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पाकिस्तान: रिहा हुईं आसिया बीबी का पता नहीं, उनके वकील ने देश छोड़ा
- Author, रज़ा हमदानी
- पदनाम, बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद
पाकिस्तान में ईशनिंदा मामले में ईसाई महिला आसिया बीबी के वकील ने अपनी जान पर ख़तरे के डर से पाकिस्तान छोड़ दिया है.
सैफ़ उल मुलूक ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा कि उन्हें इसलिए जाना पड़ा ताकि वह आसिया बीबी का प्रतिनिधित्व कर सकें. बुधवार को आसिया की फांसी की सज़ा को पलटते हुए उन्हें रिहा कर दिया गया था.
इस सप्ताह की शुरुआत में मुलूक ने बीबीसी से कहा था कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी पश्चिमी देश में जाना चाहती हैं. इससे पहले कई बार उनकी जान लेने की कोशिश की जा चुकी है.
कई देशों ने आसिया बीबी को शरण देने की पेशकश की है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने बुधवार की शाम आसिया बीबी केस के फ़ैसले के बाद राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था, "देश को वहां न लेकर जाइए जहां वह कोई एक्शन ले."
इसकी ज़रूरत क्यों पेश आई? देशभर में धार्मिक पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान ने आसिया बीबी की रिहाई के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे और अहम सड़कों को बंद कर दिया था.
आसिया कहां हैं?
नया पाकिस्तान, नया प्रधानमंत्री और लोगों की उम्मीदें. लेकिन शुक्रवार को सरकार और तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के बीच समझौता हुआ और विरोध प्रदर्शन बंद करने का ऐलान किया गया.
आसिया के वकील ने इस समझौते को 'दर्दनाक' बताया है. उन्होंने यूरोप की उड़ान लेने से पहले एएफ़पी से कहा, "वे देश के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश तक को लागू नहीं कर सकते."
मुलूक ने कहा कि उन्होंने देश छोड़ने का फ़ैसला लिया है क्योंकि पाकिस्तान में रहना 'संभव नहीं' है.
उन्होंने कहा, "मुझे जीवित रहने की ज़रूरत है क्योंकि मुझे अभी भी आसिया बीबी के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़नी है."
समझौते के बाद बहुत से लोगों ने अपनी भावनाओं को सोशल मीडिया पर ज़ाहिर किया है.
एक तरफ़ धार्मिक पार्टी के साथ समझौता करने के ख़िलाफ़ बातें शुरू हुईं तो दूसरी तरफ़ ये सवाल उठाया जाने लगा कि समझौते के तहत आसिया बीबी का नाम एग्ज़िट कंट्रोल लिस्ट (ईसीएल) में नहीं डाला है और वह देश से बाहर चली गई हैं. इस लिस्ट में जिसका नाम होता है उसे पाकिस्तान छोड़ने की इजाज़त नहीं होती.
आसिया के कनाडा जाने की अफ़वाह
सोशल मीडिया पर 'आसिया बीबी इन कनाडा' और 'आसिया बीबी कनाडा' के हैशटैग इस्तेमाल होने लगे.
सबसे पहले पंजाब के गवर्नर रहे दिवंगत सलमान तासीर के बेटे शान तासीर के इंटरव्यू के हवाले से ये ख़बर ट्रेंड करने लगी कि आसिया बीबी कनाडा चली गई हैं.
जब सोशल मीडिया पर उनसे इस ख़बर की पुष्टि के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने जबाव दिया कि 'मेरा यह मतलब नहीं था. आसिया पाकिस्तान में हैं.'
लेकिन इस ख़बर को बाद में और ज़्यादा मज़बूती तब मिली जब पत्रकार गुल बुख़ारी ने ट्वीट किया और 'सूत्रों' के हवाले से लिखा कि आसिया बीबी को उसी दिन कनाडा रवाना कर दिया गया था जिस दिन सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने उनकी रिहाई का फ़ैसला सुनाया था.
उन्होंने ट्वीट किया, "विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक़ सरकार ने अच्छा क़दम उठाया. कोर्ट, जेल प्रशासन और अन्य के साथ मिलकर काम किया और आसिया बीबी की उसी दिन कनाडा रवानगी का बंदोबस्त किया."
इसके जवाब में तारिक़ फ़तह ने ट्वीट किया कि अगर कनाडा ने आसिया और उनके ख़ानदान को शरण दे दी है तो प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो शुभकामनाओं के हक़दार हैं.
इसराइली जहाज़ से जाने की अफ़वाह
यहां ये बता देना ज़रूरी है कि बीबीसी की अपनी पड़ताल के मुताबिक़ आसिया बीबी के विदेश जाने के कोई प्रमाण नहीं हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर सुगबुगाहटों को कौन रोक सकता है.
ऐसी ही एक ख़बर बीते हफ़्ते सामने आई थी कि इसराइल से एक जहाज़ पाकिस्तान आया और 10 घंटे इस्लामाबाद के हवाई अड्डे पर रहा.
हालांकि पाकिस्तानी प्रशासन ने इसे अफ़वाह बताया था. एक अन्य ट्विटर यूज़र ने ट्वीट किया, "अगर आसिया बीबी का ख़ानदान कनाडा में है तो फिर वह भी इसराइल-ओमान से इस्लामाबाद आए रहस्यमय जहाज़ से कनाडा चली गई होंगी."
अब पाकिस्तान में वॉट्सअप पर यह अफ़वाह भी बिना परों के उड़ रही है कि यह इसराइली जहाज़ दरअसल आसिया बीबी को लेने आया था.
वहीं, तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के साथ सरकार की ओर से किए जाने वाले समझौते को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.
इस समझौते को सरकार की ओर से एनआरओ (माफ़ी क़ानून) दिया जाना कहा जा रहा है. इमरान ख़ान की पार्टी सत्ता में आने से पहले कहा जा रहा था कि सरकार जब सत्ता में आएगी तो एनआरओ नहीं दिया जाएगा.
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