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गोरखपुर त्रासदी: डॉक्टरों की बदसलूकी और सरकार की बेरुखी से लोगों में ग़ुस्सा
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हालात तकलीफ़ पहुंचाने वाले हैं. यहां के बीआरडी अस्पताल में इंसेफ़ेलाइटिस और कथित तौर पर ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से कई बच्चों की मौत हो गई है. पिछले 24 घंटे में भी यहां 12 नवजात शिशु अपनी जान गंवा चुके हैं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी रविवार दोपहर में अस्पताल का दौरा किया और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही. मासूमों की मौत पर स्थानीय लोगों में नाराज़गी और गुस्सा है.
बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव ने सहयोगी समीरात्मज मिश्र के साथ बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कैंपस में मौजूद लोगों से फ़ेसबुक लाइव के ज़रिए बात की.
वहां मौजूद एक शख़्स का कहना था कि पिछले कई सालों से पूर्वांचल में इंसेफ़ेलाइटिस की समस्या रही है. उसने कहा,''1995 से ही मैं ऐसी मौतों के बारे में सुनते आ रहा हूं. योगी आदित्यनाथ तब सांसद थे और इंसेफ़ेलाइटिस का मुद्दा उछालते रहते थे.''
लोगों ने अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों पर मरीजों और उनके परिवार से बदसलूकी का आरोप भी लगाया. इन लोगों के दावों के मुताबिक डॉक्टर कई बार मरीजों को भर्ती ही नहीं करते.
अस्पताल के पास रहने वाले एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा,''यहां इलाज कराने गरीब तबके के लोग आते हैं और अस्पताल का स्टाफ़ उनसे जानवरों जैसा बर्ताव करता है.''
यहां पूर्वांचल के अलग-अलग हिस्सों से लोग इलाज कराने के लिए आते हैं और सर्दियों में उन्हें बाहर ही सोना पड़ता है.'' अस्पताल में सुविधाओं के अभाव और अनियमितता को लेकर भी लोग खासे नाराज़ दिखे.
गोरखपुर के ही एक व्यक्ति ने कहा,''यहां एक-एक बिस्तर पर चार-चार मरीज हैं. नर्सों और बाक़ी स्टाफ़ को कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जाता है. उन्हें कभी सैलरी मिलती है, कभी नहीं मिलती. ऐसे में उनके लिए भी काम करना मुश्किल होता है. यहां बच्चों के मरने की घटनाएं आम हैं लेकिन एक साथ 30-40 बच्चों के मौत की ख़बर पहले कभी नहीं आई.''
हालांकि इस त्रासदी के दौरान कुछ डॉक्टरों ने लगातार काम करते हुए मानवता की मिसाल भी पेश की. समीरात्मज मिश्र के मुताबिक डॉक्टरों ने ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने के बाद अपनी गाड़ियों में सिलिंडर भरकर लाए और इलाज की कोशिशों में लगे रहे.
स्थानीय लोगों की यह शिकायत भी है कि यहां रिपोर्टिंग करने पत्रकारों को मेडिकल कॉलेज के कैंपस में घुसने तक नहीं दिया जाता. गोरखपुर के स्थानीय पत्रकार अनुराग तिवारी ने भी इससे सहमति जताई.
उन्होंने बताया कि यहां कुछ वक़्त पहले डॉक्टरों ने कुछ पत्रकारों को पुलिस की मौजूदगी में हाथापाई की थी. गोरखपुर से सटे एक गांव के लोगों ने बताया कि ऐसा बहुत कम ही होता है जब कोई इंसेफ़ेलाइटिस से ठीक होकर घर वापस आए, ज़्यादातर मामलों में उनकी मौत ही हो जाती है.
अनुराग तिवारी के मुताबिक इस इलाक़े में हस साल कम से कम हजार-डेढ़ हजार बच्चों की मौत इंसेफ़ेलाइटिस से हो जाती है. कई बच्चे तो अस्पताल तक पहुंच ही नहीं पाते, इलाज के अभाव में पहले ही दम तोड़ देते हैं.
वैसै पिछले दो-तीन दिनों से अस्पताल में वीआईपी दौरे बढ़ने की वजह से मरीजों को भर्ती कराने में भी परेशानी हो रही है. लोगों ने इसकी ओर भी ध्यान दिलाया.
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