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सोशल: 'नोटबंदी के बाद अब हंसना किस पर है, मुझे समझ नहीं आ रहा है'
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने नोटबंदी पर अपनी रिपोर्ट दे दी है. इसमें बताया गया है कि पिछले साल नोटबंदी के बाद 500 और 1000 के पुराने नोटों में से लगभग 99% बैंकिंग सिस्टम में वापस आ गए हैं.
रिपोर्ट आने के बाद विपक्षी पार्टियां तो सरकार को घेर ही रही हैं, सोशल मीडिया पर भी लोग इस फ़ैसले पर सवाल उठा रहे हैं. ट्विटर पर #DeMonetisation एक बार फिर ट्रेंड कर रहा है. लोग अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर रहे हैं और साथ ही चुटकुले बनाकर उन पर हंस भी रहे हैं.
शुभम कुमार पूछते हैं,''ग़रीबों ने नोटबंदी पर मोदी का साथ इस उम्मीद में दिया कि अमीरों पर डंडा चलेगा. आज देश के ग़रीब ठगा महसूस नहीं कर रहे होंगे?'' संतोष वर्मा कहते हैं,''नोटबंदी के फ़ैसले से क्या फर्क पड़ा? समय और धन की बर्बादी हुई. बैंक कर्मी काम के दबाव में और ज़रूरतमंद बैंको लाइनों में जान गंवा बैठे.''
योगेश ठाकुर को नोटबंदी के नतीजे से 'खोदा पहाड़, निकली चुहिया' वाली कहावत याद आ रही है. इमरान पूछते हैं, ''देश में काला धन सफेद हो गया? या फिर काला धन था ही नहीं?'' अलीम ने ट्वीट किया,''ना खुदा ही मिला ना विसाल ए सनम, ना इधर के रहे ना उधर के हम.''
आशुतोष फ़ेसबुक पर लिखते हैं,''सुबह का भूला अगर शाम को वापस आ जाए तो उसे भूला नहीं, पुराने नोट कहते हैं.'' नागेश ने फ़ेसबुक पर लिखा,''नोटबंदी ने नक्सलियों और आतंकवादियों की कमर ठीक वैसे ही तोड़ दी है, जैसे राजनाथ सिंह की कड़ी निंदा से घबरा कर चीनी सिपाही वापस लौट गए.''
दीप प्रकाश ने ट्वीट किया,''मोदी जी कहते हैं नोटबंदी से आतंकवाद खत्म होगा. जेटली जी कहते हैं नोटबंदी से काला धन वापस आएगा. अब हंसना किस पर है, मुझे समझ नहीं आ रहा है.''
हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सरकार ने कम से कम कोशिश तो की. वहीं, कुछ का मानना है कि भले नोटबंदी से काला धन वापस न आया हो लेकिन इसी बहाने डिजिटल करेंसी का चलन बढ़ा है, साथ ही टैक्स भरने वालों की संख्या भी बढ़ी है.
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