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कोरोना: 'नेटफ़्लिक्स से सस्ता तो कच्चा तेल है'- सोशल
कोरोना महामारी से जूझ रहा अमरीका अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी पस्त नज़र आ रहा है.
सोमवार को अमरीका के वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई मार्केट में कच्चे तेल के मई के सौदे निगेटिव में पहुँच गए.
यानी जिन लोगों ने कच्चे तेल के मई के वायदा सौदे लिए थे, उनका ख़रीदार नहीं मिल रहा था और हालत ये हो गई थी कि ट्रेडर्स दूसरों को अपनी ये डिलीवरी देने के लिए पैसे तक को तैयार हो गए.
अमरीका के कच्चे तेल के कारोबार के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब वायदा बाज़ार में कच्चा तेल निगेटिव में चला गया.
हालांकि -37.63 डॉलर प्रति बैरल का रिकॉर्ड निचले स्तर तक लुढ़कने के बाद कारोबारी सत्र के दौरान इसमें रिकवरी आई और कुछ ही घंटों के बाद ये 1.45 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा.
दुनियाभर में कोरोना वायरस से 20 लाख से अधिक संक्रमित हैं और मरने वालों की संख्या एक लाख 70 हज़ार का आंकड़ा पार कर गई है.
कोरोना के कारण दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन है यानी यातायात से लेकर उद्योग धंधे बंद है, पेट्रोल-डीज़ल की खपत बहुत कम हो गई है. यही वजह है कि अमरीका में तेल के दाम रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गए हैं.
'तेल पीकर पैसे बचाऊंगा'
इस ख़बर पर सोशल मीडिया में भी खूब चुटकियां ली जा रही हैं और मीम्स शेयर किए जा रहे हैं.
एक यूज़र ने लिखा कि नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन तेल के एक बैरल से महंगा है.
वासिफ़ रियाज़ ने चुटकी ली कि पेप्सी और क्रूड ऑयल एक ही कीमत पर ख़रीद सकते हो.
थोर बेनसन ने लिखा, "मैं तो पैसे बचाने के लिए पानी की जगह तेल पीना शुरू कर रहा हूँ."
एक यूज़र ने लिखा, "तेल मुफ़्त है, लेकिन आप कहीं जा नहीं सकते......"
कच्चे तेल के दामों में गिरावट के बारे में तो बहुत से लोगों ने सुना होगा लेकिन ये पहली बार है कि कीमतें निगेटिव में गई हैं.
लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि इसका मतलब क्या है और सोशल मीडिया पर भी लोग इस बारे में पूछ रहे हैं और मीम्स शेयर कर रहे हैं.
कुछ लोग कह रहे हैं कि इसका मतलब क्या ये है कि 'उनका कच्चा तेल लेने पर वो हमें पैसे भी देंगे?'
नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ अमिताभ कांत ने भी ट्वीट किया, "इतिहास. तेल अब कोक की बोतल से भी सस्ता. कल्पना भी नहीं की थी कि कच्चे तेल में इस कदर गिरावट और कोरोना महामारी मुझे अपने जीवनकाल में देखने को मिलेगी"
कच्चे तेल की कीमत बेशक पहली बार निगेटिव में गई है, लेकिन ये गिरावट मई महीने के लिए है.
दरअसल, मई महीने की डिलीवरी के लिए तेल सौदे का 21 अप्रैल यानी मंगलवार को आख़िरी दिन है, लेकिन तेल की मांग नहीं होने के कारण वायदा सौदों की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली.
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