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शरीर की कोशिका से टीबी का इलाज | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने शरीर के इम्यून सिस्टम में एक ऐसे कोशिका का पता लगाया है जो टीबी जैसी ख़तरनाक बीमारी से बचाव में काम आ सकती है. जब टीबी का आक्रमण शरीर पर होता है तो यही कोशिका सबसे पहले इम्यून सिस्टम को सूचित करती है और तब शरीर का इम्यून सिस्टम इससे बचने के उपाय करता है. अनुसंधान करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि बीमारी संबंधी सूचना देने वाली इस कोशिका का उपयोग टीबी के इलाज के तौर पर किया जा सकता है. पूरी दुनिया में इस मर्ज़ से हर साल 25 लाख लोग मर जाते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है बैक्टीरिया के आक्रमण के बाद रोगों से लड़ने वाले कोशिका कुछ हद तक इसके आक्रमण को रोकने की कोशिश करते है. इसलिए इसका उपयोग इस बीमारी के ख़ात्मे के तौर पर भी किया जा सकता है. वैज्ञानिकों ने इस कोशिका को सीसीआर-5 नाम दिया है. अगर शरीर में यह कोशिका न हो तो टीबी रोग के आक्रमण की सूचना इम्यून सिस्टम को नहीं मिलती और वह इससे बचने के उपाय नहीं कर पाता. शोध से जुड़े डा. बेट कैंपमेन का कहना है “इस शोध से एक महत्वपूर्ण तकनीक के विकसित होने की संभावना बढ़ी है, बस समझ लीजिए कि पहेली का एक सिरा मिल गया है और हम उत्तम दवा विकसित करने में कामयाब हो सकते है”. टीबी की रोकथाम करने वाली मौजूदा दवा सौ फीसदी प्रभावी नहीं है और इसका इस्तेमाल भी लगातार कम से कम छह महीने करना पड़ता है. इसका मतलब यह है कि बहुत से लोग अगर इस कोर्स को पूरा नहीं करते तो इस मर्ज का आक्रमण फिर से होने का ख़तरा बना रहता है. कार्डियो थ्रेस सेंटर के प्रमुख पीटर डेवीज का कहना है “ यह एक अच्छी बात है कि टीबी विरोधी जंग में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता शामिल हो गए हैं क्योंकि इस बीमारी से मरने वालों की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है. हमें इस बीमारी के इलाज में नए वैक्सीन की काफ़ी ज़रूरत है ” | इससे जुड़ी ख़बरें मूंगफली से टीबी का इलाज03 मार्च, 2003 | विज्ञान टीबी के लिए नया टेस्ट04 अप्रैल, 2003 | विज्ञान अफ्रीका में टीबी की हालत चिंताजनक24 मार्च, 2005 | विज्ञान टीबी का ऐसा रुप जो 'लगभग लाइलाज' है06 सितंबर, 2006 | विज्ञान ज़्यादा टीवी देखने से पीठ में दर्द26 अगस्त, 2004 | विज्ञान बुढ़ापे में बहरेपन के लिए जीन ज़िम्मेदार28 अगस्त, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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