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सोशलः डिजिटल इंडिया के दौर में मोदी के मोबाइल पर सिग्नल गायब
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षाबलों पर हुए हमले के एक हफ़्ते बाद कांग्रेस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर सरकार से हमले से जुड़े पांच सवाल पूछे.
इसके साथ ही कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता पर भी सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि "पुलवामा हमले के बाद जब पूरा देश शोकाकुल था उस समय देश के प्रधानमंत्री एक प्रचार फ़िल्म के लिए शूट करवा रहे थे."
कांग्रेस ने सवाल पूछा कि इतने बड़े हमले के बाद भी प्रधानमंत्री ने अपने कार्यक्रम को टालने की ज़हमत नहीं उठाई, ना ही उन्होंने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की.
कांग्रेस की तरफ से किए गए इस तीखे हमले के बाद बीजेपी ने भी पलटवार किया.
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर पुलवामा हमले पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी दिन में 18 घंटे काम करते हैं.
शुक्रवार को एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते हुए तीन तस्वीरें ट्वीट की और तंज कसते हुए लिखा 'फोटोशूट सरकार.'
इस ट्वीट के कुछ ही देर बाद बीजेपी के आधिकारि ट्विटर हैंडल से लिखा गया, ''राहुल जी, भारत आपके फ़ेक न्यूज़ से पक चुका है. देश को गुमराह करने के लिए सुबह की तस्वीरों को पोस्ट करना बंद करिए. हो सकता है आपको उस हमले के बारे में पहले से पता हो लेकिन भारत के लोगों को इसकी ख़बर शाम को मिली. अगली बार कोई दूसरा स्टंट करना जिसमें जवानों की शहादत शामिल ना हो.''
हालांकि कांग्रेस भी इस ट्विटर वार में पीछे हटने को तैयार नहीं है. उन्होंने बीजेपी के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा है, ''अच्छी कोशिश रही, लेकिन जो एकमात्र स्टंट हुआ उसे मोदी जी ने फ़ोटोशूट के दौरान किया- जो कि दोपहर 2.30 से 4.30 बजे तक चला (इस वक़्त तक उन्हें हमले के बारे में मालूम था)- और उसके बाद का स्टंट उन्होंने रैली में किया जहां उन्होंने पुलवामा हमले की परवाह तक नहीं की.''
पीएम को देरी से मिली ख़बर- सरकारी सूत्र
इससे पहले एनडीटीवी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी को पुलवामा हमले की जानकारी कुछ देरी से मिली.
एनडीटीवी की ख़बर के अनुसार भाजपा ने इस मामले में प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए कहा है कि "खराब मौसम और फ़ोन का नेटवर्क कमज़ोर होने के कारण प्रधानमंत्री को हमले की सूचना मिलने में 25 मिनट की देर हुई थी."
इसके अलावा इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से जवाब तलब किए जाने की ख़बर भी है.
बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री का बचाव करने की ख़बर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इससे जुड़ी प्रतिक्रियाएं मिलने लगीं.
कई लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को देरी से समाचार मिलने के लिए फ़ोन नेटवर्क के काम ना करने पर कहा कि यह कैसा डिजिटल इंडिया है जहां प्रधानमंत्री के फ़ोन में नेटवर्क नहीं हैं.
पत्रकार अनीता जोशुआ ने ट्वीट किया, "हमसे यह यकीन करने की उम्मीद की जा रही है कि डिजिटल इंडिया के दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार प्रधानमंत्री से संपर्क नहीं कर सके. और जो लोग यहां शूटिंग कर रहे थे, उनमें से किसी के स्मार्टफ़ोन तक भी यह ख़बर नहीं पहुंच पाई.
उमाशंकर सिंह ने लिखा है, "ये बात बहुत गंभीर है. अपने ही देश में पीएम को भीषण आतंकी हमले की जानकारी कई घंटे तक नहीं मिलती है क्योंकि 'मौसम खराब' था! क्या पीएम उसी तरह के स्लो स्पीड वाले 4G का इस्तेमाल करते हैं जो देश की आम जनता करती है?"
'शी वाज़ रीगल' नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा है, "जी हां, उनके मोबाइल पर नेटवर्क नहीं था. और उसी समय कुछ वाइल्डलाइफ़र्स प्रधानमंत्री के दल की तस्वीरें व्हाट्सएप ग्रुप पर डाल रहे थे."
रोफ़ल गांधी नाम के ट्विटर हैंडल से लिखा गया, "हमारे पीएम सर को ख़बर तो मिल गयी थी कि आतंकवादी हमला हुआ है लेकिन उन्हें लगा कि ये ऱोज का वो 2-4 जवान मरने वाला होगा. प्राइम टाइम टाइप चीज नहीं है. इसलिये आराम से वो घडियालों को निहारते रहे और घड़ियाल उनको."
कॉस्तुभ मिश्रा ने लिखा है कि "कांग्रेस सरकार में हमले होने पर इस्तीफे मांगे जाते थे. मोदी सरकार में हमले के बाद वोट मांगे जाते हैं?"
मीडिया में प्रकाशित ख़बरों में बताया गया है कि सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी को जब पुलवामा हमले के बारे में पता चला तो उसके बाद उन्होंने कुछ भी नहीं खाया.
ट्विटर पर लोग इस ख़बर से जोड़कर भी कई तरह के ट्वीट कर रहे हैं.
जॉय दास ने लिखा है, "मोदी ने पुलवामा हमले के बाद कुछ नहीं खाया. इसीलिए सऊदी प्रिंस के साथ उन्होंने इतना बड़ा मुंह खोला है."
अर्थशास्त्री रूपा सुब्रमण्य ने लिखा, "सूत्रों के अनुसार पुलवामा हमले के बाद पीएम ने कुछ नहीं खाया. लेकिन उसके पहले और शाम को और फिर अगले दिन सवेरे उन्होंने खाना खाया. और फिर डिस्कवरी की शूटिंग में व्यस्त रहे. इसका क्या मतलब है."
पुलवामा हमले के दिन पीएम का कार्यक्रम
सरकार के सूत्रों के हवाले से जो ख़बर प्रकाशित की गई है उसमें बताया है कि प्रधानमंत्री मोदी 14 फ़रवरी की सुबह 7 बजे ही देहरादून पहुंच गए थे लेकिन मौसम ख़राब होने की वजह से चार घंटे तक वे फंसे रहे.
फिर वे सुबह 11.15 मिनट पर जिम कोर्बेट पार्क पहुंचे जहां उन्होंने तीन घंटे बिताए. उसके बाद वे मोटरबोट के ज़रिए कालागढ़ से ढिकाला के जंगलों में गए.
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी को उसी दोपहर रुद्रपुर में एक रैली को संबोधित करना था लेकिन पुलवामा हमले की ख़बर मिलने के बाद उन्होंने रैली में जाना रद्द किया.
हालांकि इस रैली को मोदी ने फ़ोन से ज़रिए संबोधित किया था. दूरदर्शन न्यूज़ के यूट्यूब चैनल पर इसका वीडियो पोस्ट किया गया है.
इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक से संपर्क किया.
सरकारी सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ने इस दौरान कुछ भी नहीं खाया. वे इस बात से भी नाराज़ थे कि उन्हें हमले की ख़बर देरी से क्यों दी गई.
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