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जब स्मृति इरानी ने अनजाने में ऐसे फैलाई फ़ेक न्यूज़
फ़ेक न्यूज़ पर कड़े तेवर अपनाने वाली केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति इरानी खुद फ़ेक न्यूज़ की 'शिकार' हो गई हैं.
वजह है 1990 के दशक में मुख्य चुनाव आयुक्त रहे टीएन शेषन की मौत की झूठी ख़बर.
इस फ़ेक न्यूज़ के चंगुल में फंसने वालों में स्मृति इरानी के अलावा केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह भी शामिल रहे.
जितेंद्र सिंह ने एक ट्वीट में लिखा, ''छह अप्रैल को टीएन शेषन नहीं रहे. एक दिन पहले ही उनकी पत्नी की मौत हुई थी. दोनों के बच्चे नहीं हैं. एक ईमानदार कैबिनेट सचिव और बाद में मुख्य चुनाव आयुक्त, जिन्होंने अपनी छाप छोड़ी. कई मायनों में... एक युग का अंत.''
स्मृति इरानी इस ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए लिखती हैं- ओम शांति.
ज़िंदा हैं टीएन शेषन
दोनों ही नेताओं ने जिन टीएन शेषन को श्रद्धांजलि दी, वो अभी ज़िंदा हैं. हालांकि ये सच है कि कुछ दिन पहले टीएन शेषन की पत्नी की मौत हुई थी.
हालांकि इन दोनों ट्वीटस को डिलीट कर दिया गया है. लेकिन सोशल मीडिया पर लोग इन ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट ले चुके थे.
स्मृति इरानी का ये गलती करना इसलिए भी ज़्यादा सुर्खियों में है, क्योंकि कुछ दिन पहले स्मृति इरानी फ़ेक न्यूज़ पर लगाम कसती सी नज़र आईं थीं.
सोशल मीडिया पर लोगों की चुटकी
कुछ दिन पहले स्मृति इरानी ने एक फ़ैसला सुनाया था, जिसके तहत फ़ेक न्यूज़ लिखने या प्रचार प्रसार करने वाले पत्रकारों की मान्यता रद्द करने की बात कही गई थी. इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दखल के बाद वापस ले लिया गया था.
स्वाति चतुर्वेदी लिखती हैं, ''प्रिय स्मृति इरानी आपने बिना सफाई दिए फ़ेक न्यूज़ वाला अपना ट्वीट डिलीट कर दिया. लेकिन ऐसा क्या है कि आपको लगता है कि आप ऑनलाइन न्यूज़ को कंट्रोल कर सकती हैं.''
हेमंत कुशवाहा लिखते हैं, ''ये स्मृति इरानी सुधरने वाली नहीं हैं. ज़िंदा टीएन शेषन को श्रद्धांजलि दे डाली.''
जब स्मृति ने किया फ़ेक न्यूज़ का प्रचार-प्रसार
इसी साल की शुरुआत में स्मृति इरानी ने एक ख़बर ट्वीट की थी.
इस ट्वीट के कैप्शन में लिखा था- "श्रीनगर से 15 मिनट में लेह. कैबिनेट ने जोजिला पास टनल प्रोजेक्ट को दी मंजूरी.?''
स्मृति इरानी ने गलत ख़बर ट्वीट की थी. जिसे बाद में मीडिया संस्थान ने दुरुस्त भी किया था. लेकिन स्मृति इरानी का वो ट्वीट आज भी मौजूद है.
अगर स्मृति इरानी का फ़ेक न्यूज़ पर लाया फ़ैसला लागू हो जाता, ऐसी स्थिति में वो खुद गलत खबर का प्रचार-प्रसार करने वालों की श्रेणी में आ जाती.
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