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सोशल: गुड मॉर्निंग, राधे-राधे! इंटरनेट पर ट्रैफ़िक जाम है
गुड मॉर्निंग, राधे-राधे, सुप्रभात. आपका दिन शुभ हो...और भी न जाने क्या-क्या!
ये वो मैसेज हैं जो सुबह फ़ोन खोलते ही आपको दिखते हैं. ये वो मैसेज हैं जो हर दूसरे दिन आपके फ़ोन की मेमोरी फ़ुल कर देते हैं.
हाथ जोड़े खड़ी कोई ख़ूबसूरत महिला, फूलों की डलिया के साथ लेटा कोई बच्चा और न जाने ऐसे कितने हैं जिनकी वजह से आपका फ़ोन बार-बार हैंग हो जाता है.
ये बात हवा में नहीं कही जा रही है. ये कहना है सिलिकन वैली में गूगल के रिसर्चर्स का. उन्होंने ये समझने की कोशिश की कि भारत में लोग अक्सर फ़ोन हैंग होने की शिकायत क्यों करते हैं.
शोधकर्ताओं ने बताया कि भारतीय रोज लाखों ऐसे 'गुड मॉर्निंग' वाले संदेश एक-दूसरे को भेजते हैं जो टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो और जीआईएफ़ में होते हैं.
इंटरनेट पर ट्रैफ़िक जाम
इनसे हालात ऐसे हो गए हैं जैसे इंटरनेट पर 'ट्रैफ़िक जाम' हो गया हो. लेकिन भारतीय गुड मॉर्निंग वाले इतने मैसेज भेजते क्यों हैं?
द वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 साल में गूगल में 'गुड मॉर्निंग' वाली तस्वीरों के सर्च में 10 गुनी बढ़त दर्ज की गई है.
ऐसा क्यों करते हैं भारतीय?
शोधकर्ताओं का मानना है कि स्मार्टफ़ोन की आसान पहुंच और सोशल मीडिया की ठीक जानकारी न होना इसकी एक बड़ी वजह है.
आज के वक़्त में हर तबके और हर उम्र के व्यक्ति के पास स्मार्टफ़ोन और इंटरनेट डेटा है. इसलिए ऐसे लोगों की संख्या फ़िलहाल काफ़ी ज्यादा है जो पहली बार इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं.
शायद उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं है कि उनके इस तरह के मैसेजों से किसी को परेशानी या झुंझलाहट हो सकती है.
ट्विटर और फ़ेसबकु पर इस रिपोर्ट के बारे में खूब चर्चा हो रही है. सत्यम ने ट्वीट किया, "मैं समझ सकता हूं. मेरे घर में कई लोग हैं जिन्होंने हाल ही में इंटरनेट इस्तेमाल करना सीखा है."
कॉलेज में पढ़ाई करने वाली नंदिता ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मेरे फ़ैमिली वॉट्सऐप ग्रुप में रोज ऐसे मैसेज आते हैं. मुश्किल तो तब होती है जब जवाब न देने पर रिश्तेदार बुरा मान जाते हैं."
25 साल की आकांक्षा का भी ऐसा ही कुछ अनुभव है. उन्होंने कहा, "मैंने तो सारे ग्रुप्स म्यूट कर रखें और तस्वीरें डाउनलोड किए बिना उन्हें डिलीट कर देती हूं. फ़ोन में गैरज़रूरी तस्वीरों से मुझे उलझन होती है."
एक आईटी कंपनी में काम करने वाले जय हंसकर कहते हैं कि कम से कम अब लोगों को समझ जाना चाहिए कि उनके इन मैसेजों से सबको कितनी दिक्कत हो रही है.
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