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सोशल : नए साल पर पटाखे फूटें तो ख़ुशियां लाते हैं, दीवाली पर फूटें तो
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आया कि इस बार दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के मौके पर पटाखों की बिक्री नहीं होगी.
प्रतिबंध को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की तरफ़ से जारी किए गए सारे स्थाई और अस्थाई लाइसेंस भी तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस प्रतिबंध के साथ ये देखना चाहता है कि क्या दिवाली से पहले पटाखों की बिक्री पर बैन से प्रदूषण में कमी आती है या नहीं.
पटाखों की बिक्री पर बैन की याचिका तीन बच्चो की ओर से दायर की गई थी.
इस फ़ैसले को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया है. हालांकि ज़्यादातर लोगों ने कोर्ट के इस फ़ैसले का स्वागत किया है.
@Prabhat Kumar Singh लिखते हैं कि न्यायालय द्वारा दिया गया फ़ैसला स्वागत योग्य है. इसे हिन्दू विरोधी के नज़र से नहीं बल्कि पर्यावरण की रक्षा की नज़र से देखा जाना चाहिए.
@Naresh Hardiya लिखते हैं कि अगर ये बैन पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए लगया गया है तो अच्छी बात है. ये बैन दिवाली, न्यू ईयर, और नेताओं की जीत के जश्न में भी जारी रहना चाहिए. अगर बैन दिवाली पर है तो न्यू ईयर पर भी होना चाहिए.
हालांकि पटाखे जलाने पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है. जिन लोगों ने पहले से पटाखों की ख़रीददारी कर ली है वो इसे जला सकते हैं.
इस मामले में याचिकाकर्ता हरिप्रिया पद्मनाभन का कहना है, "सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से वो बेहद खुश हैं. इस फ़ैसले से किसी को नुकसान नहीं होगा. जिन दुकानदारों ने पटाखे ख़रीद रखे हैं, वो अपने पटाखे दिल्ली-एनसीआर के बाहर बेच सकते हैं."
@Chandan Yadav का कहना है कि न्यायालय के फ़ैसले का स्वागत करते हैं लेकिन पटाखा फैक्ट्रियों के कारीगरों, मजदूरों के घर चूल्हा कैसे जलेगा, दिवाली कैसे मनायी जाएगी...! क्या माननीय सुप्रीम कोर्ट उनके बारे में सोचेगी?
@Pratap Singh ने लिखा है कि फ़ैसला स्वागत योग्य है. एनसीआर में ही क्यों पूरे भारत में ही प्रतिबंध होना चाहिए. हम जिस डाल पर बैठे हैं उसी को काट रहे हैं. इस फैसले को हिन्दू ही नहीं सभी धर्मो के लोगों को तुरंत मानना चाहिए.
@Teekam Yadav का कहना है कि पटाखे भी अजीब हैं नए साल पर 199 देशो में फूटते हैं तो खुशियां लाते हैं और दिवाली पर भारत में फूटते हैं तो प्रदूषण करते हैं.
Vinay Kumar Gupta ने भी फ़ैसले की तारीफ़ की है. लिखा है यह बहुत ही स्वागत योग्य फ़ैसला है. कृपया इसे हिन्दू बनाम मुस्लिम न बनाये. पर्यावरण प्रदूषण के कारण कब हम हृदय रोग से पीड़ित हो जाते हैं पता ही नहीं चलता.
साथ ही साथ माननीय सुप्रीम कोर्ट को जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने के लिए सरकार को बाध्य करना चाहिए.