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आर्कटिक की बर्फ़ पर मंडराता ख़तरा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका और कनाडा के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आर्कटिक महासागर में अगले कुछ दशकों में ऐसे क्षेत्र गायब हो सकते हैं, जिनमें साल भर बर्फ़ जमीं रहती है. अमरीकी जियोफ़िज़िकल यूनियन की सेन फ़्रांसिस्को में हुई बैठक में प्रस्तुत ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक आर्कटिक में गर्मियों में पिघली बर्फ़ की पूरी भरपाई नहीं हो पा रही है. आँकडों से स्पष्ट होता है कि साल भर जमीं बर्फ़ का नज़ारा 2040 में ओझल हो सकता है. पिछले माह महासागर के जितने हिस्से में बर्फ़ जमीं हुई थी, वह इसके ऐतिहासिक औसत से 20 लाख वर्ग किलोमीटर कम है. जाने माने बर्फ़ विशेषज्ञ मार्क सेरेज़ ने कहा, "ये अलास्का जितना बड़ा इलाका है." अध्ययन से जुड़े अमरीका के वायुमंडलीय शोध के राष्ट्रीय केन्द्र (एसीएआर), वाशिंगटन विश्वविद्यालय और मैकगिल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ये अनुमान लगाया है. इस अध्ययन से जुड़ी डॉक्टर मैरिका हॉलैंड का कहना था, "जैसे-जैसे बर्फ़ घटती है और सागर आर्कटिक क्षेत्र में और गर्मी पहुँचाता है और पानी और धूप ग्रहण करता है, गर्मी बढ़ने की दर और बर्फ़ बिघलने की दर बढ़ेगी. हमें नहीं लगता कि ऐसी स्थिति लाखों साल में कभी रही है और आर्कटिक क्षेत्र के जल-वायु में नाटकीय बदलाव आ रहा है." इस तरह वैज्ञानिकों के अनुसार आर्कटिक में खुले पानी का क्षेत्र सूर्य की ज़्यादा ऊष्मा शोषित कर रहा है और ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया में और ते़ज़ी आने की संभावना है. | इससे जुड़ी ख़बरें आर्कटिक ग्लेशियर का पिघलाव14 सितंबर, 2006 | विज्ञान संकट में ध्रुवीय भालू09 जनवरी, 2003 | विज्ञान क्रॉयसैट लाँच करते ही टूटकर बिखरा09 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान तेज़ी से ख़िसक रहा है चुंबकीय ध्रुव12 दिसंबर, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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