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सोशल: 'अखिलेश-मायावती ने भी भाजपा को वोट दिया'
उत्तर प्रदेश चुनावों के रूझानों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है. रुझानों के साथ ही सोशल मीडिया पर भी सरगर्मी तेज़ हो गई है.
लोग समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती पर चुटकियां ले रहे हैं.
अखिलेश यादव के गधे वाले बयान पर भी टिप्पणियां की जा रही हैं.
आशीष राजेंद्र राजावत ने फ़ेसबुक पर लिखा, "दौड़ शुरू, गधा आगे, घोडा पीछे."
ऋचा सिंह ने लिखा, "गुजरात के गधों ने दो नौजवानों की बैंड बजा दी. अब राहुल और अखिलेश बोलेंगे ढेंचू-ढेंचू."
चुनाव नतीजों से ठीक पहले अखिलेश यादव ने बीबीसी से बातचीत में बसपा से गठबंधन के संकेत दिए थे.
गठबंधन को लेकर भी चुटकियां ली जा रही हैं. सागर गुजराती ने फ़ेसबुक पर लिखा, "उधर कुछ लोग कह रहे हैं कि भाजपा इतनी सीटें भी नहीं छोड़ रही कि विरोधी आपस में मिलकर ही सरकार बना लें. ये तो असहिष्णुता है, घोर असहिष्णुता. बुरा न मानो, हो ली है."
सुधीर भारद्वाज ने ट्वीट किया, "रुझान देखकर तो ऐसा लग रहा है कि अखिलेश यादव और मायावती ने भी बीजेपी को वोट दिया है."
श्रवण सिंह ने लिखा, "कौन देश से राजा आयल, कौन देश से रानी! यूपी में हरले के बाद, अखिलेश लड़िहें परधानी !!! बोला..हई..रे..हई..रे..हई..हा!"
विकास सिंह डागर ने फ़ेसबुक पर लिखा, "वरुण गांधी से ज्यादा काम तो भाजपा के लिए राहुल गांधी कर रहे है."
अमित पांडे ने फ़ेसबुक पर लिखा, "यूपी के नतीजों का एकमात्र दुखद पहलू ये है कि अब कोई अखिलेश विकास की राजनीति नहीं करेगा."
राजेश लालवानी ने लिखा, "अगर अखिलेश और राहुल लड़के है तो मुलायम का बयान सही था. लड़को से गलती हो जाती है. गठबंधन गलती था ना. यूपी को ये नतीजे पसंद हैं.
योगेश शर्मा श्रोत्रिय ने फ़ेसबुक पर लिखा, "वाह भाई अखिलेश तुम्हारा तो गजब काम बोला!"
गरीब आदमी ने ट्वीट किया, "राहुल गाँधी को मिली सबसे बड़ी कामयाबी...अखिलेश यादव को डुबोने में हुए कामयाब."
देवेश त्रिपाठी ने लिखा, "जिस हाथी ने यूपी के 2014 लोकसभा चुनाव में अंडा दिया था. शायद उससे लोग कुछ ज्यादा ही अपेक्षा लगा बैठे."
नवेद चौधरी ने फ़ेसबुक पर लिखा, "मुस्लिम बहुल इलाक़ों में से भाजपा का निकलना मुसलमानों में जातिवाद और फ़िरक़ावाद कितना है उसका जीता जागता सबूत है."
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