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मोदी ने राहुल गांधी पर 'शहज़ादा' कहकर तंज़ कसा था, राहुल ने किसे कहा 'शाह-ज़ादा'?
सियासत का मिजाज़ ही कुछ ऐसा है कि कल के नारे आज फिर प्रासंगिक हो जाते हैं. और उस पर तुर्रा ये है कि जो कल वो जुमले इस्तेमाल कर रहा था, उसी के ख़िलाफ़ आज वो इस्तेमाल हो सकते हैं.
कुछ ऐसा ही खेल इन दिनों कांग्रेस और भाजपा के सबसे बड़े खिलाड़ियों के बीच चल रहा है.
एक तरफ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हैं और उनके सामने हैं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी. साल 2014 का चुनाव याद होगा ही.
'शहज़ादा बनाम शाहज़ादा'
इस चुनाव से जुड़े प्रचार में मोदी, राहुल गांधी का नाम विरले ही लेते थे. वो उन्हें 'शहज़ादा' कहकर पुकारते थे और सोनिया गांधी को 'मैडम' कहा करते थे.
जब मोदी, मैडम और शहज़ादा बोलते, तो उनकी भाषा तंज़ लिए होती थी और पब्लिक हाथों हाथ लिया करती थी. आज मौसम थोड़ा बदला है.
न्यूज़ वेबसाइट 'द वायर' में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी के कारोबार के संबंध में छपी एक ख़बर ने सियासी हलकों में हंगामा मचा दिया है.
भाजपा उतरी बचाव में
भाजपा और सरकार ने इस हमले को कितनी गंभीरता से लिया, इस बात से समझा जा सकता है कि रेल मंत्री पीयूष गोयल को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलानी पड़ी.
कांग्रेस ने ख़बर का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि 2015-16 में जय शाह की कंपनी का सालाना कारोबार 50 हज़ार से बढ़कर 80.5 करोड़ रुपए तक पहुंचने की जांच होनी चाहिए.
अमित शाह के बेटे पर लगे आरोपों ने कांग्रेस को बैठे-बैठे हथियार दे दिया है और भाजपा ने इस पर प्रतिक्रिया देकर उसे और उत्साहित कर दिया है.
और अब हमला करने मैदान में उतरे हैं राहुल गांधी.
राहुल गांधी काफ़ी आक्रामक
वायर की इस ख़बर को पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने रविवार को ट्वीट किया था, ''हमें आख़िरकार वो लोग मिल ही गए जिन्हें असल में नोटबंदी से फ़ायदा मिला है. इसका फ़ायदा आरबीआई या गरीबों या किसानों को नहीं मिला. फ़ायदे उठाने वाले शाह-इन-शाह हैं. जय अमित.''
और सोमवार को उन्होंने अपने हमले को और धार दी. उन्होंने टि्वटर पर लिखा, ''मोदीजी, जय शाह-'जादा' खा गया. आप चौकीदार थे या भागीदार? कुछ तो बोलिए...''
'शाह-जादा' या 'शहज़ादा' लफ़्ज़ पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत है.
मोदी से क्या शिकायत?
साल 2013-14 में लोकसभा चुनावों से पहले मोदी जब राहुल को शहज़ादा कहकर पुकारते थे तो कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि वो अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं और सियासी बातचीत को निचले स्तर पर ले जा रहे हैं.
पार्टी ने ये भी कहा था कि कांग्रेसी कार्यकर्ता इस तरह की भाषा को स्वीकार नहीं करेंगे लेकिन वो क़ानून और चुनाव आयोग की आचार संहिता का सम्मान करते हैं इसलिए ख़ुद पर काबू रखे हुए हैं. इसी बात का जवाब मोदी ने पटना रैली में दिया था.
कांग्रेस को जवाब दिया
उन्होंने कहा, ''कांग्रेस के मित्र बहुत परेशान हैं कि मोदी शहज़ादा क्यों कह रहे हैं...उन्हें नींद नहीं आती. लेकिन मैं पूछता हूं कि शहज़ादा कहने की नौबत क्यों आई. अगर कांग्रेस विरासतवादी राजनीति बंद कर देगी तो मैं उन्हें शहज़ादा कहना बंद कर दूंगा.''
शहज़ादा लफ़्ज़ पर ऐतराज़ जताने वाली कांग्रेस अब इसी लफ़्ज़ से पलटवार की कोशिश कर रही है. और जिन राहुल गांधी को मोदी शहज़ादा कहते थे, वहीं राहुल गांधी अमित शाह के बेटे को 'शाह-ज़ादा' कहकर तंज़ कस रहे हैं.
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