#आज_भारत_बंद_है: विपक्ष के नेताओं ने क्या कुछ कहा

कृषि क़ानूनों के विरोध में देश के कई किसान संगठनों ने मंगलवार (8 दिसंबर) को भारत बंद का आह्वान किया. किसान संगठनों के बुलाए गए इस बंद का समर्थन कई विपक्षी पार्टियां भी कर रही हैं.

इनमें कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति, राष्ट्रीय जनता दल, वामपंथी पार्टी, डीएमके, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी मुख्य रूप से शामिल हैं.

इसके अलावा हाल ही में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए से अलग हुई पार्टी, अकाली दल भी इस बंद का समर्थन कर रही है.

वामपंथी पार्टियों में सीपीआई (एम), सीपीआई, सीपीआई (एमएल), रेवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और ऑल इंडिया फ़ॉरवर्ड ब्लॉक ने इस बंद को अपना समर्थन दिया है.

केंद्र में एनडीए का हिस्सा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी इस बंद का समर्थन कर रही है.

ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस भारत बंद का समर्थन तो नहीं कर रही है लेकिन पार्टी किसानों के आंदोलन के साथ खड़ी है. पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा है, "हमारी सरकार बंद का समर्थन नहीं करती है, लेकिन टीएमसी किसानों के आंदोलन का समर्थन करेगी."

राजनीतिक पार्टियों के अलावा इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक), हिंद मज़दूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू), ऑल इंडिया युनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी) और ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी) जैसे कर्मचारी और मज़दूर संगठन भी इस बंद का समर्थन कर रहे हैं.

बैंक यूनियन भी बंद के समर्थन में आगे आए हैं.

ऑल इंडिया बैंक ऑफ़िसर्स कनफ़ेडरेशन (एआईबीओसी), ऑल इंडिया बैंक ऑफ़िसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) और इंडियन नेशनल बैंक ऑफ़िसर्स कांग्रेस (आईएनबीओसी) भी किसान संगठनों के बुलाए 8 दिसंबर के भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं.

किसान संगठनों के साथ भारत बंद के समर्थन में आए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के इस पर बयान भी आ रहे हैं.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है, "मोदी जी, किसानों से चोरी बंद करो! सभी देशवासी जानते हैं कि #आज_भारत_बंद_है. इसका संपूर्ण समर्थन करके हमारे अन्नदाता के संघर्ष को सफल बनाएं."

प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट किया है, "जो किसान अपनी मेहनत से फ़सल उगाकर हमारी थालियों को भरता है, उन किसानों को भाजपा सरकार अपने अरबपति मित्रों की थैली भरने के दबाव में भटका हुआ बोल रही है. ये संघर्ष आपकी थाली भरने वालों और अरबपतियों की थैली भरने वालों के बीच है. आइए, किसानों का साथ दें. #आज_भारत_बंद_है"

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है, "अपनी जमीं की ख़ातिर, हम माटी में जा लिपटेंगे, वो क्या हमसे निपटेंगे!!!"

एनसीपी चीफ़ शरद पवार ने कहा है, "मैंने कहा था कि एपीएमसी में कुछ सुधारों की ज़रूरत है. एपीएमसी एक्ट को सुधारों के साथ जारी रहना चाहिए. इसमें कोई संदेह नहीं है कि मैंने चिट्ठी लिखी है. लेकिन, इनके तीनों क़ानूनों में कहीं भी एपीएमसी का ज़िक्र भी नहीं है. ये केवल ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. इसे अधिक तवज्जो देने की ज़रूरत नहीं है."

उन्होंने कहा, "9 दिसंबर को अलग-अलग पार्टियों के 5-6 लोग एकसाथ बैठकर चर्चा करेंगे और एक सामूहिक रुख़ तय करेंगे. हमने राष्ट्रपति से मिलने के लिए शाम 5 बजे का वक़्त लिया है. हम उनके सामने अपनी सामूहिक राय के साथ जाएंगे."

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र पर अरविंद केजरीवाल को नज़रबंद करने का आरोप लगाया है.

आम आदमी पार्टी ने प्रेस कॉन्फ़्रेस कर कहा है, ''गृह मंत्रालय के आदेश पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हाउस अरेस्ट किया गया है. किसान आंदोलन का समर्थन करने की वजह से भाजपा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को हाउस अरेस्ट किया है. केंद्र का पूरा दबाव था कि किसानों को दिल्ली स्टेडियम में जेल बनाकर क़ैद कर दिया जाए, किसान आंदोलन कुचल दिया जाए. जबसे मुख्यमंत्री ने किसानों का साथ दिया, केंद्र सरकार बौखला गई है. हम किसानों का साथ नहीं छोड़ेंगे, वो हमारे अन्नदाता हैं.''

हालांकि, दिल्ली पुलिस के डीसीपी (नॉर्थ) एंटो अल्फ़ोंस ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हाउस अरेस्ट नहीं किया गया है.

डीसीपी अल्फ़ोंस ने कहा है, "पुलिस की तैनाती सामान्य कारणों से की गई है. आम आदमी पार्टी और अन्य किसी पार्टी के बीच टकराव की स्थिति ना पैदा हो जाये, इसलिए सावधानीपूर्वक पुलिस बल बढ़ाया गया है. मुख्यमंत्री को हाउस अरेस्ट नहीं किया गया."

शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा है, "अगर सरकार का दिल है, चाहे गृह मंत्री हों या प्रधानमंत्री हों, तो उन्हें ख़ुद जाकर किसानों से बात करनी चाहिए."

उन्होंने कहा है कि यह कोई राजनीतिक बंद नहीं है. यह हमारा सेंटीमेंट है. दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान संगठन किसी राजनीतिक पार्टी का झंडा नहीं लिए हैं. यह हमारी ड्यूटी है कि हम किसानों के साथ खड़े हों और उनकी भावनाओं के साथ जुड़ें.

किसानों की आवाज़ न सुनने के लिए मोदी सरकार की आलोचना करते हुए सीपीआई (एम) नेता वृंदा करात ने पूछा है कि मोदी सरकार किनके लिए ये सुधार ला रही है? उन्होंने कहा, "मोदी सरकार को डेमोक्रेसी के डी के बारे में भी जानकारी नहीं है. जब किसान कह रहे हैं कि वे ये सुधार नहीं चाहते हैं तो आख़िर सरकार किनके लिए इन्हें ला रही है?"

दूसरी ओर, सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे भी किसानों के समर्थन में आ गए हैं. विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए अन्ना हज़ारे मंगलवार को एक दिन की भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. एक रिकॉर्डेड मैसेज में उन्होंने विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसानों की तारीफ़ करते हुए कहा है कि पिछले 10 दिनों के दौरान कोई हिंसा नहीं हुई है. उन्होंने कहा है, "मैं देश के लोगों से अपील करता हूं कि दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शन को पूरे देश में फैल जाना चाहिए. सरकार पर दबाव बनाने के लिए ऐसा होना ज़रूरी है और इसके लिए किसानों को सड़कों पर उतरना होगा. लेकिन, किसी को भी हिंसा का सहारा नहीं लेना चाहिए."

बुधवार को किसान नेताओं और सरकार के पैरोंकारों के बीच छठे दौर की मीटिंग होनी है. हालांकि इसी बीच ख़बर यह भी आ रही है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज ही कुछ किसान नेताओं को मुलाक़ात करने के लिए बुलाया है.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अमित शाह के साथ शाम सात बजे उन लोगों की बैठक है.

टिकैत ने कहा कि पहले वह सिंघु बॉर्डर जा रहे हैं और फिर वहां से कुछ किसान नेताओं के साथ अमित शाह से मिलने जाएंगे.

राकेश टिकैत और यूपी के किसान पिछले कुछ दिनों से ग़ाज़ीपुर के पास यूपी-दिल्ली सीमा पर बैठे हुए हैं. उनका कहना है कि वह सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर बैठे पंजाब-हरियाणा के किसानों के समर्थन में हैं.

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