलना करते हैं तो वो ये भी ध्यान रखें कि वाजपेयी ने बहुमत साबित ना होने पर इस्तीफ़ा दे दिया था."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)