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तंबाकू उत्पादों पर कड़े नियंत्रण की माँग | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सिगरेट के अलावा अन्य तंबाकू उत्पादों के उपयोग और व्यापार पर भी प्रभावी नियंत्रण के लिए तत्काल क़दम उठाए जाने की अपील की है. अंतरराष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस के मौक़े पर यह अपील की गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि सिगरेट के व्यापार और विज्ञापन के बारे में कड़े नियम-क़ानून बनाए जाने के बाद तंबाकू उद्योग ने अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर ज़ोर देना शुरू कर दिया है. इन उत्पादों में चबाए जाने और सूँघे जाने वाले तंबाकू उत्पाद, हुक्कों में उपयोग किए जाने वाले तंबाकू उत्पाद आदि शामिल हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता व्यक्त की है कि तंबाकू कंपनियाँ इन उत्पादों को युवाओं और महिलाओं में लोकप्रिय करने की कोशिश कर रही हैं. चिंता तंबाकू कंपनियाँ चबाए जाने, सूँघे जाने और हुक्कों में उपयोग किए जाने वाले उत्पादों को सिगरेट से कम नुक़सानदेह बता कर बेच रही हैं, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस दावे में सच्चाई नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बात पर भी चिंता ज़ाहिर की है कि सिगरेट कंपनियाँ ‘लाइट’, ‘माइल्ड’ और ‘लो टार’ जैसे नामों का उपयोग कर सिगरेट को स्वास्थ्य के लिए कम नुक़सानदेह बता रही हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हर तरह के तंबाकू उत्पाद को हानिकारक बताते हुए इनके ख़िलाफ़ कड़े नियम-क़ानून बनाए जाने की ज़रूरत बताई है. इस बीच आज ही प्रकाशित एक सर्वे के अनुसार यूरोप के 86 प्रतिशत लोग दफ़्तरों और काम की अन्य जगहों में धूम्रपान पर पाबंदी के पक्ष में है. यहाँ तक कि 61 फ़ीसदी लोग शराबघरों में भी धूम्रपान की अनुमति नहीं दिए जाने के पक्ष में हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें आज़माने भर से पड़ सकती है आदत25 मई, 2006 | विज्ञान ब्रिटेन में धूम्रपान पर लगी पाबंदी14 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना अमिताभ ने 'सिगार' मामले पर माफ़ी माँगी10 जनवरी, 2006 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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