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'अंतरिक्ष कार्यक्रम अच्छी स्थिति में' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया भर में इनदिनों अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ी तस्वीरें देखने को मिल रही हैं. इस योजना में कई बड़े देश शामिल है. ऐसे में कहाँ तक पहुँचा है भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम? इसरो के चेयरमैन डॉक्टर माधवन नायर ने कहते हैं, "हम इस ओर काम कर रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का हिस्सा बन सकें. अगले कुछ सालों में भारत भी इस परियोजना का हिस्सा हो सकता है." उन्होंने कहा कि चंद्रयान पर भी इसरो के वैज्ञानिकों का ख़ास ध्यान है. चंद्रयान का प्रक्षेपण वर्ष 2007 या 2008 में होना है. चंद्रयान भारत का अपना उपग्रह है जो चाँद के आसपास चक्कर लगाएगा. उन्होंने बताया कि हाल ही में हमने अपने चंद्रयान पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के उपकरण चाँद के पास तक ले जाने के लिए छह प्रस्तावों को सहमति दी है जो यूरोपीय अंतरिक्ष संस्था और अमरीका के हैं..” कार्यक्रम का बजट डाक्टर नायर कहते हैं कि इसमें कोई शक नहीं कि कई महत्वपूर्ण शोधकार्य या दूसरे काम सिर्फ़ अंतरिक्ष यात्री ही कर सकता है लेकिन उसमें पैसा लगता है.”
उनका कहना है कि अंतरिक्ष में रोबोट के ज़रिए काम करवाना काफ़ी सस्ता पड़ता है. माधवन नायर ने बताया कि इस वक़्त सालाना बजट 50 करोड़ डॉलर है और सरकार अंतरिक्ष कार्यक्रमों में अब तक 2 अरब डॉलर से ज़्यादा ख़र्च कर चुकी है . उन्होंने कहा कि एक अध्ययन के अनुसार अंतरिक्ष कार्यक्रमों से होने वाला फ़ायदा इससे दो से तीन गुना ज़्यादा हो चुका है. डॉक्टर नायर के मुताबिक़ अब हमें सोचना ये है कि अगर ज़्यादा ख़र्च कर हम अपना दूसरा अंतरिक्ष यात्री भेजते हैं तो उसका फ़ायदा क्या होगा? ” पीएसएलवी सिर्फ़ तीन दशक पहले रूस या अमरीका के रॉकेट के ज़रिए भारत अपने उपग्रह अंतरिक्ष में भेजता था लेकिन अब वो काफ़ी बेहतर स्थिति में आ गया है. जर्मनी, कोरिया, बेल्जियम और कोरिया की मदद करने के बाद अगले साल की शुरुआत में भारत एक भारी उपग्रह पीएसएलवी लॉन्चर के ज़रिए अंतरिक्ष में छोड़ने वाला है. 84 में स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने थे. यही नहीं अमरीका में प्रशिक्षण लेने वाले भी पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं. अमरीका से उन्होंने बीबीसी को बताया कि जहाँ तक भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का सवाल है तो गेंद अब भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र के पाले में है. |
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