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कंप्यूटर की मार आँखों पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों का कहना है कि कंप्यूटर के अधिक इस्तेमाल से आँख की ग्लूकोमा जैसी कई बीमारियाँ हो सकती हैं. ग्लूकोमा में आँख की नसें धीरे-धीरे कमज़ोर होती जाती हैं और अगर इलाज नहीं किया गया तो आँख की रोशनी चली जाती है. दस हज़ार जापानी कर्मचारियों पर किए गए शोध के आधार पर ये परिणाम निकाले गए हैं जिसमें कहा गया है कि कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल करने वालों की पास की नज़र कमज़ोर हो जाती है जो आगे चलकर ग्लूकोमा का रूप ले लेती है. चार अलग अलग जापानी कंपनियों में काम करने वाले लोगों की आँखों की जाँच के बाद वैज्ञानिक डॉक्टर मासायुकी तातेचिमी ने लोगों की कंप्यूटर पर वक़्त बिताने की आदत और आँखों की बीमारियों के इतिहास के बारे में जानकारी एकत्र की. कंप्यूटर का इस्तेमाल करने वालों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया--मामूली, अधिक और बहुत अधिक. कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल करने वालों में आँख की बीमारियाँ अधिक पाई गईं, कुल मिलाकर पाँच प्रतिशत से अधिक लोगों में आँख की बीमारियाँ पाई गईं. गहराई से विश्लेषण करने पर पाया गया कि कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल करने वालों में नज़दीक की नज़र की कमज़ोरी और ग्लूकोमा जैसी बीमारियाँ अधिक पाई गईं. आशंका वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है, "आने वाले वर्षों में जिस तरह कंप्यूटर का इस्तेमाल बढ़ेगा, स्वास्थ्य सेवाओं पर आँख की बीमारियों से ग्रस्त लोगों का इलाज करने का दबाव बढ़ता जाएगा." वैज्ञानिकों का कहना है कि इस शोध को और आगे बढ़ाने की ज़रूरत है क्योंकि कंप्यूटर इस्तेमाल करने वालों की बढ़ती तादाद को देखते हुए यह मामला काफ़ी महत्वपूर्ण है. इस रिपोर्ट में वैज्ञानिक जाँच से अधिक महत्व आँकड़ों को दिया गया है लेकिन एक बात स्पष्ट है कि कंप्यूर और आँख की बीमारियों के बीच संबंध स्थापित होना एक महत्वपूर्ण बात है जिससे कई नए शोध आगे बढ़ेंगे. इस शोध के बाद कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा कि वे कर्मचारियों पर समय-समय पर काम से छुट्टी दें और उनकी आँखों की नियमित जाँच कराएँ वर्ना अमरीका जैसे देशों में मुआवज़े की माँग की बाढ़ आ सकती है. |
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