You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
सोशल मीडिया पर जज लोया की मौत की चर्चा
सीबीआई की विशेष अदालत के जज ब्रजगोपाल लोया की मौत पर तीन साल बाद सवाल उठ रहे हैं.
एक पत्रिका ने जस्टिस लोया के रिश्तेदारों से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट छापी थी जिसमें कहा गया है कि उनकी मौत की परिस्थितियाँ संदेहास्पद हैं.
जज लोया की मौत एक दिसंबर 2014 को एक शादी में शामिल होने के दौरान नागपुर में हो गई थी.
अपनी मौत से पहले जस्टिस लोया गुजरात के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख़ एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे.
इस मामले में अन्य लोगों के साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अभियु्क्त थे, अब ये केस ख़त्म हो चुका है और अमित शाह को दोषमुक्त क़रार दिया गया है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया, "ख़ौफ़नाक रहस्योद्घाटन. हो सकता है जज लोया की मौत हार्ट अटैक से न हुई हो. जज ख़ामोश हैं. डरे हुए हैं? क्यों? अगर हमें नहीं बचा सकते तो कम-से-कम अपनों को तो बचा लें."
वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने ट्विटर पर लिखा है, "सीबीआई जज लोया की मौत के मामले से क़त्ल, रिश्वत, क़ानून को दबाने और हमारे संसदीय लोकतंत्र के संस्थानों को उच्चतम स्तर से मन मुताबिक चलाने के सवाल खड़े हुए हैं जिनकी गंभीर जांच की ज़रूरत है."
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया है, "मुख्यधारा मीडिया को साहस दिखाते हुए इसे बड़े स्तर पर उठाना चाहिए."
इतिहासकार एस. इरफ़ान हबीब ने ट्वीट किया, "जज लोया की मौत पर कारवां पत्रिका की स्टोरी पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की ख़ामोशी कमाल की है, हालांकि ये हैरान करने वाली नहीं है. निडर पत्रकार निरंजन टकले को समर्थन की ज़रूरत है."