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इस जाड़े में ज़्यादा धुंधली होगी दिल्ली | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
साल 2007 और 2008 के जाड़ों में दिल्ली ज़्यादा धुंधली नज़र आएगी और लोगों में साँस के रोगों से संबंधित तकलीफें भी बढ़ सकती हैं. यह चेतावनी पर्यावरण संस्था सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट यानी सीएसई ने जारी की है. संस्था के अनुसार पिछले चार सालों में दिल्ली में वायु प्रदूषण काफ़ी बढ़ गया है और यदि तुरंत कुछ सख़्त क़दम नहीं उठाए गए तो स्थिति काफ़ी बिगड़ सकती है. लगभग सात साल पहले दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई क़दम उठाए थे इसके तहत सीएनजी से चलने वाली बसों और टैक्सी को भी शामिल किया गया. इससे शहर की हवा काफी साफ़-सुथरी हुई थी. लेकिन सीएसई का कहना है की पिछले सालों में शहर की सड़कों पर इतनी ज़्यादा संख्या में कारें आ गई हैं की प्रदूषण का स्तर एक बार फिर लगभग वहीं पहुँच चुका है जहाँ सात साल पहले था, यानी प्रदूषण रोकने के पिछले प्रयासों पर पूरी तरह से पानी फिर चुका है. बढ़ता प्रदूषण भारत की आर्थिक स्थिति इस समय अच्छी है जिससे कार बाज़ार भी चढाव पर है. प्रतिदिन दिल्ली में लगभग 1000 नए व्यक्तिगत वाहनों का पंजीकरण होता है. ख़बर है की देश की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स जल्द ही दुनिया की सबसे सस्ती कार बाज़ार में उतारने वाली है जिससे कारों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है. इस कार का अनुमानित मूल्य एक लाख रुपए होगा. सीएसई के अनुसार दिल्ली में प्रदूषण का स्तर पिछले चार सालों से बढ़ना शुरू हुआ है. विशेषज्ञों के अनुसार जाड़े के समय प्रदूषण काफी बढ़ जाता है जिससे साँस से संबंधित रोगों की तकलीफें बढ़ जाती हैं क्योंकि जब तापमान गिर जाता है तो धूल के कण वातावरण में एक धुंधली चादर की तरह लटके रहते है. इससे देखने में तो मुश्किल होती ही है, फेफड़ों में भी जकड़न सी महसूस होती है. दिल्लीवासियों के लिए इस बार जाड़े में होने वाला कोहरा कुछ जल्दी आ गया है और दिसंबर के बजाय नवंबर में ही धुंधलापन छाया हुआ है. कई लोग छींकने और खाँसने की शिकायत कर रहे हैं.
सीएसई के अनुसार प्रदूषण बढ़ने से दमा और फेफड़ों की बीमारियाँ फैलने का ख़तरा बढ़ जाता है और कभी-कभी तो फेफडों के कैंसर जैसी बीमारी भी हो जाती है. कॉमनवेल्थ गेम्स मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने पिछले हफ़्ते एक सम्मेलन में कहा था कि उनकी सरकार दिल्ली को रहने के लिए एक स्वस्थ और आरामदायक स्थान बनाने के प्रयास कर रही है और 2010 तक शहर को पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त कर लिया जाएगा. ग़ौरतलब है कि 2010 में दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स होने वाले हैं. उन्होंने कहा की लोगों को डीज़ल से चलने वाले वाहनों के ख़िलाफ़ ख़ुद आवाज़ उठानी चाहिए. दिल्ली सरकार ज़ल्द ही डीज़ल से चलने वाले लगभग चालीस हज़ार हल्के वाहनों को सीएनजी में परिवर्तित करने की योजना ला रही है. दिल्ली सरकार चाहती है के प्रदूषण से निपटने में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकारें भी सामने आएँ क्योंकि दिल्ली में अच्छा ख़ासा प्रदूषण पड़ोसी राज्यों से आने वाले वाहनों से भी होता है. सीएसई का कहना है की इस मामले में ज़रा भी देरी की गुंजाइश नहीं है. संस्था की प्रमुख, सुनीता नारायण के अनुसार, "दिल्ली ने एक बार प्रदूषण मिटा कर दिखाया है और आगे भी ऐसा हो सकता है लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो दिल्ली पर्यावरण हादसे के कग़ार पर पहुँच सकती है." | इससे जुड़ी ख़बरें 'एशिया में प्रदूषण तीन गुना तक बढ़ेगा'14 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस कोलकाता में पुराने वाहनों पर प्रतिबंध17 मई, 2005 | भारत और पड़ोस अर्ध कुंभ के मद्देनज़र 80 कारखाने बंद15 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस चीनी नदी में सौ टन ज़हरीला रसायन25 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना सबसे प्रदूषित शहरों में भारत का रानीपेट भी19 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना कार बनाने वालों के लिए नए लक्ष्य07 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना ग्लोबल वॉर्मिंग और भारत पर ख़तरा19 अप्रैल, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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