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क्या हुआ जब भारत और पाकिस्तान के शायर एक मंच पर साथ आए?
बँटवारे के 70 बरस गुज़र चुके हैं लेकिन सरहदों के बावजूद आज भी एक चीज़ है जो दोनों मुल्कों को जोड़ती है. वो है शायरी और कविता.
'सरहद पार शायरी' के माध्यम से बीबीसी ने दोनों मुल्कों के नौजवान शायरों को एक मंच देने की कोशिश की. बुधवार शाम साढ़े 6 बजे से शुरू हुई ये महफ़िल लगभग दो घंटे चली, जिसमें दोनों देशों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
भारत से कार्यक्रम का संचालन कर रहे थे राजेश जोशी और पाकिस्तान से कमान संभाली वुसतुल्लाह ख़ान ने.
कराची से असद अल्वी, मुंबई से शिवानी गुप्ता, दिल्ली से सुधांशु फ़िरदौस, कराची से कोमैल, मुंबई से हरप्रीत सिंह, लाहौर से युसरा अमजद, कराची से नैना आदिल, मुंबई से मोहम्मद हातिम सद्रीवाला, जयपुर से आदिल रज़ा मंसूरी और कराची से अम्मार ने इस महफ़िल में अपनी लिखी नज़्में और कविताएं सुनाईं.
दोनों देशों के हजारों लोगों ने इस प्रयास को सराहा. असम से @पृथ्वीराज ने लिखा है कि यह महफ़िल बेहद खूबसूरत है. हमें नफ़रत और जंग नहीं, दोस्ती और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की ज़रूरत है.
@दिलीप भट्ट राय लिखते हैं कि यह कार्यक्रम वाकई बेहतरीन है. दोनों देशों के लोगों को जोड़ने का यह एक बेहतरीन प्रयास है.
इसके अलावा मोहम्मद अज़हरुद्दीन, अजय कुमार राय जैसे तमाम दर्शकों ने बीबीसी के इस ख़ास कार्यक्रम को एक अच्छी और सकारात्मक पहल बताया है.
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