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सोशल- 'मोदी जी आज आपने जो पटना यूनिवर्सिटी को दिया, रुला दिया'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को पटना विश्वविद्यालय में मौजूद थे. मौका था पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह का.
कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मोदी का स्वागत किया. सैकड़ों छात्रों की उपस्थिति में नीतीश ने प्रधानमंत्री मोदी से पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने का आग्रह किया.
गिनाई विश्वविद्यालय की उपलब्धियां
नीतीश ने अपने भाषण में पटना विश्वविद्यालय की उपलब्धियां गिनाईं और फिर कहा कि वे कई सालों से पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे हैं.
नीतीश के बाद भाषण देने आए पीएम मोदी ने कहा कि पटना यूनिवर्सिटी आने वाला वे पहले प्रधानमंत्री हैं. साथ ही उन्होंने पटना विश्वविद्यालय की तारीफ़ करते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय ने देश को कई उच्च अधिकारी दिए हैं.
लेकिन पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने के मामले में मोदी ने कुछ भी साफ-साफ नहीं कहा.
20 विश्वविद्यालयों को 10 हजार करोड़ रुपये
मोदी ने कहा, ''केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देना तो बीते हुए कल की बात है, मैं तो इस विश्वविद्यालय को एक कदम और आगे ले जाना चाहता हूं.''
साथ ही उन्होंने यह घोषणा भी कर दी कि देश के 20 विश्वविद्यालयों (10 प्राइवेट, 10 पब्लिक) को विश्वस्तर का बनाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे. इन विश्वविद्यालयों का चयन योग्यता के आधार पर किया जाएगा.
पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग पर पीएम मोदी से स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलने पर सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया. ट्विटर पर पटना यूनिवर्सिटी, बिहार चीफ़ मिनिस्टर और नीतीश कुमार टॉप ट्रेंड करने लगे.
नीरज सिंह राजपूत ने लिखा, ''बस करिए मोदी जी, आज आपने जो पटना यूनिवर्सिटी को दिया, रुला दिया.''
रणधीर कुमार ने ट्वीट किया, ''अच्छा मजाक चल रहा है दो दिन से, पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाना है. और आज मोदी जी ने तो बना ही दिया.''
प्लेबुक नाम के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया, ''नीतीश जी के हाथ जोड़ के मांग करने के बावजूद नहीं दिया दर्जा सेंट्रल यूनिवर्सिटी का, बना गए टुल्लू.''
हालांकि ट्विटर पर लोगों ने मोदी का समर्थन भी लोगों ने किया है.
अर्जुन चौरसिया के ट्वटर हैंडल से लिखा गया है, "20 यूनिवर्सिटी को सरकारी बंधन से मुक्त करने की घोषणा की और वो भी उसके रिकॉर्ड के आधार पर. सराहनीय प्रयास."
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