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झूठ बोले कौवा काटे या फिर... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कहावत रही है कि झूठ बोले कौवा काटे, लेकिन अब झूठ बोलने पर कौवा काटे या ना काटे लेकिन मशीन ज़रूर आपको पकड़ लेगी. हो सकता है कि कोई व्यक्ति आप अपनी बात छुपाने या जाँच अधिकारियों की आँखों में धूल झोकने के लिए बहुत माहिराना अंदाज़ में झूछ बोलने की कोशिश करे और उसके चेहरे के अंदाज़ से कुछ भी ज़ाहिर ना हो लेकिन अब कुछ ऐसी मशीनें तैयार हो रही हैं जो दिमाग़ से ही झूठ का पता लगा लगेंगी. कल्पना कीजिए की अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के अधिकारियों के पास ऐसी मशीनें हों जो सीधे आदमी के दिमाग़ तक पहुँचकर वो सबकुछ जान लें जो उस दिमाग़ में चल रहा हो यानी वह आदमी झूठ बोल रहा है या सच या फिर अधिकारियों को भटकाकर धोखा देने की कोशिश कर रहा है. यह कल्पना किसी फ़िल्म की कहानी जैसी लगती है लेकिन यह भी सच है कि इस पर काफ़ी आगे तक काम हो चुका है. ब्रितानी सरकार ने तो उन अभियुक्तों को झूठ पकड़ने वाली मशीन के सामने हाज़िर होना ज़रूरी कर दिया है जो बच्चों के साथ अपराधों की वजह से पकड़े गए हैं. पेंटागन ने तो एक वैज्ञानिक डॉक्टर जेनिफ़र वेंडेमिया को पचास लाख डॉलर की राशि इस सिद्धांत पर काम करने के लिए दे दी है कि क्या दिमाग़ की हलचल को देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि वह व्यक्ति झूठ बोल रहा है या नहीं.
डॉक्टर जेनिफ़र का दावा है कि इस सिद्धांत को 94 से 100 प्रतिशत तक सही पाया जाता है और यह झूठ पकड़ने की मौजूदा पद्यतियों से कुछ आगे का सिद्धांत है. मौजूदा पद्यतियों में दिल की धड़कन और रक्तचाप, साँस लेने की गति और पसीने की हालत का सहारा लिया जाता है. डॉक्टर जेनिफ़र की पद्यति में चेहरे और खोपड़ी पर 128 बिजली की छोटी-छोटी छड़ें रखी जाती हैं जो दिमागी हलचल को प्रति सेकंड की दर से मशीन में पहुँचाती हैं. जिस व्यक्ति की जाँच हो रही होती है, उसे सिर्फ़ जाँचकर्ता के सवालों का जवाब देना होता है और बाक़ी काम वह मशीन कर रही होती है. लेकिन इस पद्यति पर पूरी तरह भरोसा करने और इसे मौजूदा पद्यतियों की जगह लेने से पहले लंबा सफ़र तय करना होगा और बहुत सारे परीक्षणों से भी गुज़रना होगा. मौजूदा पॉलीग्राफ़ पद्यति की खोज क़रीब एक सदी पहले हुई थी लेकिन यह झूठ पकड़ने के लिए अभी तक सबसे ज़्यादा भरोसेमंद पद्यति मानी जाती है. ब्रिटेन में अनिवार्य ब्रिटेन सरकार ने बच्चों के साथ यौन अपराध के अभियुक्तों को झूठ पकड़ने की पद्यति का सामना अनिवार्य कर दिया है और यह क़ानून पिछले सप्ताह गुरूवार को लागू किया गया. इस योजना के तहत ऐसे अभियुक्तों से यह पूछा जाएगा कि क्या उनका संपर्क बच्चों से रहा है, और इस दौरान उनकी मानसिक और शारीरिक प्रतिक्रिया की जाँच की जाएगी. लेकिन कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह पद्यति त्रुटियों से भरी हुई है. अमरीकी वैज्ञानिकों के महासंघ के स्टीवन आफ़्टरगुड कहते हैं, "सामान्य लोगों के लिए यह प्रभावी हो सकती है लेकिन मैं नहीं समझता कि मनोरोगियों या मानसिक रूप से असंतुलित लोगों पर इसका असर होता है." आफ़्टरवुड का कहना था कि वह नहीं जानते कि डॉक्टर जेनिफ़र ने कोई नई मशीन ईजाद की है लेकिन अगर यह सही है कि यह मशीन दिमाग़ पढ़ने की क्षमता रखती है तो इससे लोगों की निजी ज़िंदगी के अधिकार पर गंभीर सवाल उठाते हैं. "अमरीका में तो यह असंवैधानिक हो सकता है क्योंकि वहाँ संविधान के पाँचवें संशोधन के तहत नागरिकों को यह अधिकार है कि वे ख़ुद को ही अभियुक्त साबित करने की प्रक्रिया से ख़ुद को बचाएँ." |
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