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सोशल: 'निर्भया कांड में नाबालिग को भी मिले सज़ा'
दिल्ली के 2012 के निर्भया बलात्कार कांड में सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की फांसी की सज़ा को बरकरार रखा है.
2012 में जब ये मामला सामने आया तब देशभर में इस मामले को लेकर ज़बरदस्त गुस्सा फूट पड़ा था. विदेशों में भी इस बलात्कार कांड को लेकर निंदा हुई थी.
इस मामले में दोषियों की फांसी की सज़ा पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सभी को इंतज़ार था.
सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई.
ट्विटर पर लोग इस फ़ैसले का स्वागत कर रहे हैं, कई लोगों का कहना है कि अब निर्भया को न्याय मिला है.
दीक्षा वर्मा ने लिखा है कि कभी कभी लोकतंत्र को सख्त और दयाहीन होना चाहिए, नहीं तो अपराधियों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जाएगी.
सोनम महाजन ने लिखा है ,''निर्भया के बलात्कारी को फांसी की सज़ा मिलनी चाहिए थी, इससे कम कोई सज़ा नहीं हो सकती थी. और उन सभी में वो कथित नाबिलग मोहम्मद अफ़रोज़ भी शामिल है.''
तहसीन पूनावाला लिखते हैं,'' निर्भयाकांड के बाद आज भी कई महिलाओं का बलात्कार हो रहा है, उनका शोषण हो रहा और न्याय नहीं दिया जा रहा. मुझे उम्मीद है कि आज हम उन सभी तक पहुंच पा रहे हैं.''
अभिषेक सिंह ने लिखा है कि फांसी ही एक ऐसा तरीका है जिससे रेप रोके जा सकते हैं. पुरुषों को महिलाओं के साथ कुछ भी करने से पहले मौत का डर होना चाहिए.
वहीं सिद्धी माथुर लिखती हैं कि निर्भया को न्याय मिला लेकिन आधा. सुप्रीम कोर्ट को उस क्रूर नाबालिग को भी सज़ा देनी चाहिए.
किशोर भट्ट लिखते हैं कि नाबालिग को भी फांसी देनी चाहिए. अगर वो इतना बड़ा था कि रेप कर सके तो सज़ा भी काट सकता है.
आम आमदाी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने भी सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद ट्वीट किया.
कुमार विश्वास ने लिखा है, '' बहन निर्भया हम शर्मिंदा हैं कि हम सबके रहते ऐसा हुआ. ईश्वर तुम्हारी आत्मा को संतोष दे कि निर्मम गुनाहगारों को आख़िर सज़ा मिली.''
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