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दृष्टिहीन लोगों के लिए इलेक्ट्रॉनिक आँखें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापान के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक आँख बनाई है, जिसकी मदद से दृष्टिहीन बिना किसी परेशानी के घूम-फिर सकेगें. भौतिकविज्ञान संस्थान में किए गए एक शोध के अनुसार यह आँख चश्मे पर जड़ी होगी, जिसे पहन कर बिना किसी की सहायता के सड़क पार की जा सकेगी. इस इलेक्ट्रॉनिक आँख में एक कैमरा और कम्पयूटर लगा होगा जो ट्रैफिक लाईट के बदलते रंगों को बताने और सड़क की चौड़ाई नापने जैसे काम कर सकेगा. इस तरह से इक्कठा की गई जानकारी को ध्वनि आधारित व्यवस्था के ज़रिए पहनने वाले तक पहुँचाया जाएगा. क्योटो प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक तादायोशी शिओयामा का कहना है, “ कैमरा आँखों के पास लगा होगा और एक बहुत छोटा कम्पयूटर उससे जुड़ा रहेगा, जो सारी सूचनाएँ और निर्देश कान के नज़दीक लगे स्पीकर पर दृष्टिहीनों को देगा.“ यह आँख इतनी उन्नत है कि इससे न सिर्फ़ पैदल पार-पथ या ज़ैब्रा क्रॉसिंग का पता लगाया जा सकेगा बल्कि सड़क की चौड़ाई को भी पूरी तरह से नापा जा सकेगा, इसके साथ ही यह आँख, लाल से हरी होती हुई ट्रैफिक लाईट के बारे में भी बता सकेगी. पैदल पार-पथ की लम्बाई नापने के लिए यह आँख प्रक्षेपीय रेखागणित का सहारा लेती है. कैमरे का कमाल सड़क पर ज़ैब्रा क्रॉसिंग है भी या नहीं यह जानने के लिए चित्र में सफेद पट्टियों की चौड़ाई और उनके बीच की दूरी की गणना की जाती है. शोधकर्ताओं द्वारा इलेक्ट्रॉनिक आँख पर किए गए परीक्षणों के दौरान,पाँच प्रतिशत से भी कम की ग़लती सामने आई. दृष्टिहीनों के रॉयल नेशनल इंस्टीट्यूट की कैथरीन फिप्पस का मानना है, "दृष्टिहीनों और आंशिक रुप से अंधे व्यक्तियों के लिए चलना फिरना एक गंभीर समस्या है, और इस तरह के नए उपकरण हमेशा ही स्वागतयोग्य होते हैं जिनकी मदद से ऐसे लोग बिना परेशानी घूम-फिर सकें.". |
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