फ़ेसबुक पर एक महिला का क्या है सबसे बड़ा डर?

    • Author, सुदीप्ति
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

फ़ेसबुक भारत में महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए एक नया फीचर ला रहा है, जिससे फेसबुक पर प्रोफाइल पिक्चर को शेयर, डाउनलोड नहीं किया जा सकेगा.

हमारे समाज में ज़्यादातर महिलाओं को पब्लिक स्पेस में अपनी बात रखने की कम ही आज़ादी मिलती है. फ़ेसबुक की वजह से महिलाओं को अपनी बात ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के बीच कहने का प्लेटफॉर्म मिला.

इस आज़ादी और जाने-अनजानों के बीच संवाद की गुंजाइश से महिलाओं की झिझक खुली. मुझे याद है ज़्यादातर महिलाएं शुरुआत में फ़ेसुबक में प्रोफाइल पिक्चर की जगह फूल, पत्ती या औपचारिक तस्वीरें लगाती थीं.

ये महिलाएं धीरे-धीरे अपनी सुंदर, कलात्मक और क्लोज-अप वाली तस्वीरें पोस्ट करने लगीं. फिर सेल्फी के ज़माने में तो नई डीपी का नशा ही छा गया. जब फेसबुक ने टेम्परेरी प्रोफाइल पिक्चर का विकल्प दिया तो रोज़ बदलने वाली सुंदर तस्वीरों की बाढ़-सी आ गई. इसमें बुराई भी क्या है?

कुछ महिलाओं में एक डर हमेशा बना रहता है- तस्वीर शेयर हो जाने का.

मुझे नहीं लगता कि फ़ेसबुक पर सक्रिय कोई भी महिला ऐसे बिना इजाजत 'शेयर' से बच पाई होगी. निजी तस्वीरों को शेयर किया जाना मुझे कभी पसंद न आया, ज्यादातर को नहीं आता है.

एक फोटोग्राफर की तस्वीर सराहने के लिए जब शेयर की जाती है, तब उसका उत्साह बढ़ता है लेकिन किसी लड़की की तस्वीर शेयर करने का मतलब उसे परेशान करना ही माना जाएगा.

मेरी कई प्रोफाइल पिक्चर शेयर का 'शिकार' हुईं. शुरू में तो ऐसे अजीब प्रोफाइल वालों ने शेयर की, जिनकी वॉल पर सिर्फ़ लड़कियों की तरह-तरह की तस्वीरें दिखीं. मैं बेहद डर गई.

गलत जगह पर अपनी तस्वीर देखकर फ़ेसबुक पर रिपोर्ट करने और अंतत: उसे ब्लॉक करने के सिवा कोई चारा नहीं था.

फ़ेसबुक भी जाने कैसे रिव्यू करता है कि उसे ऐसी जगहों पर कोई दिक्कत ही नहीं दिखती थी और जवाब यही मिलता कि अगर आप परेशान हैं तो ब्लॉक कर लें.

दरअसल पर्सनल तस्वीरों का शेयर होना हमारी निजता का हनन है और यह गुस्से से भर देता है.

कई जानकर लोग महिलाओं को सलाह देते हैं कि तस्वीर पब्लिक मत लगाओ. मैंने खुद डीपी की प्राइवेसी सेटिंग में 'ओनली मी' और 'फ्रेंड्स ओनली' भी किया है.

लेकिन सवाल है कि क्यों यह सारे सेफ्टी टूल्स लगाने पड़ें?

सुरक्षा के नाम पर कितने बंधन समाज में हैं. वही सब यहां भी? फिर फ़ेसबुक क्यों नहीं यह सुविधा दे कि हम किसी तस्वीर को शेयर/सेव/डाउनलोड से मुक्त रख सकें.

अगर फ़ेसबुक ऐसी सुविधा दे कि किसी दूसरे की तस्वीर का इस्तेमाल कोई और न कर सके तो इससे बेहतर क्या होगा?

मेरी तस्वीर फ़ेसबुक पर कई बार शेयर हुई. एक बार परेशान होकर मैंने फ़ेसबुक पर इस बारे में लिखा. जिस आदमी ने वो तस्वीर शेयर की थी, वो मेरी नज़र में एक पढ़ा लिखा और समझदार इंसान था.

सार्वजनिक स्पेस में शेयर की गई कोई चीज़ निजी नहीं?

इन महोदय को मैंने इनबॉक्स करके 'शेयर हटा लीजिए' कहा. उनकी उम्र और फ़ेसबुक पर पोस्ट्स देखकर मुगालते में थी कि गलती से कर दिया होगा. मेरे कहने पर ये शेयर हटा लेंगे तो इन्हें ब्लॉक नहीं करुंगी.

लेकिन उन्होंने अपनी उम्र और मेरी विनम्रता का लिहाज़ नहीं किया. उन्होंने इनबॉक्स में तो कोई जवाब नहीं दिया अलबत्ता दस घंटों के बाद दोबारा उसी तस्वीर को शेयर किया.

कैप्शन था- फ़ेसबुक के सार्वजनिक स्पेस में शेयर की गई कोई चीज़ निजी नहीं. उनका पूरा हक़ मेरी उस तस्वीर पर है.

इसे पढ़ मैं बहुत ही खिन्न हुई. एक बार लगा कि पहले ही ब्लॉक करना था. पर ठीक ही हुआ. ऐसे लोगों की सोच भी सामने आनी चाहिए, जिनको लगता है कि फ़ेसबुक पर तस्वीर सार्वजनिक है और उसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

वैसे महानुभावों को मैंने किसी पुरुष की निजी तस्वीरें शेयर करते नहीं देखा. क्यों भला? मैं अक्सर प्रकृति की सुन्दर तस्वीरें शेयर करती हूं. पर वो ये तस्वीरें शेयर नहीं करते.

दरअसल यही मानसिकता है जो तर्क देती है कि बाहर निकलोगी तो छेड़छाड़ होगी ही, रात में जाओगी तो बलात्कार हो सकता है.

दिक्कत सार्वजनिक स्पेस में पोस्ट करने की नहीं, दिक्कत उस स्पेस को अपनी बपौती मानने वालों की है.

ऐसे ही लोग जो किसी टाइमलाइन से डीपी चुराते हैं. रेलगाड़ियों से चादर, बल्ब और परदे तक उतार ले जाते हैं. क्योंकि सार्वजनिक जो है. जैसे सार्वजनिक जगहों पर जाती महिलाएं किसी के मनबहलाव के लिए उपलब्ध नहीं मानी जा सकती हैं वैसे ही इस वर्चुअल सार्वजनिक स्पेस में उनकी तस्वीरें भी शेयर करने के लिए नहीं उपलब्ध हैं.

समझे?

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