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दाना मांझी को बहरीन से आई मदद
अपनी पत्नी का शव कंधे पर उठा कर 12 किलोमीटर पैदल चलने वाले ओड़िशा के आदिवासी दाना मांझी को बहरीन से आर्थिक मदद मिली है.
बहरीन के प्रधानमंत्री ख़लीफ़ा बिन सलमान अल-ख़लीफ़ा ने अगस्त में दाना मांझी की कहानी पढ़ी थी. इसे पढ़ने के बाद वे दुखी हो गए थे और उनके दफ़्तर ने भारत स्थित बहरीन दूतावास से संपर्क कर उन्हें कुछ धनराशि दे कर मदद की थी.
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शुक्रवार को 45 साल के दाना मांझी दिल्ली स्थित बहरीन दूतावास आए. वहां उन्हें 8.9 लाख रूपये का चेक भेंट किया गया.
वो और उनकी छोटी बेटी चौली चेक ले कर एयर इंडिया की उड़ान से ओड़िशा वापिस गए.
उन्होंने कहा, "मैं खुश हूं. मैं अपनी तीन बच्चियों की शिक्षा के लिए यह पैसा बैंक में रखूंगा. मुझे उम्मीद हैं कि उन्हें अच्छी शिक्षा मिले और नौकरी मिले."
24 अगस्त को दाना मांझी की पत्नी अमांग की भवानीपटना के एक अस्पताल में मौत हो गई थी, जहां वे टीबी के इलाज के लिए भर्ती थीं.
अस्पताल ने कथित तौर पर शव ले जाने के लिए एंबुलेंस मुहैया कराने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद वे कंधे पर अपनी पत्नी का शव उठा कर पैदल ही गांव की ओर निकल पड़े थे.
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