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बुधवार, 07 मई, 2008 को 10:20 GMT तक के समाचार
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माँ के दूध से बेहतर 'आईक्यू'
स्तनपान (फ़ाइल फ़ोटो)
ये अध्ययन 14 हज़ार बच्चों पर हुआ जो बेलारूस के अस्पतालों में पैदा हुए
ताज़ा शोध में कुछ और सबूत सामने आए हैं जिनसे पता चलता है कि फ़ॉर्मूला या पाउडर दूध पीने वाले बच्चों के मुक़ाबले माँ का दूध पीने वाले बच्चे ज़्यादा बुद्धिमान होते हैं.

कनाडा के मैकगिल विश्विद्यालय ने पाया कि छह साल तक की उम्र वाले बच्चों के 'इंटेलिजेंस क्वोशेंट' (आईक्यू) टेस्ट से पता चलता है कि जिन बच्चों ने माँ का दूध पिया होता है, वे बेहतर प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं.

चौदह हज़ार बच्चों पर किया गया स्तनपान से संबंधित ये नवीनतम अध्यन है, जिससे माँ के दूध और बच्चों की प्रतिभा के बीच इतना सकारात्मक संबंध सामने आया है.

लेकिन शोधकर्ता निश्चित नहीं हैं कि इसका संबंध सीधे माँ के दूध से है या फिर स्तनपान के ज़रिए माँ और बच्चे के बीच बनने वाले रिश्ते के कारण है.

बेलारूस के अस्पतालों में पैदा हुए बच्चे

ये नवीनतम अघ्यन बेलारूस के अस्पतालों में पैदा होने वाले बच्चों की परवरिश के दौरान हुआ. कई अस्पतालों में ऐसे कार्यक्रम चलाए जा रहे थे जिनके ज़रिए अधिक महिलाओं को स्तनपान के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा था.

अध्यन में पाया गया कि तीन महीने से बारह महीने तक माँ का दूध पीने वाले बच्चों में 'इंटेलिजेंस क्वोशेंट' औसत 5.9 अंक ज़्यादा था.

आरकाइव ऑफ़ जनरल साइकेट्री में रिपोर्ट किया गया कि अध्यापक भी इन बच्चों को अन्य बच्चों के मुकाबले में पढ़ाई के मामले में इनके प्रदर्शन को बेहतर मानते थे.

 लंबे समय तक बच्चो को केवल माँ का ही दूध मिलने से बच्चे की संज्ञानात्मक क्षमता का विकास बेहतर होता है
प्रोफ़ेसर माइकल क्रैमर

सामान्य मनोविज्ञान अभिलेखगार की रिपोर्ट के अनुसार, अध्यापकों ने इन बच्चों की लिखने और पढ़ने की शैक्षणिक क्षमता के स्तर को अत्यधिक ऊँचा पाया.

अग्रणी शोधकर्ता प्रोफ़ेसर माइकल क्रैमर के अनुसार, ''दीर्घकालीन स्तनपान बच्चे के संज्ञानात्मक विकास को सुधारने वाला कारक बनकर सामने आया है.''

इस शोध का नेतृत्व करने वाले प्रोफ़ेसर माइकल क्रैमर का कहना था, "लंबे समय तक बच्चों को केवल माँ का ही दूध मिलने से बच्चे की संज्ञानात्मक क्षमता का विकास बेहतर होता है."

माँ के दूध में 'फ़ैटी एसिड'

माँ के दूध में पाए जाने वाले 'फ़ैटी एसिड' को प्रतिभा बढ़ाने का कारक समझा जाता है, लेकिन स्तनपान के शारिरिक और भावुक पहलू मस्तिष्क प्रगति को हमेशा के लिए बदल सकते है.

शोधकर्ताओं ने सलाह दी है कि स्तनपान माँ और बच्चे के बीच बातचीत को बढ़ावा दे सकता है, जो बच्चे के विकास में मददगार हो सकता है.

प्रोफ़ेसर क्रैमर का मानना है कि स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए और अधिक प्रयास किए जाने चाहिए.

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