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शनिवार, 03 मई, 2008 को 12:38 GMT तक के समाचार
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वसायुक्त भोजन से मिर्गी के दौरे घटे
दिमाग़ (फ़ाइल फ़ोटो)
वसायुक्त आहार के इस्तेमाल से बच्चों को पड़ने वाले दौरों में एक तिहाई तक की कमी आई
ब्रिटेन में किए गए एक अध्ययन में संभावना व्यक्त की गई है कि वसायुक्त विशेष आहार से बच्चों में मिर्गी के दौरों को नियंत्रित किया जा सकता है.

अध्ययन के दौरान वसायुक्त आहार के इस्तेमाल से बच्चों को पड़ने वाले दौरों में एक तिहाई तक की कमी आई, जबकि इससे पहले दवाएँ लेने के बावजूद उन्हें रोज़ दौरे पड़ते थे.

लैंसेट न्यूरौलॉजी पत्रिका के शोधकर्ताओं की रिपोर्ट के मुताबिक़ ये आहार भुखमरी के स्वाँग को प्रभावित कर शरीर के चपायचय को परिवर्तित कर देता है.

बच्चों को कम कार्बोहाइड्रेट और नियंत्रित मात्रा वाले प्रोटीन के साथ अत्यधिक मात्रा का वसायुक्त आहार दिया गया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इस प्रकार के भोजन की बड़े पैमाने पर उपलब्धता होनी चाहिए.

शोध में 145 बच्चे

 हमें इसके प्रति समझदार होना चाहिए क्योंकि इस अध्यन में हमने गंभीर मिर्गी के रोग से पीड़ित बच्चों को शामिल किया था
प्रोफ़सर हैलेन क्रॉस

हालांकि ये तरीक़ा 1920 से चलन में है, लेकिन रोज़ाना देखभाल और आहार की तुलनात्मक दृष्टि से ये पहला परीक्षण है.

ये तरीक़ा किस तरह काम करता है, इसका ठीक अंदाज़ा तो नहीं है लेकिन लगता है कि वसा से पैदा होने वाले ‘कीटोन’ दौरे रोकने में मददगार हैं.

दो और 16 साल की उम्र के बीच के ऐसे 145 बच्चों को अध्यन में शामिल किया गया जिनमें दवा की कम से कम दो ख़ुराक देने के बाद भी कोई सुधार नहीं हो पा रहा था.

आधे बच्चों ने आहार तुरंत प्रारंभ कर दिया जबकि बाक़ी ने तीन महीने बाद शुरू किया. शोधकर्तओं ने रिपोर्ट में कहा कि आहार ले रहे बच्चों में दौरे पहले के मुक़ाबले एक तिहाई तक कम हुए हैं लेकिन जिन्होंने आहार आरंभ नहीं किया है उनकी अवस्था में कोई बदलाव नहीं है.

हालांकि इसके कब्ज़, उल्टी, ऊर्जा की कमी और भूख जैसे कुछ दुष्प्रभाव भी हैं.

इस अध्धयन की प्रमुख, प्रोफ़सर हैलेन क्रॉस का कहना है, "हमें इसके प्रति समझदार होना चाहिए क्योंकि इस अध्यन में हमने गंभीर मिर्गी के रोग से पीड़ित बच्चों को शामिल किया था."

उनका कहना है कि ब्रितानी दिशा निर्देशों में इस आहार को इलाज का एक विकल्प माना गया है लेकिन इसे बनाने वालों की कमी से ये अक्सर उपलब्ध नहीं होता था.

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