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खजुराहो में कामसूत्र बेचने पर आपत्ति, सोशल मीडिया में नाराज़गी
भारत में कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने खजुराहो मंदिर में कामसूत्र बेचने पर पाबंदी लगाने की मांग पर आक्रोश ज़ाहिर किया है.
एक हिन्दू ग्रुप ने यह मांग की है. यह मंदिर कामुक मूर्तियों के लिए जाना जाता है. बजरंग सेना नाम के एक ग्रुप ने विश्व प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर परिसर में फेरी लगाकर इस किताब को बेचने पर आपत्ति जतायी है.
ज्योति अग्रवाल नाम की एक महिला ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा, ''इन मंदिरों का धार्मिक महत्व है...आप इस पवित्र परिसर में कामसूत्र बेचने की अनुमति कैसे दे सकते हैं? ऐसा करके हम कैसे नैतिक मूल्यों को युवा पीढ़ी के बीच रखेंगे?'' इस ग्रुप ने पुलिस से क़दम उठाने के लिए कहा है.
इस समूह का कहना है कि इस तरह की क़िताब मंदिर परिसर में बेचना भारतीय संस्कृति के ख़िलाफ़ है. लेकिन इस तरह की मांग को कई भारतीय ट्विटर यूजर्स ने कड़े शब्दों में ख़ारिज किया है. खजुराहो मंदिर की पहचान दुनिया भर में कामुक मूर्तियों के लिए है.
एक ट्विटर यूजर ने लिखा है, ''इस तरह के फरमान जारी करने से पहले इन्हें मंदिर की दीवारों पर देखना चाहिए.''
दूसरे ट्विटर यूजर ने मंदिर की मूर्तियों की तस्वीरों को पोस्ट किया है. उसने इस तस्वीर के साथ संदेश में लिखा है, ''इन्हें कामसूत्र क़िताब बेचने का विरोध करने से पहले मंदिर की दीवारों को देखना चाहिए.''
जब यही सवाल हिन्दुस्तान टाइम्स ने अग्रवाल से पूछा तो उन्होंने कहा, ''मैं मंदिर पर इस तरह की मूर्तियों का विरोध नहीं कर रही पर इन्हें व्यापक पैमाने पर प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए.''
टि्वटर पर इसे लेकर कई लोगों ने खजुराहो हैशटैग के ट्वीट करना शुरू किया.
खजुराहों मंदिर को यूनेस्को ने विश्व विरासत का दर्जा दिया है. दुनिया भर के लाखों पर्यटक इसे देखने यहां आते हैं.
यह मंदिर मध्य प्रदेश में है. इसका निर्माण एक हज़ार साल पहले हिन्दुओं और जैनों ने किया था.
भारत में कामुकता और संस्कृति को लेकर इन दिनों बहस तेज़ हुई है. कुछ लोगों का कहना है कि 2014 में मोदी सरकार आने के बाद से हिन्दू राष्ट्रवादी ग्रुप ज़्यादा सक्रिय हो गए हैं.
हालांकि ऐसी मांगों को लेकर सोशल मीडिया पर मज़ाक भी ख़ूब उड़ाए जा रहे हैं.
एक फ़ेसबुक यूज़र वागीश विश्नोई ने लिखा है, ''यौन प्रजनन भारतीय संस्कृति के ख़िलाफ़ है. कुछ ऐसा तरीका अपनाना चाहिए जिसमें बिना सेक्स के ही बच्चा पैदा हो जाए. ऐसा करना नैतिक मूल्यों पर खरा भी रहेगा.''
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