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पहली बार जंगल गया पांडा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन में पिछले दिनो शोध केंद्र में पले-बढ़े एक विशाल पांडा को पहली बार जंगल में छोड़ा गया. इस पांडा का नाम है ज़ियांग-ज़ियांग जिसका मतलब होता है - शुभ. ज़ियांग को चीन के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में स्थित सिचुआन प्रांत के वोलोंगे पांडा शोध केंद्र से जंगल में छोड़ा गया. चीन की सरकारी एजेंसी सिनहुआ के अनुसार पांडा के शरीर में ग्लोबल पोज़िशनिंग डिवाइस यानी ऐसे उपकरण लगा दिए गए हैं जिनसे ज़ियांग की स्थिति का पता चल सके. पांडा दुनिया की उन दुर्लभ प्रजातियों मे गिना जाता है जिनका अस्तित्व ख़तरे में है. फ़िलहाल जंगलों में केवल 1600 पांडा रह रहे हैं. वहीं शोध केंद्रों या चिड़ियाघर आदि में और 180 पांडा मौजूद हैं. पांडा के अस्तित्व को जंगलों की कमी, शिकार और उनमें प्रजनन की कम दर के कारण ख़तरा है. ज़ियांग-ज़ियांग
वोलोंग शोध केंद्र में वर्ष 2001 में जन्मे ज़ियांग-ज़ियांग का वज़न है 80 किलोग्राम और उसका कद है तीन फ़ीट सात ईंच. पिछले तीन वर्षों से उसे विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा था जिससे कि वह जंगल के माहौल के लिए तैयार हो सके. शोध केंद्र के निदेशक झांग हेमिन ने बताया कि ज़ियांग ने खाना तलाशना, अपने इलाक़े की पहचान करना और किसी बाहरी व्यक्ति-जंतु से स्वयं को बचाना सीख लिया है. इसके अलावा उसने रक्षात्मक उपाय, मसलन गुर्राना और दाँत काटना भी सीख लिया है. झांग हेमिन के अनुसार पांडा को इस समय इसलिए रिहा किया गया क्योंकि इस समय बाँस की कोपलें निकलती हैं जो पांडा का मनपसंद भोजन होता है. पांडों के बचाव के लिए पिछला वर्ष बड़ा सफल रहा था जब कृत्रिम तरीक़े से चीन में 25 पांडों का जन्म हुआ. |
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