क्या ऑनलाइन गेम ने ली मुंबई के मनप्रीत की जान?

    • Author, राहुल रणसुभे और जाह्नवी मुले
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

मुंबई में महज 14 साल के बच्चे की ख़ुदकुशी के बाद कथित ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल चैलेंज को लेकर बड़ा विवाद छिड़ गया है. बात यहां तक पहुंची कि राज्य के मुख्यमंत्री को जवाब देना पड़ा.

पश्चिमी मुंबई के अंधेरी में रहने वाले मनप्रीत ने शनिवार को घर की छत से छलांग लगाकर आत्महत्या की थी. पुलिस जांच कर रही है कि इस के पीछे कहीं एक ऑनलाइन गेम तो नहीं?

मनप्रीत के कुछ दोस्तों के मुताबिक, ''उसने कुछ समय पहले ही ब्लू व्हेल चैलेंज का ज़िक्र किया था जिसे पूरा करने के लिए प्रतियोगियों से ख़ुदकुशी करने के लिया कहा जाता है.''

पुलिस बाकी संभावनाओं को भी ध्यान में रख कर जांच कर रही है.

मेघवाड़ी के एसीपी मिलिंद खेतले ने कहा, "अभी जांच पूरी नहीं हुई है और फ़िलहाल कुछ भी सौ-फ़ीसदी नहीं कहा जा सकता." पुलिस मनप्रीत के दोस्तों और परिवार से जानकारी ले रही है और उसके फ़ोन और अन्य गैजेट्स की जांच में भी जुटी है.

मनप्रीत की मौत के पीछे की सच्चाई अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारत में सोशल मीडिया पर इस ऑनलाइन गेम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

क्या है ब्लू व्हेल चैलेंज?

माना जाता है कि इस जानलेवा गेम की शुरुआत रूस से हुई थी.

मोबाइल, लैपटॉप या डेस्कटॉप पर खेले जानेवाले इस गेम में प्रतियोगियों को 50 दिनों में 50 अलग-अलग टास्क पूरे करने होते हैं और हर एक टास्क के बाद अपने हाथ पर एक निशान बनाना होता है. इस खेल का आखिरी टास्क आत्महत्या होता है.

भारत में यह गेम हाल ही चर्चा में आया है, लेकिन रूस से लेकर अर्जेंटीना, ब्राजील, चिली, कोलंबिया, चीन, जॉर्जिया, इटली, केन्या, पराग्वे, पुर्तगाल, सऊदी अरब, स्पेन, अमेरिका, उरुग्वे जैसे देशों में कम उम्र के कई बच्चों ने इस चैलेंज की वजह से अपनी जान गंवाई है.

गेम के ऐडमिन फ़िलिप बुदेकिन को इसी साल मई में गिरफ़्तार भी किया गया था.

ब्लू व्हेल चैलेंज से कैसे निपटें?

क्या कोई मोबाइल गेम किसी को आत्महत्या करने के लिए उकसा सकता है?

औरंगाबाद की मनोचिकित्सक मधुरा अन्वीकर कहती हैं, "मोबाइल गेम खेलते समय बच्चों को आनंद महसूस होता है. इससे दिमाग़ के कुछ हिस्से में इस अनुभव को बार-बार लेने की चाह पैदा होती है."

मधुरा कहती हैं, "इस तरह के गेम मे जो भी टास्क दिए जाते हैं, उससे खेलने वाले की उत्सुकता बढ़ने के साथ ही यह भावना भी पैदा होती है कि 'मैं यह करके दिखाऊंगा'. उसे यह पता ही नहीं होता कि उसका अंजाम क्या होगा."

मधुरा अन्वीकर औरंगाबाद में पिछले 10 सालों से आइकॉन नामक एक मनोवैज्ञानिक केंद्र चलाती हैं और उनके केंद्र में मोबाइल की लत से पीड़ित बच्चों के उपचार के लिए कई अभिभावक आते हैं.

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

बेंगलुरू के सेंटर फ़ॉर इंटरनेट ऐंड सोसाइटी के विशेषज्ञ उद्भव तिवारी ने कहा, "यह ऐसा गेम नहीं है जिसे मोबाइल आदि पर डाउनलोड करके खेला जा सके और इस चैलेंज में इंटरनेट का किरदार एकदम ही अलग है. यहां ग्रुप के किसी सदस्य के द्वारा कुछ चैलेंज दिए जाते हैं और खेलने वाला इस चैलेंज को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर ले सकता है. यह चैलेंज किसी भी प्लेटफॉर्म पर दिया और लिया जा सकता है. न केवल इंटरनेट, वेबसाइट या सोशल मीडिया पर बल्कि एक बंद कमरे में बैठे लोगों के बीच भी ये ब्लू व्हेल चैलेंज खेला जा सकता है."

ब्लू व्हेल जैसे सेल्फ़-हार्म गेम्स से निपटने के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने पहले से ही कदम उठाए हैं.

फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर ब्लू व्हेल सर्च करने पर आपसे पूछा जाता है, 'क्या आप किसी तकलीफ़ से गुजर रहे हैं, हम आपकी मदद कर सकते हैं.'

क्या है सरकार का कहना

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने विधानसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, "मुंबई में हुई घटना की पूरी जांच की जाएगी. हम केंद्र सरकार से चर्चा करेंगे कि इन गेम्स को कैसे रोका जाए."

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