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सेनेटरी पैड की बात कर पीएम मोदी ने कैसा असर डाला
स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल क़िले की प्राचीर से महिलाओं को लेकर भी कई बातें कहीं. इनमें से एक बात की सोशल मीडिया पर महिलाओं के बीच काफ़ी चर्चा हो रही है.
महिलाओं का कहना है कि आज़ादी के 74 साल बाद भी जिस विषय पर बात करने से लोग कतराते हैं, उसपर प्रधानमंत्री का इस तरह बोलना बहुत मायने रखता है.
दरअसल प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सेनेटरी पैड का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, "ग़रीब बहन बेटियों के बेहतर स्वास्थ्य की भी चिंता ये सरकार लगातार कर रही है. हमने जन औषधि केंद्र के अंदर एक रुपए में सेनेटरी पैड पहुंचाने का एक बहुत बड़ा काम किया है. छह हज़ार जन औषधि केंद्रों में पिछले कुछ थोड़े से समय में क़रीब पांच करोड़ से ज़्यादा सेनेटरी पैड हमारी इन ग़रीब महिलाओं तक पहुंच चुके हैं."
एक रुपए के सेनेटरी पैड से आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं को कितना फ़ायदा मिल रहा है, ये तो पड़ताल का विषय है, लेकिन प्रधानमंत्री की इस बात के लिए कई लोग तारीफ़ कर रहे हैं कि उन्होंने इस बात को अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में शामिल किया.
देबादत्ता उपाध्याय नाम की एक ट्वीटर यूज़र ने लिखा, "सेनेटरी नैपकिन - एक टैबू - जिसका ज़िक्र लाल क़िले की प्राचीर से. बस हो गया. दिन बन गया."
पत्रकार भारती जैन ने ट्वीट किया, "प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में सेनेटरी नैपकिन का ज़िक्र किया. ये टैबू के ख़िलाफ़ लड़ाई में मील का पत्थर है."
विजया श्री लिखती हैं, "मैं अगर अपने घर के पुरुषों से अपने लिए एक सेनेटरी पैड का पैक ख़रीद लाने को कहूंगी तो वो नहीं लाएंगे. लेकिन मेरे पीएम इससे एक क़दम आगे गए. उन्होंने सेनेटरी नैपकिन कम क़ीमत पर मुहैया कराने की बात की. इस तरह के आदमी हमें चाहिए."
वहीं ग्रामीण इलाक़ों में महिलाओं के लिए शौचालय की मूल ज़रूरत पर बात करती एक फ़िल्म में काम कर चुके जाने-माने अभिनेता अक्षय कुमार ने भी ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ की.
उन्होंने लिखा, "स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में हमारे प्रधानमंत्री का सेनेटरी पैड पर बात करना सच्ची प्रगति है...मेंस्ट्रुएशन को आम ज़िंदगी का विषय बना दीजिए."
अनु सेहगल नाम की ट्वीटर यूज़र ने कहा, "एक वक़्त था जब घरों में सेनेटरी पैड को लेकर बहुत धीरे बात की जाती थी. आज प्रधानमंत्री ने इस बारे में अपने भाषण में बोला. खुश थी क्योंकि इस टैबू को देश से निकाल दिया गया."
वहीं एनु आनंद ने लिखा कि "जब देश के प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में सेनेटरी पैड और मेंस्ट्रुएशन का खुले आम ज़िक्र किया, मेरे दिल से उनके लिए तारीफ़ निकल रही है और उम्मीद है कि मेंस्ट्रुएशन का ये टैबू भारतीय समाज से धीरे-धीरे निकल जाएगा."
उर्मिला नाम की ट्वीटर यूज़र ने कहा कि "महिलाओं संदेश साफ हैं- पर्सनल हाइजीन और शौचालय आपकी ज़रूरत है, इसमें शर्म नहीं करना!"
लेकिन मयूरी भट्टाचार्य ने मेंस्ट्रुएशन टैबू तोड़ने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ तो की, पर ये भी कहा कि हर साल असम की बाढ़ में फंसी हज़ारों महिलाएं इस ज़रूरत से वंचित होती हैं. मयूरी ने असम के मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा से अपील की कि सेनेटरी पैड को राहत के सामान की लिस्ट में डाला जाए.
अखिल भारतीय व्यापारियों का परिसंघ के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि "महिलाओं को भयावह बीमारियों से बचाने के लिए निचले इलाक़ों और झुग्गी बस्तियों में बहुत कम लागत वाले #sanitarypads के उत्पादन की और इसके प्रभावी वितरण की गंभीर कोशिशों की ज़रूरत है."
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