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सोशल: 'इंसान चारा खा सकते हैं तो चूहे दारू क्यों नहीं पी सकते'
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक बिहार पुलिस का कहना है कि ज़ब्त की गई नौ लाख लीटर शराब चूहों ने गटक ली है. हालांकि बादा में पुलिस मुख्यालय की तरफ से इस बात का खंडन किया गया.
ये बात लोगों के गले नहीं उतर पा रही थी कि आख़िर 9 लाख लीटर शराब चूहे कैसे पी सकते हैं. शुक्रवार को प्रेस-कॉन्फ्रेंस कर एडीजी मुख्यालय एसके सिंघल ने कहा, ''किसी भी थाने से ऐसी कोई सूचना नहीं आई है कि शराबबंदी के बाद जब्त शराब को चूहों ने गटक लिया है.''
बीबीसी हिंदी ने अपने फ़ेसबुक पन्ने पर लोगों से पूछा कि यदि ये दावा सच है तो कितने चूहों को ये शराब गटने में कितने दिन लगेंगे.
लोगों ने इस सवाल के मज़ेदार जवाब दिए हैं.
श्रवणनाथ ने लिखा, "30,000 चूहे एक महीने तक एक लीटर प्रति दिन मद्यपान करे तो 30,000×30=9,00,000"
धनंजय कुमार ने लिखा, "यदि चूहों ने मानहानि का दावा ठोक दिया तो नीतीश कुमार की कुर्सी भी जा सकती है."
अंकुर सिंह चाहल ने लिखा, "जब लालू यादव चारा खा सकते हैं तो चूहे नौ लाख लीटर शराब क्यों नहीं गटक सकते. याद रखिए लालूं है तो कुछ भी हो सकता है."
ग़ौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव को बिहार में हुए चारा घोटाले में दोषी क़रार दिए गए थे.
अली अब्बास ने लिखा, "जब एक इंसान दूसरे इंसानों के पंद्रह लाख पी गया तो चूहों ने दारू पीकर क्या कर दिया?"
शैलेश जैन ने लिखा, "जानवरों का चारा इंसान खा गये! तो इंसानो की दारू चूहे पी गये! लगता है चूहों ने बदला लिया है!"
एडवोकेट सुनील कुमार ने लिखा, "ये चूहों के क़द पर निर्भर करता है. अगर वो पांच फिट से लंबे हैं तो कम समय लगेगा."
राकेश कुमार ने लिखा, "बिहार पुलिस ने बिलकुल सही कहा है. अपने आप को चूहा बताया. ऐसी सच्चाई भला कौन बोलेगा."
डीसी श्रीवास्तव ने लिखा, "अगर चूहे सरकारी हैं तो क़रीब तीस दिन"