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तारे में हीरा, या हीरे का तारा! | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
खगोलशास्त्रियों ने दूर आसमान में टिमटिमाता एक ऐसा तारा खोजा है जो वास्तव में हीरे का अथाह भंडार है. यानी अरबों-खरबों कैरेट के हीरे एक साथ. इस तारे को 'लूसी' नाम दिया गया है. वैज्ञानिकों ने पॉप बैंड बीटल्स के गाने 'लूसी इन द स्काई विथ डायमंड्स' से यह नाम लिया. धरती से से 50 प्रकाश वर्ष दूर सेंटाउरस नक्षत्र मंडल में स्थित इस तारे में कार्बन क्रिस्टल 1500 किलोमीटर दायरे में फैला हुआ है. हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोफ़िज़िक्स के खगोलविद ट्रैविस मेटकैफ़ ने कहा, "किसी जौहरी को इतने बड़े हीरे की ग्रेडिंग करने के लिए कहा जाए तो उसे अपनी आँख में सूरज के आकार के मैग्नीफ़ाइंग लूप लगाने के बारे में सोचना होगा." लूसी जैसे अरबों-खरबों कैरेट के हीरे के मुक़ाबले धरती पर ज्ञात सबसे बड़ा हीरा मात्र 530 कैरेट का है. स्टार ऑफ़ अफ़्रीका नामक यह हीरा ब्रितानी राज परिवार के पास है. इसे 3,100 कैरेट वजनी हीरे के पत्थर से तराशा गया था. व्हाइट ड्वार्फ़ सुदूर अंतरिक्ष में मिला हीरे का तारा दरअसल एक रवाकृत व्हाइट ड्वार्फ़ है. व्हाइट ड्वार्फ़ यानी किसी ऊर्जाहीन तारे की ठोस केंद्रिका. हाल के अध्ययनों से ज़ाहिर हुआ है कि व्हाइट ड्वार्फ़ से न सिर्फ़ विकिरणों का प्रसार होता रहता है, बल्कि उसमें कंपन भी होता रहता है. वैज्ञानिकों को अब तक तो पता था ही कि तारे के केंद्र में पाए जाने वाले तत्व क्रिस्टल या रवे के रूप में होते हैं.
अब व्हाइट ड्वार्फ़ के कंपन का विश्लेषण कर उसके अंदर के पदार्थों का पता लगाना उसी तरह संभव हो गया है, जैसे भूगर्भशास्त्री भूकंपीय तरंगों का अध्ययण कर धरती की कोख में मौजूद पदार्थों की जानकारी पाते हैं. और इसी तरीके से लूसी के हीरे के भंडार का पता चल पाया है. मैटकेफ़ कहते हैं, "हमने पाया कि इस व्हाइट ड्वार्फ़ के केंद्र में मौजूद कार्बन क्रिस्टल का रूप ले चुका है यानि ब्रह्मांड के ज्ञात सबसे बड़े हीरे में बदल चुका है." वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अपना सूर्य भी कोई पाँच अरब साल बाद अपनी ऊर्जा ख़त्म कर व्हाइट ड्वार्फ़ में बदल जाएगा. और उसके दो अरब साल बाद सूर्य भी एक विशाल हीरे में बदल जाएगा. |
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